" /> एक बंदर पिंजरे के अंदर!, बदमाशी के बदले मिली उम्रकैद

एक बंदर पिंजरे के अंदर!, बदमाशी के बदले मिली उम्रकैद

अब तक आप कई शातिर और खूंखार अपराधियों के बारे में पढ़ या सुन चुके होंगे, जिन्हें उनके कुकर्मों के लिए अदालत से फांसी या उम्रकैद की सजा मिली होगी लेकिन कभी किसी बंदर की उम्रकैद की सजा के बारे में सुने हैं? यदि नहीं सुने हैं तो आज यहां पढ़ लीजिए, एक ऐसे बदमाश बंदर की कहानी जो अपनी हरकतों के कारण आज पिंजरे में बंद है और उसे पूरी जिंदगी पिंजरे में ही गुजारनी पड़ेगी क्योंकि उसे उम्रकैद की सजा जो मिली है। यह बंदर महिलाओं को अपना सबसे बड़ा दुश्मन मानता है। यह बंदर एक बच्ची की हत्या भी कर चुका है। इसने अब तक २५० से ज्यादा लोगों को काट चुका है, जिनमें ज्यादातर महिलाएं या लड़कियां शामिल हैं।

महिलाओं से दुश्मनी रखने के कारण कलुआ नामक एक बंदर को उम्रवैâद की सजा मिली है और वह बीते ३ वर्षों से कानपुर के प्राणी उद्यान में सजा काट रहा है। शराब का लती कलुआ बेहद खूंखार है, वह और किसी को नुकसान न पहुंचा सके इस वजह से एहतियातन उसे कानपुर प्राणी उद्यान के अस्पताल परिसर में पिंजरे में बंद रखा गया है यानी कलुआ की बाकी की जिंदगी अब सलाखों के पीछे ही बीतेगी। बताया जाता है कि कलुआ को मिर्जापुर से पकड़ कर कानपुर लाया गया था। मिर्जापुर में कलुआ के बढ़ते आतंक के चलते उसे पकड़ने के लिए वन विभाग और चिड़ियाघर की टीम लगाई गई थी। काफी मशक्कत के बाद वन विभाग की टीम ने बंदर को पकड़ने में कामयाबी हासिल की थी। मिर्जापुर में कानपुर प्राणी उद्यान में लाने के बाद कलुआ को काफी समय तक आइसोलेशन में रखा गया। पिंजड़े में वैâद कलुआ पर डॉक्टर और विशेषज्ञ ३ साल से नजर रख रहे हैं लेकिन उसके व्यवहार में किसी भी तरह की नरमी या सुधार देखने को नहीं मिला है बल्कि उसने चिड़ियाघर के वन रेंजर की बेटी का ही गाल काट लिया था। तीन साल कैद में रहने के बाद भी इस कलुआ ने महिलाओं से अपनी दुश्मनी खत्म नहीं की। वह आज भी उन्हें अपना दुश्मन मानता है और मौका पाते ही उन्हें काटने दौड़ पड़ता है, जिसके कारण उसे ताउम्र पिंजड़े में ही कैद रखने का पैâसला लिया गया है।
कलुआ के कुख्यात बनने की कहानी भी बेहद दिलचस्प है। बताया जाता है कि मिर्जापुर में एक तांत्रिक ने कलुआ को पाला था, जो खुद तो शराबी था ही साथ ही वह कलुआ (बंदर) को भी शराब पिलाता था। मुंह व शरीर काला होने के कारण तांत्रिक ने उसका नाम कलुआ रख दिया था। तांत्रिक की मौत के बाद कलुआ अनाथ हो गया। शराब के लिए उसने तांडव मचाना शुरू कर दिया। तीन साल पहले मिर्जापुर जिले के शहर और कटरा कोतवाली क्षेत्र के विभिन्न मोहल्लों में कलुआ आतंक का पर्याय बन गया था। वह सैकड़ों लोगों को काट चुका था। दिसंबर, २०१७ में उसका आतंक चरम पर पहुंच गया था। महज उस एक महीने में कलुआ ने ३० से अधिक बच्चों को काटा था। वह महिलाओं व छोटी बच्चियों के चेहरे को काट कर भाग जाता था। वह उनके चेहरे को काटकर जख्मी कर रहा था। हालत ये हो गई थी कि लोग बच्चों को घर से बाहर निकलने नहीं दे रहे थे। वह सड़क पर भीड़ होने के बावजूद सात वर्ष से कम उम्र की बालिकाओं के चेहरे को जख्मी कर भाग जाता था। उसके हमले की शिकार बनीं अधिकांश बालिकाओं को प्लास्टिक सर्जरी करानी पड़ी। कानपुर से वन विभाग की टीम ने एक जनवरी २०१७ को बंदर को बंदूक से बेहोशी का इंजेक्शन लगाकर पकड़ा था। दरअसल कलुआ बंदर ने दूसरे गैंग पर हमला करके एक बंदरिया को अपना शागिर्द बना लिया था। बंदरिया उसकी चौकीदारी करती थी। पहले दिन जब उसे पकड़ने की कोशिश की गई तो बंदरिया ने आवाज लगाकर उसे चौकन्ना कर दिया था। पहले दिन बंदर ने टीम को खूब छकाया। दूसरे दिन दो इंजेक्शन लगने के बाद वह बेहोश हुआ। इसके बाद टीम उसे पकड़कर पिंजरे में डालकर कानपुर चिड़ियाघर ले गई थी। चिड़ियाघर के अधिकारी ३ साल तक कलुआ को पिंजरे में बंद करके सुधारने की कोशिश करने के बाद थक गए और उन्होंने उसे पिंजरे में ही बंद रखने का निर्णय लिया। वन अधिकारी आशंका जताते हैं कि जंगल में छोड़ने के बाद कलुआ फिर से आबादी में आकर उत्पात मचाएगा। लोगों को नुकसान पहुंचाएगा। आशंका है कि जंगल में छोड़ने के बाद यह फिर से आबादी में आ जाएगा और लोगों को नुकसान पहुंचाएगा। गौरतलब हो कि बंदरों की औसत उम्र १० साल की होती है। ऐसे में कलुआ को कम से कम और साल पिंजरे में ही वैâद रहना होगा।