" /> झांकी….चोर और चोरी की टिप

झांकी….चोर और चोरी की टिप

चोर और चोरी की टिप
वह एक ऐसा चोर है, जिसने खुद अपनी सूचना पुलिस को दी और चोरी का शत-प्रतिशत माल भी बरामद करवाया। आधिकारिक तौर पर अब तक उसके नाम ९० चोरियां दर्ज हैं। कभी पुणे महानगरपालिका में गाड़ियों की मरम्मत करने वाला जयवंत गायकवाड़ उर्फ जयड्या को उसके दूर के साले विशाल आदमाने के साथ समर्थ पुलिस ने गिरफ्तार किया है। जयवंत ने पीएमपी की नौकरी छोड़ अपना गैरेज डाला और साथ-साथ चोरी भी करने लगा। पुणे के रास्ता पेठ, नाना पेठ, भवानी पेठ आदि स्थानों पर हुई चोरियों के मामलों में पुलिस ने उसे जब-जब पकड़ा तब उसने चोरी का सारा सामान बरामद करवा दिया। पुलिस भी चोरी के माल की शत-प्रतिशत बरामदगी दिखाकर गदगद होती थी। यह इसलिए संभव होता था कि वह जहां जिस दुकान पर चोरी के गहने वगैरह बेचता उसकी जानकारी पुलिस को दे देता था, साथ ही चोरी के पैसे बैंक या अन्य वित्त संस्थाओं में निवेश कर देता था। कई बार ऐसा भी होता जब उसे लगता कि उसे चोरी करते किसी ने देख लिया है और अब भीड़ आकर उसे पकड़ लेगी, तब वह सबसे पहले खुद को उस दुकान या घर में अंदर से बंद कर लेता और पुलिस को १०० नंबर पर खुद चोरी की सूचना देता। पुलिस आकर उसे रंगे हाथ पकड़ भी लेती। पता चला है कि वह ऐसा जनता की मार से बचने के लिए करता था। क्योंकि पुलिस की गिरफ्त में कोई उस पर हमला नहीं कर पाता था। पुलिस ने उसके पास से ७० ग्राम सोना, ५०० ग्राम चांदी और ढाई लाख रुपए का दोपहिया वाहन जब्त किया है।
बंगाल भाजपा को झटका
पश्चिम बंगाल में राजनीतिक बढ़त लेने के लिए हाथ-पांव मार रही भाजपा को झटका लगा है। २०१९ लोकसभा चुनाव के बाद पार्टी में शामिल हुए वरिष्ठ नेता और विधायक तुषार कांति भट्टाचार्य तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए हैं। २०१६ में विष्णुपुर विधानसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर विधानसभा चुनाव जीतने के बाद तुषार कांति उसी साल जुलाई में तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए थे। हालांकि, उन्होंने विधानसभा सीट से इस्तीफा नहीं दिया था। पिछले साल लोकसभा चुनाव में भाजपा के बेहतर प्रदर्शन के बाद भट्टाचार्य पार्टी के राष्ट्रीय सचिव वैâलाश विजयवर्गीय की उपस्थिति में पार्टी के मुख्यालय में भाजपा में शामिल हो गए थे। एक साल के भीतर ही तृणमूल कांग्रेस में वापस लौट आए हैं। कुछ मुद्दों पर पार्टी से नाराज तुषार कांति अब उन मुद्दों को सुलझने की बात कर रहे हैं और तृणमूल कांग्रेस में वापसी को लेकर खुश भी हैं।
टमाटर घोटाला
प्रधानमंत्री बोले कि आपदा को अवसर में बदलो और छत्तीसगढ़ के एक क्वॉरंटीन सेंटर के कर्ता-धर्ता सरकारी मशीनरी की मदद से आपदा के अवसर का लाभ उठाने में जुट गए। नतीजा यह हुआ कि कांकेर जिले के इमलीपारा क्वॉरंटीन सेंटर में ५८० रुपए प्रति किलो की दर से टमाटर खरीदा गया। स्थानीय जनप्रतिनिधि इसे भ्रष्टाचार का खुला खेल बता रहे हैं तो वहीं अफसर इस मामले में चुप्पी साधे बैठे हैं। लॉकडाउन के दौरान इमलीपारा के क्वॉरंटीन सेंटर में दूसरे राज्यों से आए मजदूरों व छात्र-छात्राओं को ठहराया गया था। सूचना का अधिकार के तहत मिले दस्तावेजों से पता चलता है कि क्वॉरंटीन सेंटर में सब्जी बनाने के लिए टमाटर प्रति किलो ५८० रुपए की दर से खरीदने का बिल लगाया गया है। जबकि उस वक्त टमाटर की अधिकतम कीमत २० रुपए प्रतिकिलो थी। टमाटर के साथ ही अन्य सब्जियों का बिल भी बाजार मूल्य से अधिक है। खरीदी की गई सामग्री के बिल में जीएसटी व टिन नंबर तक नहीं दिया गया है। इस सेंटर में लॉकडाउन के दौरान व्यवस्था बनाने के लिए १ करोड़ ६७ लाख रुपए खर्च किए गए हैं। स्थानीय विधायक व राज्य सरकार में संसदीय सचिव शिशुपाल सोरी ने इसे अफसरों द्वारा किया गया भ्रष्टाचार का खुला खेल बताया है।
राजद में निशानेबाज!
पूर्व केंद्रीय मंत्री दिग्विजय सिंह और पूर्व सांसद पुतुल कुमारी सिंह की बेटी नेशनल शूटर श्रेयसी सिंह राजनीति में कदम रखने जा रही हैं। वे अपनी मां के साथ आज यानी ३ सितंबर को राजद की सदस्यता लेंगी। श्रेयसी बांका की अमरपुर सीट से विधानसभा का चुनाव लड़ सकती हैं। श्रेयसी को पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के आवास पर आयोजित एक कार्यक्रम में तेजस्वी यादव राजद की सदस्यता दिलवाएंगे। श्रेयसी राष्ट्रीय व अंतराष्ट्रीय मैदानों में शूटिंग में भारत का प्रतिनिधित्व करती रही हैं। इन्होंने २०१४ में भारत के लिए रजत पदक और २०१८ राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीता था। २०१९ लोकसभा चुनाव में वे अपनी मां पु‍तुल कुमारी के लिए चुनाव प्रचार में नजर आई थीं। बांका के पूर्व सांसद स्व. दिग्विजय सिंह की पत्‍नी और सांसद रह चुकी पुतुल कुमारी लोकसभा चुनाव हार गई थीं। लोकसभा चुनाव से पहले पुतुल को भाजपा ने पार्टी से तब निकाल दिया था, जब उन्होंने जदयू प्रत्याशी गिरिधारी यादव के खिलाफ बांका लोकसभा क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन भरा था। २०१० में पति के निधन के बाद हुए उपचुनाव में पुतुल कुमारी बांका से लोकसभा के लिए चुनी गई थीं। जनवरी २०१४ में उन्होंने भाजपा का दामन थामा था और भाजपा की टिकट पर चुनाव भी लड़ा मगर सफल नहीं हुर्इं। २०१९ में टिकट न मिलने पर उन्होंने बगावत कर दी और निर्दलीय खड़ी हो गई थीं। श्रेयसी के पिता दिग्विजय सिंह १९९०-९१ में चंद्रशेखर सरकार और १९९८-२००४ में अटलबिहारी वाजपेयी सरकार में मंत्री थे। २००९ का बांका चुनाव उन्होंने निर्दलीय के तौर पर जीता था।