" /> सर्वोच्च न्यायालय का महत्वपूर्ण  फैसला, अंतिम वर्ष की परीक्षा होगी ही!, परीक्षा के बिना डिग्री नहीं!!

सर्वोच्च न्यायालय का महत्वपूर्ण  फैसला, अंतिम वर्ष की परीक्षा होगी ही!, परीक्षा के बिना डिग्री नहीं!!

परीक्षा के बिना डिग्री नहीं, अंतिम वर्ष की परीक्षा होगी ही! ऐसा महत्वपूर्ण पैâसला कल सर्वोच्च न्यायालय ने दिया। अंतिम वर्ष की परीक्षा लेने के संदर्भ में यूजीसी द्वारा ६ जुलाई को जारी किए गए दिशा-निर्देश उचित ही हैं। ऐसा न्यायालय ने कहा। इसके चलते परीक्षा को लेकर लाखों विद्यार्थियों और पालकों की मन की शंका दूर हो गई है।
न्यायमूर्ति अशोक भूषण की अध्यक्षता में न्यायमूर्ति आर. सुभाष रेड्डी और न्यायमूर्ति एम.आर. शाह की खंडपीठ ने यह निर्णय लिया है। अंतिम वर्ष की परीक्षा न लेकर पूर्व परीक्षा के गुणों के आधार पर डिग्री देना पर्याप्त नहीं। राज्यों को परीक्षा रद्द करने का अधिकार है। लेकिन परीक्षा के बिना विद्यार्थियों को डिग्री नहीं दी जा सकती। कोरोना के परिप्रेक्ष्य पर राज्यों को आपदा प्रबंधन अभियान के तहत परीक्षा की तिथि अगर आगे बढ़ानी है तो यूजीसी के साथ चर्चा कर नई तिथि के बारे में निर्णय ले सकते हैं। यह विद्यार्थियों के भविष्य का सवाल है और देश की उच्च शिक्षा के स्तर को बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है। ऐसा खंडपीठ ने कहा। अंतिम वर्ष की परीक्षा ३० सितंबर तक लेने का निर्देश यूजीसी ने देश की यूनिवर्सिटियों को दिया है। विभिन्न राज्य सरकारों, विद्यार्थियों और संगठनों ने यूजीसी के इस निर्णय को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। इसमें युवासेना की याचिका भी शामिल थी। सभी याचिकाओं पर १८ अगस्त को सुनवाई हुई थी। परीक्षा रद्द करने का राज्य सरकारों का निर्णय कानून विरुद्ध है। परीक्षा के संदर्भ में नियम बनाने का अधिकार यूजीसी को है। ऐसा सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने उस दौरान कहा था। उस पर न्यायालय ने अपना अंतिम निर्णय सुरक्षित रखा था।
जेईई, नीट, परीक्षा आगे बढ़ाने की पुनर्विचार याचिका दायर
जेईई-मेन और नीट परीक्षा लेने के केंद्र सरकार को अनुमति देने के विरोध में देश के छह राज्यों के मंत्रियों ने सर्वोच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दायर की है। यह याचिका महाराष्ट्र के उच्च शिक्षा मंत्री उदय सामंत, पश्चिम बंगाल के मोलोय घातक, झारखंड के रामेश्वर ओराओन, राजस्थान के रघु शर्मा, छत्तीसगढ़ के अमरजीत भगत और पंजाब के बी.एस. सिंधु ने दायर की है। कांग्रेस की अध्यक्ष सोनिया गांधी के नेतृत्व में गैर भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ हुई बैठक में उक्त निर्णय लिया गया था। एड. सुनील फर्नांडिस के माध्यम से यह याचिका दायर की गई है। न्यायालय के इस निर्णय से परीक्षा में बैठनेवाले विद्यार्थियों का ही नहीं बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा को भी खतरा होगा। ऐसा याचिका में कहा गया है।
राज्य सरकारों को मदद करेंगे
सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय व यूजीसी के उपाध्यक्ष के आश्वासन के बाद अंतिम वर्ष की परीक्षा को लेकर जारी शंका दूर हो गई है। अब परीक्षा वैâसी लेनी है, इसका निर्णय यूनिवर्सिटी ले सकती है और उसके लिए राज्य सरकारें जो मदद मांगेगी, उसके लिए हम मदद करेंगे। ऐसा आश्वासन यूजीसी के उपाध्यक्ष डॉ. भूषण पटवर्धन ने दिया है।

`विद्यार्थियों के हित के लिए युवासेना दृढ़’-पालकमंत्री आदित्य ठाकरे
सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का युवासेना स्वागत करती है। सर्वोच्च न्यायालय ने हमारा एक महत्वपूर्ण मुद्दा माना है। महाराष्ट्र आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के निर्णय को कायम रखा। यूजीसी ने ३० सितंबर तक की डेडलाइन भले ही दी हो लेकिन परीक्षा कब और कैसी लेनी है, इसका निर्णय संबंधित राज्य ले सकता है। ऐसा भी न्यायालय ने कहा है। विद्यार्थी, शिक्षक, शिक्षकेतर कर्मचारियों और उनके परिजनों के हित और उनके बेहतर स्वास्थ्य के लिए युवासेना दृढ़ है। ऐसा युवासेनाप्रमुख व राज्य के पालकमंत्री आदित्य ठाकरे ने ट्वीट कर कहा है।

चर्चा कर निर्णय लेंगे! -उदय सामंत
सुप्रीम कोर्ट ने परीक्षा को लेकर जो पैâसले दिए हैं, उसका सम्मान करते हुए राज्य सरकार संबंधित लोगों से चर्चा कर अंतिम वर्ष की परीक्षाओं के बारे में निर्णय लेगी। यह जानकारी उच्च व तकनीकी शिक्षा मंत्री उदय सामंत ने दी। कल परीक्षा के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के पैâसले के बाद उच्च और तकनीकी शिक्षा मंत्री सामंत ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए उक्त बातें कहीं।
उच्च और तकनीकी शिक्षा मंत्री उदय सामंत ने कहा कि सभी गैर-कृषि विश्वविद्यालयों का प्रत्यक्ष मुलाकात करके, कुलपति, कलेक्टर और स्थानीय प्रशासन के साथ विस्तृत विचार-विमर्श के बाद छात्रों के स्वास्थ्य पर पूर्ण विचार करने के बाद परीक्षा की योजना बनाई जाएगी। इसी के साथ मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, राज्य आपत्ति व्यवस्थापन समिति, मंत्रिमंडल के सभी सदस्यों से सविस्तार चर्चा करके विद्यार्थियों की मानसिकता को ध्यान में रखते हुए, राज्य सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए निर्णय लेगी कि कोई शैक्षिक नुकसान न हो। ऐसा सामंत ने कहा। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के पैâसले का सम्मान करते हैं। सुप्रीम कोर्ट में, राज्य सरकार ने राज्य में कोविड-१९ के समग्र प्रसार, छात्रों और अभिभावकों की मानसिकता, कुलपति के सुझावों और कुछ शैक्षिक संगठनों के सुझाओं पर विचार करते हुए सरकार ने अपना पक्ष सुप्रीम कोर्ट में रखा था। ऐसा सामंत ने बताया। इसके अलावा इस वर्ष से माननीय उच्च न्यायालय ने आदेश दिया कि सीजीपीए तरीके से परिणाम घोषित करके डिग्री प्रदान की जाए।