" /> बाॅली वचन… जय हिंद की सेना!

बाॅली वचन… जय हिंद की सेना!

देश की सेना पर सरहद की सुरक्षा की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। जब आप भारत की सेना के बारे में सुनते हैं तो मन खुद-ब-खुद गर्व से भर जाता है। जय हिंद की सेना है ही ऐसी। १९६२ के चीन युद्ध में भारत को बुरी पराजय झेलनी पड़ी थी। देश निराशा के गर्त में डूबा हुआ था। ऐसे में कुछ दिनों बाद दिल्ली के स्टेडियम में स्वर कोकिला लता मंगेशकर की आवाज गूंजी, ‘ऐ मेरे वतन के लोगों जरा आंख में भर लो पानी, जो शहीद हुए हैं उनकी याद करो कुर्बानी…’! इस गीत को सुनकर वहां बैठे प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की आंखों में भी पानी आ गया था। रुला गया था वह गीत सबको और जब लता जी की आवाज गूंजी…. जय हिंद की सेना, जय हिंद की सेना…. तो पूरे देश में मानो एक ऊर्जा का संचार हो गया था। आज ५७ साल के बाद भी यह गीत उतना ही जवान है और ५७ साल बाद भी उतना ही जवां रहेगा। यह है जय हिंद की सेना की ताकत, मगर चंद सिक्कों की खातिर अगर कोई फिल्म या वेबसीरीज का निर्माता ‘जय हिंद की सेना’ को पर्दे पर मसखरी के अंदाज में या फिर ‘बैड टेस्ट’ के अंदाज में दिखाएगा तो इसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। थोड़ी देर से ही सही पर सरकार ने भी इस बात की सुधि ली है। हाल ही में एक वेबसीरीज आई, जिसमें एक फौजी वर्दी को बैड टेस्ट में दिखाया गया था। इसके बाद सोशल मीडिया पर बड़ा बवाल भी हुआ। शोर मचा और बात सेना तक भी पहुंची। कुछ सैन्य अधिकारियों ने इस वेबसीरीज पर खासा आक्रोश भी प्रकट किया। मगर सेना के अधिकारी खुलकर कुछ बोल नहीं सकते थे। प्रोटोकॉल का मामला है इसलिए उन्होंने सरकार के आला अधिकारियों को सेना की मनोस्थिति से अवगत करा दिया। अभी जबकि पूर्वी और पश्चिमी दोनों मोर्चे पर नाजुक स्थिति बनी हुई है, सेना ने मोर्चा संभाल रखा है तो ऐसे में सरकार भी वैâसे बर्दाश्त करती कि कोई सेना को बैड टेस्ट में मनोरंजन के लिए दिखाए। सो देर से ही सही सरकार की नींद टूटी। रक्षा मंत्रालय ने सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन सेंसर बोर्ड को एक पत्र लिखकर मामले पर कड़ी आपत्ति जताई और कहा है कि अगर किसी भी फिल्म, सीरियल, या वेबसीरीज में सेना के बारे में कुछ भी दिखाया जाता है तो उसे सर्टिफिकेट जारी करने के पहले सेना को दिखाया जाए और सेना से एनओसी मिलने के बाद ही उसका प्रसारण किया जा सकता है। २७ जुलाई को जारी इस चिट्ठी पर रक्षा मंत्रालय के अंडर सेक्रेट्री सुदर्शन कुमार के हस्ताक्षर हैं। इसका मतलब साफ है कि थोड़ी देर से ही सही पर रक्षा मंत्रालय ने मामले पर संज्ञान लिया। अब इस आदेश से साफ है कि अब जो निर्माता भी सेना को बैड टेस्ट में पर्दे पर दिखाएगा, उसकी खैर नहीं। उसे सेना एनओसी नहीं देगी और उसकी फिल्म या सीरियल डब्बे में अटक जाएगी। ऐसा नहीं है कि सेना को हमेशा बैड टेस्ट में ही दिखाया जाता है। १९६२ के चीन युद्ध पर आधारित फिल्म हकीकत आज भी भारत की बेस्ट वॉर फिल्म में टॉप पर है। इसके अलावा आक्रमण, बॉर्डर, एलओसी आदि कई ऐसी उत्कृष्ट फिल्में हैं, जिन्होंने सेना का मान बढ़ाया है। जिन्होंने सेना को उचित तरीके से पर्दे पर दिखाया है। अमेरिका, इंग्लैंड समेत दुनिया के कई देशों में वॉर फिल्में बनती हैं। उनमें वहां सैनिकों को बड़े अच्छे तरीके से पेश किया जाता है। सेना का सम्मान हर कोई करता है। हर नागरिक करता है। फिल्मवालों को भी उनका सम्मान करना चाहिए। हर चीज को सिर्फ मजाक-मस्ती और मनोरंजन के परिपेक्ष में ही नहीं देखा जाना चाहिए। देश सबसे ऊपर होता है उससे ऊपर मनोरंजन कभी भी नहीं हो सकता। सिर्फ चंद सिक्कों की खातिर जय हिंद की सेना का अपमान कोई भी सच्चा नागरिक बर्दाश्त नहीं करेगा। माना की सेना में भी कुछ गद्दार हो सकते हैं, जो चंद पैसों के लिए जासूसी कर सकते हैं या कोई भ्रष्टाचार हो सकता है पर ऐसा गिने-चुने मामले होंगे। उन्हें पर्दे पर दिखाया ही जाए यह कोई जरूरी तो नहीं। उसके लिए कानून है। कोर्ट मार्शल है। वह अपना काम करेगा पर इस देश के जिम्मेदार नागरिक होने के कारण हमें अपनी सेना का सम्मान करना ही चाहिए। उम्मीद है बॉलीवुड की फिल्म मेकर्स मामले की गंभीरता को समझेंगे और आगे से इस बात को ध्यान रखते हुए ‘जय हिंद की सेना’ को पर्दे पर इस पर दिखाएंगे जिससे हर देशवासी को गर्व की अनुभूति हो!!