" /> जय मां दुर्गे!

जय मां दुर्गे!

(१)
दुरमति दूर हो चूर गरूर हो ऐसो पवित्र विचार दे माते।
धर्म की रक्षा हो देश सुरक्षित किंचित शुभ संस्कार दे माते।।
मन मूरख है गलती करता गलती उसकी तू बिसार दे माते।
देकै शरण चरणों में तेरे निज भक्त को पार उतार दे माते।।
(२)
माता दुर्गे उबार दे फिर एक बार देश,
हो जाए महान हिंद ऐसा कोई वर दे।
कोरोना महामारी से मुक्ति दिला दे माता,
अन्नदाता किसानों के कष्ट दूर कर दे।।
कर दे समृद्ध शक्तिशाली फिर से वतन,
जन-जन के अंतरमन सद्भाव भर दे।
एक दूसरे के प्रति प्रीति भाईचारा बढ़ा,
सांप्रदायिकता सारी समूल नष्ट कर दे।।
-कमलेश तरुण ‘डंक’