" /> पन्ना रत्न करें धारण बुध ग्रह होगा मजबूत!

पन्ना रत्न करें धारण बुध ग्रह होगा मजबूत!

प्रश्न-मेरा पढ़ाई में मन नहीं लग रहा है, क्या करूं? मार्गदर्शन करें।
राजकुमार यादव
(जन्म- १६ अप्रैल २००१, समय- ९.४० दिन में, स्थान- चर्नीरोड-मुंबई)
राजकुमार जी आपका जन्म मिथुन लग्न में एवं मकर राशि में हुआ है। आपकी राशि पर इस समय शनि की साढ़ेसाती चल रही है, जिससे व्यक्ति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने में कतराते भी हैं। आपकी कुंडली का गहन अध्ययन किया गया। लग्न में बैठा राहु व्यक्ति को दिशाहीन बना देता है तथा लग्नेश बुध भी आपका अस्त होकर पिता के स्थान यानी आपके कर्म स्थान पर नीच राशि का होकर बैठा है। ‘राहु दोषं बुधो हन्यात्’ इस नियम के आधार पर वर्तमान में आपको बुध ग्रह को ताकत देने के लिए पन्ना रत्न धारण करना चाहिए तथा शनि के दुष्प्रभाव को कम करने के लिए पीपल के पेड़ की परिक्रमा, दीपदान एवं हनुमान चालीसा का पाठ करना आवश्यक है। परिक्रमा करते समय ‘ओम पिप्पलाश्रय संस्थिताय नमः’ जरूर बोलना है। परिक्रमा कम से कम ७ मिनट होनी चाहिए। जीवन के संपूर्ण रहस्य को जानने के लिए संपूर्ण जीवन दर्पण बनवाएं तथा धीरे-धीरे समय अनुकूल हो जाएगा।
प्रश्न- गुरु जी मेरी राशि क्या है और जीवन में किस प्रकार विकास होगा, उपाय बताएं?
विजय जायसवाल
(जन्म- २४ मई १९८२, समय- १७.२० बजे, स्थान- मुंबई )
विजय जी आपका जन्म तुला लग्न एवं वृष राशि में हुआ है। इस समय आपकी राशि पर शनि की ढैया भी चल रही है। आपकी कुंडली में पराक्रम भाव पर केतु एवं भाग्य भाव पर राहु बैठकर भाग्य ग्रहण दोष एवं पितृ दोष भी बना रहा है। इन दोषों के कारण आपके हर कार्य में अनेक प्रकार की असुविधा भी प्राप्त होती है तथा भाग्येश बुध आपकी कुंडली में अस्त होकर अष्टम स्थान पर बैठा है, जिससे दुर्भाग्य योग भी पैदा कर रहा है। बुध ग्रह को मजबूत करने के लिए पन्ना रत्न आपको धारण करना होगा तथा जीवन की संपूर्ण गहराई को जानने के लिए संपूर्ण जीवन दर्पण बनवाएं एवं जीवन में विकास में अवरोध करने वाले ग्रहों की पूजा करवाएं। धीरे-धीरे आपका विकास प्रारंभ हो जाएगा
प्रश्न- विवाह हुए कई वर्ष हो गए, संतान क्यों नहीं हो रही है?
राहुल ‌ यादव
(जन्म- २१ दिसंबर १९८३, समय- दिन में ११.१० बजे, स्थान- भदोही उ.प्र.)
राहुल जी आपका जन्म कुंभ लग्न एवं मिथुन राशि में हुआ है। संतान का विचार पंचम भाव से किया जाता है और पंचमेश बुध सूर्य के साथ में लाभ भाव में बैठा है, जो कि कमजोर है। सूर्य के साथ बुध की दृष्टि पंचम भाव पर पड़ती है तो गर्भपात भी करवाता है तथा संतान के बारे में संपूर्ण गहराई को जानने के लिए पत्नी की कुंडली का भी विचार करना आवश्यक माना जाता है। पत्नी की कुंडली से आपकी कुंडली का मिलान किया गया तो नाड़ी दोष भी बता रहा है। नाड़ी दोष के कारण संतान उत्पत्ति में अवरोध एवं विलंब होता है। जीवन की संपूर्ण गहराई को जानने के लिए संपूर्ण जीवन दर्पण बनवाएं एवं पन्ना रत्न धारण करें तथा कुंडली के दोष की पूजा जल्द ही कराएं। संतान सुख की प्राप्ति अवश्य होगी।
प्रश्न- गुरु जी संतानोत्पत्ति क्यों नहीं हो रही है?
मनोरमा उपाध्याय
(जन्म- २६ सितंबर १९८६, समय- दिन में १. ३८ बजे, स्थान- इलाहाबाद )
मनोरमा जी आपका जन्म धनु लग्न एवं मिथुन राशि में हुआ है। संतान उत्पत्ति के बारे में पंचम स्थान का विचार करना आवश्यक होता है। आपकी कुंडली में पंचम स्थान का स्वामी मंगल केंद्र लग्न में बैठा है। संतान तो निश्चित होगी लेकिन मंगल ग्रह २९ अंश का होकर लग्न में बैठा है। मंगल ग्रह वृद्धावस्था में है। मंगल ग्रह को ताकत देना आवश्यक है। जीवन की संपूर्ण गहराई को जानने के लिए संपूर्ण जीवन दर्पण बनवाना आवश्यक है। संतान उत्पत्ति के लिए आप शनि प्रदोष व्रत एवं सोम प्रदोष व्रत से प्रदोष व्रत प्रारंभ करें तथा मूंगा एवं पुखराज रत्न धारण करना आवश्यक है। संतान उत्पत्ति में विलंब को दूर करने के लिए संतान वृद्धि कवच का पाठ आवश्यक है, आपको संतान अवश्य प्राप्त होगी।
प्रश्न- गुरु जी मैं बहुत परेशान हूं। व्यापार करना चाहता हूं करूं या न करूं, उपाय बताएं?
रामू चौरसिया
(जन्म- ९ अक्टूबर १९५८, समय- प्रातः ७.३० बजे, स्थान- मुंबई )
रामू जी आपका जन्म तुला लग्न एवं कर्क राशि में हुआ है। आपने मैसेज भेजा है कि मेरी राशि सिंह है यदि आपका विवरण सही है तो आपकी राशि कर्क होनी चाहिए। आपकी कुंडली में भाग्येश बुध अस्त हो करके राहु, शुक्र एवं सूर्य के साथ में बारहवें भाव में बैठा है। सबसे पहले अपने जीवन की संपूर्ण गहराइयों को जानने के लिए आप संपूर्ण जीवन दर्पण बनवाएं तथा पन्ना रत्न धारण करें। व्यापार आपके लिए लाभदायक होगा लेकिन आपको पन्ना रत्न धारण करना होगा। जीवन की गहराई को जानकर ही व्यापार प्रारंभ करें तभी व्यापार में आपको सफलता मिलेगी।

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