" /> मुंबई के लिए वरदान साबित होगी ‘एकीकृत बाढ़ चेतावनी प्रणाली’ -मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे

मुंबई के लिए वरदान साबित होगी ‘एकीकृत बाढ़ चेतावनी प्रणाली’ -मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे

-मुंबई को मिली बाढ़ चेतावनी प्रणाली
-सीएम और केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान मंत्री ने किया उद्घाटन

एकीकृत बाढ़ चेतावनी प्रणाली (इं‍टिग्रेटेड फ्लड वॉर्निंग सिस्टम) मॉनसून में मुंबई के लिए एक वरदान होगी। जीआईएस-आधारित प्रणाली अब उन क्षेत्रों की प्रारंभिक चेतावनी प्रदान करने में सक्षम होगी, जहां बाढ़, भारी बारिश और यहां तक ​​कि तूफान आने की जानकारी भी पहले मिल जाएगी। इससे सावधान होने का मौका उपलब्ध हो जाएगा। इस प्रणाली में प्रयुक्त हाइड्रोलिक मॉडल से किसी क्षेत्र के नाला, नदी और उसके प्रवाह में वास्तविक समय में पानी की होनेवाली हलचल को ट्रैक करना संभव होगा। इससे मुंबई को बाढ़ के खतरे से बचाया जा सकेगा। यह बात मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कही।
भारतीय मॉनसून विभाग द्वारा मुंबई मनपा के सहयोग से तैयार किए एकीकृत बाढ़ चेतावनी प्रणाली का उद्घाटन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के हाथों किया गया। इस अवसर पर केंद्रीय विज्ञान, प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ हर्षवर्धन, केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव एम. राजीवन, मुख्यमंत्री के अतिरीक्त मुख्य सचिव आशिषकुमार सिंह, प्रधान सचिव विकास खारगे, मुंबई महापालिका आयुक्त इकबालसिंह चहल, भारतीय मॉनसून विभाग के महानिदेशक डॉ.एम.महापात्रा, भारतीय मॉनसून विभाग मुंबई के उपमहानिदेशक डॉ.के.एस.घोसालीकर सहित देश के विविध विभागीय मॉनसून वेधशाला के प्रमुख सम्मिलित हुए।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सबसे पहले, मैं भारतीय मौसम विभाग को दिल से बधाई देता हूं। उन्होंने घोषणा की थी कि मॉनसून 11 तारीख को दस्तक देगा। वैसे ही मॉनसून ने दस्तक दी। इसके अलावा बधाई देने का एक और कारण यह है कि मौसम विभाग हाल ही में आए प्राकृतिक तूफान के सभी विवरण दे रहा था कि तूफान की दिशा बदल गई थी और उसकी गति धीमी हो गई थी, उस हिसाब से पूरी मशीनरी तैयार थी। इसके कारण जनहानि टल गई। ऐसा मुख्यमंत्री ने कहा।
किसी भी आपदा आने के बाद हम उससे क्या सीखते हैं। यह महत्वपूर्ण है। केंद्रीय मंत्री डॉ. हर्षवर्धन इस समय देश के सबसे व्यस्त मंत्री हैं। स्वास्थ्य मंत्री के रूप में कोरोना से मुकाबला कर रहे हैं। इस दृष्टि से उनके लिए, अब रक्त प्रबंधन और बाढ़ प्रबंधन दोनों महत्वपूर्ण हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि मुंबई सहित राज्य में 2005 में आई बाढ़ से नुकसान का अनुभव लिया और पाया कि जब उच्च ज्वार आता है तो देखा गया कि समुद्र का पानी वापस आता है और मुंबई में पानी भर जाता है। हमने इसे रोकने के लिए पम्पिंग स्टेशन भी स्थापित किए। वहीं, बारिश के बाद लेप्टो और डेंगू जैसे मामले सामने आए। 2007 में, हमने इन महामारियों के निदान के लिए मुंबई के कस्तूरबा अस्पताल में देश की पहली मॉलिक्युलर प्रयोगशाला स्थापित की। अब हमने कोरोना के समय भी सीखा। इसी सीख का परिणाम है कि पहले दो प्रयोशाला थी, अब 85 हो गई हैं। ऐसा मुख्यमंत्री ने कहा। पर्यावरण के बारे में मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने कैबिनेट में पर्यावरण विभाग का नाम भी बदलकर “पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन विभाग” कर दिया है। हमने पर्यावरण को अलग और गंभीरता से देखने की शुरुआत कर दी है। इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए भारतीय मौसम विभाग को निकट भविष्य में जल्द से जल्द मुंबई के लिए डॉपलर राडार स्थापित करना चाहिए ताकि सटीक मौसम का पूर्वानुमान संभव हो सके। ऐसी मांग मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने की। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि देश में अत्याधुनिक बाढ़ चेतावनी प्रणाली स्थापित की गई है। उन्होंने इस प्रणाली को मुंबई के लिए बहुत उपयोगी बनाने के लिए भारतीय मौसम विभाग और मुंबई मनपा का अभिनंदन किया। इस अवसर पर घोसालीकर ने कहा कि 4 डॉपलर रडार लगाने की प्रक्रिया चल रही है और अगले मॉनसून से पहले रडार चालू हो जाएंगे।