" /> पितृ दोष शांति कराएं सब सुख-सुविधा पाएं!

पितृ दोष शांति कराएं सब सुख-सुविधा पाएं!

प्रश्न- गुरु जी, मेरी राशि क्या है और मेरी शिक्षा कैसी होगी, क्या कुंडली में किसी प्रकार का दोष है?
– लवित्रा संजय दुबे
(जन्मतिथि ४ दिसंबर २०१४, समय- प्रातः ७.४६ बजे, बदलापुर महाराष्ट्र)
लवित्रा दुबे जी, आपका जन्म भरणी नक्षत्र के द्वितीय चरण में हुआ है। आपकी राशि मेष बन रही है। यदि आपकी शिक्षा को हम देख रहे हैं तो आपका जन्म वृश्चिक लग्न में हुआ है। वृश्चिक लग्न का स्वामी मंगल है, वह उच्च राशि का होकर आपकी कुंडली में पराक्रम भाव पर बैठ कर आपको पराक्रमी बनाया हुआ है और आपकी शिक्षा भी अच्छी होगी। आपके जन्म के बाद आपके पिता के कार्यक्षेत्र का भी विकास हुआ होगा लेकिन चंद्रमा ग्रह आपकी कुंडली में छठे भाव पर बैठा हुआ है जो आपके स्वास्थ्य को कभी-कभी शिताधिक्य के कारण परेशानियां भी पैदा करता है। बृहस्पति ग्रह आपकी कुंडली में उच्च राशि का होकर आपको बहुत बुद्धिमान बनाया हुआ है और आपकी शिक्षा बहुत ऊंची रखेगा। जीवन की विशेष गहराइयों को जानने के लिए आपको संपूर्ण जीवन दर्पण बनवाना चाहिए।
प्रश्न- गुरु जी, मैं मानसिक चिंतन में बहुत रहता हूं। कोई उपाय बताएं। मुझे मानसिक चिंता क्यों परेशान करती है? – संजय दुबे
(जन्मतिथि- १३ अगस्त १९८१, दिन- गुरुवार, समय- प्रात: ५.०० बजे, स्थान- भदोही, यूपी)
संजय जी आपका जन्म पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के चतुर्थ चरण में हुआ है। आपकी राशि धनु बन रही है। राशि के आधार पर अगर हम बात कर रहे हैं तो आपकी राशि पर शनि की साढ़ेसाती का अंतिम चरण चल रहा है। यदि लग्न के आधार पर आपकी कुंडली की बात कर रहा हूं तो कर्क लग्न में आपका जन्म हुआ है। कर्क लग्न का स्वामी चंद्रमा है। वह चंद्रमा छठे भाव पर बैठा हुआ है। चंद्रमा छठे भाव पर यदि बैठता है तो नकारात्मक सोच समय-समय पर पैदा करता है और लग्न में ही राहु के साथ में सूर्य बैठ कर ग्रहण योग भी बनाए हुए है। आपकी कुंडली में पितृदोष भी बना हुआ है। इस पित्र दोष के कारण आप मानसिक डिप्रेशन में भी रहते हैं और नकारात्मक सोच भी आपके अंदर आता है। यदि महादशा के आधार पर हम बात कर रहे हैं तो इस समय राहु की महादशा चल रही है। राहु की महादशा में शुक्र का अंतर चल रहा है। राहु के कारण ग्रहण योग बना रहा है। जीवन की विशेष जानकारियों को प्राप्त करने के लिए आपको संपूर्ण जीवन दर्पण बनवाना चाहिए।
प्रश्न- मेरी राशि क्या है, क्या मेरी कुंडली में कोई दोष है?
– वंदना दुबे
(जन्मतिथि- २० सितंबर १९८५, समय- प्रात: ५.०० बजे, स्थान- मुंबई)
वंदना जी, आपका जन्म वृश्चिक राशि में हुआ है। यदि लग्न के आधार पर हम बात कर रहे हैं तो सिंह लग्न में आपका जन्म हुआ है। सिंह लग्न का स्वामी सूर्य है और वह सूर्य आपकी कुंडली में द्वितीय भाव पर बुध के साथ में बैठकर बुधादित्य योग बनाए हुए है। आपकी राशि पर अगर गोचर के आधार पर विचार करें तो चंद्रमा ग्रह के साथ में केतु बैठा है, जो मानसिक दबाव कभी-कभी बनाता है। लग्न के आधार पर अगर हम देख रहे हैं तो लग्न में ही मंगल बैठा हुआ है और वह मंगल आपके अंदर चिड़चिड़ापन भी पैदा कर रहा है। शिव की आराधना आपके लिए ज्यादा लाभकारी होगा। संतान को शुभ फल प्राप्त करने के लिए आपको प्रदोष व्रत रखना चाहिए। जीवन की विशेष गहराइयों को जानने के लिए आपको संपूर्ण जीवन दर्पण बनवाना चाहिए।
प्रश्न- गुरु जी, मैं अपनी जिंदगी में बहुत परेशान हूं। कृपया कोई उपाय बताएं? – भीमराज शर्मा
(जन्मतिथि- १३ जून १९८४, समय- २.०५ बजे, स्थान – मुंबई)
भीमराज जी, आपका जन्म ज्येष्ठा नक्षत्र के तृतीय चरण में हुआ है। राशि आपकी वृश्चिक बन रही है। अगर राशि के आधार पर हम देख रहे हैं तो आपकी राशि पर नीच राशि का चंद्रमा बैठा हुआ है और गोचर में इस समय अगर हम देख रहे हैं तो चंद्रमा के साथ में केतु भी बैठा हुआ है। चंद्रमा के साथ केतु यदि बैठता है तो जीवन में बार-बार सफलता भी लाता है। यदि गहराई से हम आपकी कुंडली को देख रहे हैं तो भाग्य भाव पर सूर्य ग्रह के साथ में राहु बैठकर ग्रहण योग भी बनाया हुआ है और आपकी कुंडली में पितृदोष भी बनाया हुआ है। आपको पितृदोष की शांति वैदिक विधान से करना जरूरी होगा तभी आप हर प्रकार की सुख सुविधा को प्राप्त कर सकते हैं। जीवन को गहराई से जानना है तो आपको संपूर्ण जीवन दर्पण भी बनवाना चाहिए।