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झांकी… मुसीबत में मंजू!

मुसीबत में मंजू!
किसी समय समाज कल्याण मंत्री के रूप में धाक जमानेवाली मंत्री मंजू वर्मा हाथों में अपना बायोडाटा थामे घंटों मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात के लिए इंतजार करती रहीं। नीतीश कार्यकर्ताओं से मिलते रहे पर मंजू वर्मा को मिलने का समय नहीं मिला। सबके बाद चंद मिनट की हुई मुलाकात से मंजू वर्मा संतुष्ट नहीं दिखीं। मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड मामले में पति के नाम आने के बाद मंजू वर्मा को मंत्री पद छोड़ना पड़ा था और आर्म्स एक्ट के एक मामले में बीते साल २० नवंबर को जेल जाना पड़ा था। उन्हें मार्च में पटना हाईकोर्ट से जमानत मिली थी। उनके पति चंद्रशेखर वर्मा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज हो चुकी है। आने वाले वक्त में मंजू वर्मा और उनके पति की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद बिहार पुलिस दोनों से पूछताछ की तैयारी में है। इतना सब होने के बाद भी मंजू वर्मा को फिर से चुनावी टिकट मिलने की उम्मीद है। बालिका गृह मामले में बालिका गृह के मालिक ब्रजेश ठाकुर गिरफ्तार किया गया था। मंजू वर्मा के पति के मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर के साथ न सिर्फ अच्छे संबंधों की पुष्टि हुई थी, बल्कि यह बात भी सामने आई थी कि चंद्रशेखर मुजफ्फरपुर बालिका गृह में जाते रहते थे।
चिराग भाजपा की जिम्मेदारी
बिहार में चुनाव से पहले ही राजग के भीतर लोजपा को लेकर बवंडर थम नहीं रहा है। खबर है कि जदयू को लोजपा से आमने-सामने बात करने में भी कोई दिलचस्पी नहीं है। यही वजह है कि दिल्ली में जदयू के दो बड़े नेताओं ललन सिंह और आरसीपी सिंह ने भाजपा के बिहार के प्रभारी भूपेंद्र यादव से मुलाकात कर साफ-साफ कह दिया है कि लोजपा से बात करने की जिम्मेदारी अब भाजपा की होगी। पिछले दिनों में लोजपा प्रमुख चिराग पासवान ने न सिर्फ बिहार सरकार, बल्कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार समेत जदयू के बड़े नेताओं पर सीधा निशाना साधा था। चिराग के इस रवैये और नीतीश कुमार के खिलाफ उनकी बयानबाजी से जदयू खासी नाराज है। पार्टी को खासतौर पर विधानसभा चुनाव लड़ने की चुनौती जैसे बयानों से आपत्ति है और वह सहयोगी पार्टी के साथ सीट बंटवारे को लेकर बात करने के मूड में नहीं है। इधर भाजपा लगातार भरोसा दिला रही है कि चुनाव से पहले सब कुछ ठीक हो जाएगा और राजग पूरी तरह से एकजुट है। चिराग पासवान की पार्टी लोजपा ने बिहार की १४३ सीटों पर अपनी तैयारी होने का दावा किया है। पार्टी अप्रत्यक्ष रूप से यहां तक कह चुकी है कि वह जदयू के खिलाफ अपने उम्मीदवार उतारेगी।
खाते में खांचा
उत्तर प्रदेश के बलिया में बांसडीह थाना स्थित रुकनपुरा गांव की सरोज के तब होश उड़ गए जब वह इलाहाबाद बैंक की बांसडीह शाखा में अपने खाते से रुपए निकालने पहुंची। उसे बताया गया कि उसके खाते में ९,९९,०४,७३६ रुपए डिपॉजिट होने के चलते उसके खाते के लेनदेन पर रोक लगा दी गई है। ज्यादा जानकारी के लिए जब उसने बैंक मैनेजर से संपर्क किया तो बैंक मैनेजर ने उसे ही बुरा-भला कहा। सरोज अपने पिता सूबेदार साहनी व अन्य परिजनों को लेकर भी बैंक गई लेकिन उसे कोई खास जानकारी नहीं मिली। तब उसने मामले की शिकायत पुलिस से की। सरोज और उसके परिजन समझ नहीं पा रहे हैं कि सरोज के खाते में इतनी बड़ी धनराशि कैसे और क्यों आ गई? जबकि बैंक के अफसर मामले को लेकर गोलमोल जवाब दे रहे हैं। बैंक के वर्तमान प्रबंधक सरोज कुमार सिंह के अनुसार सरोज का खाता २ फरवरी २०१८ को खुला था। इस खाते में दस-बीस हजार करके कई बार जमा हुए व निकले हैं। दो अगस्त २०१८ से २२ जनवरी २०२० तक खाते में १७,५९,१२० जमा हुए हैं और १७,५३,८५७ निकाल भी लिए गए हैं। फिलहाल पुलिस के साथ बैंक के अधिकारी जांच- पड़ताल में जुटे हैं।
बीवी की तारीफ पर भड़के मंत्री
मंच पर मुख्यमंत्री और वनमंत्री थे लेकिन प्रमुख वन संरक्षक अपनी पत्नी की तारीफ में कशीदे पढ़ रहे थे। पढ़ते भी क्यों न जब केंद्र सरकार देशभर में फॉरेस्ट सिटी बनाने की सोच रही है तब उत्तराखंड में ३ साल में साधना जयराज ने वह काम कर दिया। वन विभाग जो फॉरेस्ट पार्क बनाने का काम पूरे प्रदेश में २० साल में नहीं कर पाया, उसे प्रमुख वन संरक्षक की पत्नी के साथ मिलकर विभाग ने ३ साल में कर दिया। पार्क के उद्घाटन में मुख्य अतिथि के तौर पर मुख्यमंत्री और वन मंत्री को बुलाया गया। वन संरक्षक यह बताना नहीं भूले कि जो फॉरेस्ट पार्क ३ करोड़ में बनता उसे साधना जयराज ने ४१ लाख रुपए में बना दिया और २ लाख का बिल बाकी है। इसलिए जब वन मंत्री हरक सिंह की बारी आई तो वे फट पड़े। बोले, ‘अफसर कलाकार हैं। कोटद्वार के स्नेह पार्क के लिए उन्हें तमाम परमिशन का इंतजार है। लेकिन जिस आनंद वन में ३ साल में काम हो गया, उसमें सभी अफसरों ने काम किया। ‘मतलब साफ था कि मंत्री होते हुए जो काम वे अपनी विधानसभा में नहीं करवा पाए, उसे वन संरक्षक की पत्नी ने आसानी से कर दिया। वन मंत्री और वन संरक्षक की तल्खियां जग जाहिर हैं। अगले महीने जयराज रिटायर होने वाले हैं। मंत्री ने कहा कि कुछ लोगों की शुरुआत अच्छी नहीं होती, लेकिन विदाई अच्छी होती है, जबकि कुछ लोगों की शुरुआत अच्छी होती है लेकिन विदाई अच्छी नहीं होती।