" /> ‘कुलिक’ कालसर्प शांत कराएं….अनुकूल जीवनसाथी पाएं

‘कुलिक’ कालसर्प शांत कराएं….अनुकूल जीवनसाथी पाएं

प्रश्न- गुरुजी, मेरी राशि क्या है और मेरी शिक्षा कैसी होगी?
-व्योम संजय दुबे, जन्म १० अक्टूबर २०१७ प्रात: ८:३८ बदलापुर महाराष्ट्र
व्योम जी आपका जन्म रोहिणी नक्षत्र के चतुर्थ चरण में हुआ है। राशि आपकी वृषभ बन रही है। यदि आपकी शिक्षा की बात हम करें तो तुला लग्न में आपका जन्म हुआ है। तुला लग्न में ही बृहस्पति बैठ करके अपनी पंचम दृष्टि से पंचम भाव को देख रहे हैं इसलिए आप बहुत बुद्धिमान हैं और आपकी शिक्षा बहुत अच्छी होगी। आपकी कुंडली में बुध और सूर्य ग्रह के कारण बुधादित्य योग भी बना हुआ है। बुधादित्य योग के कारण आप बहुत बुद्धिमान हो लेकिन स्वभाव से जिद्दी भी होंगे, क्योंकि आपकी कुंडली में कालसर्प योग भी विद्यमान है। जीवन की विशेष गहराई को जानने के लिए आपको संपूर्ण जीवन दर्पण भी बनवाना चाहिए।

प्रश्न-गुरुजी, मेरी शादी कब तक होगी और शादी के बाद समय वैâसा रहेगा?
-प्रीति गुप्ता, जन्म ८ मई १९९४ समय रात्रि ७:२० मुंबई
प्रीति गुप्ता जी आपकी कुंडली के हिसाब से आपकी शादी २०२२ तक होने के संकेत मिल रहे हैं। सूर्य, चंद्र की पूर्ण दृष्टि लग्न पर पड़ रही है अत: आपका मीडियम लंबाई गोलाइ लिए हुए चेहरा गौर वर्ण होना चाहिए। विवाह का समय चल रहा है लेकिन द्वितीय स्थान पर राहु बैठकर आपको जीवनसाथी प्राप्त कराने में अवरोध उत्पन्न कर रहा है। आपकी कुंडली में `कुलिक नामक कालसर्प योग’ है, कालसर्प योग की पूजा कराएं तो अनुकूल जीवन साथी प्राप्त करने का मार्ग प्रशस्त हो जाएगा और आप की शादी २०२२ तक हो जाएगी। जीवन की अन्य गहराइयों को जानने के लिए संपूर्ण जीवन दर्पण बनवाएं।

प्रश्न- गुरुजी कोई भी काम करता हूं तो पूरा नहीं होता है। व्यापार वैâसे आगे बढ़ेगा उपाय बताएं?
-कमलेश मिश्रा, जन्म २४ जनवरी १९६२ दिन में ४:२० मुंबई
कमलेश जी आपका जन्म मिथुन लग्न एवं सिंह राशि में हुआ है। ज्योतिष शास्त्र में बताया गया है कि सिंह राशि के जातक बहुत ही मेधावी और प्रतिभाशाली होते हैं। अत: आपके अंदर ये सारे गुण विद्यमान हैं। आपकी कुंडली में अष्टम स्थान पर ही सात ग्रह एक साथ बैठकर कर अपने-अपने घरों को कमजोर बना दिए हैं। जैसे भाग्येश एवं अष्टमेश होकर के शनि, सप्तमेश एवं कर्मेश होकर के बृहस्पति, रोगेश एवं लाभेश मंगल, पंचमेश एवं द्वादशेश शुक्र, लग्नेश एवं सुखेश बुध, पराक्रमेश सूर्य एवं केतु ये सातों ग्रह अष्टम स्थान पर बैठकर अपने-अपने घरों को कमजोर बना दिए हैं। द्वितीय स्थान पर अपने शत्रु के घर में राहु बैठकर कुलिक नामक कालसर्प योग भी बना दिया है। इन्हीं कारणों से व्यापार में अथवा अन्य किसी भी कार्यों में आपको अपने परिश्रम का पूर्ण फायदा नहीं प्राप्त हो पाता है। जीवन की अन्य गहराई को जानने के लिए संपूर्ण जीवन दर्पण बनवाएं एवं वैदिक विधि से उपाय कराएं जीवन के विकास का मार्ग पूर्णतया प्रशस्त हो जाएगा ।

प्रश्न- स्वास्थ्य अनुकूल नहीं है कोई उपाय बताएं ?
-अस्मिता प्रज्ञान पांडे, जन्म २२ अक्टूबर २०१५ समय रात्रि १०:५५ जौनपुर उत्तर प्रदेश
अस्मिता जी आपका जन्म मिथुन लग्न मकर राशि में हुआ है। आपकी कुंडली में शनि अष्टमेश एवं भाग्येश हो करके रोग भाव में बैठा है। इस समय गोचर में शनि, धनु राशि पर बैठकर आपकी राशि पर शनि की साढ़ेसाती का फल दे रहा है। आपकी राशि पर जो साढ़ेसाती चल रही है वह लौह पाद में है। शनि ही स्वास्थ्य को प्रतिकूल प्रभाव देता है। शनि से अनुकूल फल प्राप्त करने के लिए सात शनिवार निम्न उपाय करना आवश्यक है। आप १०० ग्राम काला तिल, १०० ग्राम काली उर्द, ५० ग्राम बादाम, १०० ग्राम कच्चा कोयला, एक नारियल, अपने सिर से उतारा करवा कर के किसी नदी में बहाएं। इसके अलावा माता-पिता प्रतिदिन हनुमान चालीसा का पाठ भी करें तो शनि के द्वारा शुभ फल प्राप्त होने लगेगा और स्वास्थ्य भी अनुकूल हो जाएगा। जीवन की अन्य गहराइयों को जानने के लिए संपूर्ण जीवन दर्पण बनवाएं।

प्रश्न- मेरी राशि क्या है और जीवन कैसा होगा ?
-प्रकाश मिश्रा, जन्म २७ फरवरी १९९० समय ८:३० दिन इलाहाबाद
प्रकाश जी आपका जन्म मीन लग्न एवं मीन राशि में हुआ। लग्नेश बृहस्पति केंद्र सुख भाव में बैठकर अपने घर को पूर्ण दृष्टि से देख रहा है। अत: आपको बुद्धिमान एवं भाग्यशाली तो बना दिया है लेकिन सप्तम भाव से विवाह का विचार किया जाता है। इस समय बुध की महादशा चल रही है अत: विवाह का समय तो चल रहा है लेकिन राहु ग्रह के कारण बुध दोषयुक्त हो गया है। पंचम भाव में बैठा केतु एवं लाभ भाव पर बैठा राहु के कारण आपकी कुंडली में कालसर्प योग भी बन रहा है, इन्हीं योगों के कारण अनुकूल जीवन साथी का चयन नहीं हो पा रहा है। जीवन में हर प्रकार से शुभ फल प्राप्त करने के लिए उक्त दोषों का निवारण वैदिक विधि से होना आवश्यक है। जीवन की अन्य गहराइयों को जानने के लिए संपूर्ण जीवन दर्पण बनवाएं।