मैं प्रोडक्ट बन सकता हूं! -जॉन अब्राहम

अभिनेता जॉन अब्राहम कलाकार के अलावा फिल्म निर्माता भी बन गए हैं। इस बदली भूमिका से उनके अंदर के कलाकार में क्या परिवर्तन आया? इसके अलावा फिल्म ‘रॉ’ को लेकर उनकी क्या आकाक्षांएं रहीं इसे जानने की कोशिश की पूजा सामंत ने। पेश है बातचीत के मुख्य अंश…
 फिल्म ‘रॉ’ करने के पीछे क्या वजह रही?
इस फिल्म का निर्माता मैं नहीं हूं इसीलिए कोई यह नहीं कह सकता कि मैंने खुद के लिए एक स्ट्रॉन्ग कंटेंटवाली फिल्म का निर्माण किया। खैर निर्देशक रॉबी ग्रेवाल ने जब मुझे यह कहानी सुनाई तो मैंने इस फिल्म को साइन करने के लिए ज्यादा वक्त नहीं लिया।
 ‘रॉ’ फिल्म भी आपकी पिछली फिल्म ‘पोखरण’ की तरह देशभक्ति पर है। क्या आपने इसी जॉनर को अपना लिया है?
यह एक संयोग है, वरना मैंने ऐसा कुछ नहीं तय किया। सच तो यही है कि मैंने अपना करियर भी कभी प्लान नहीं किया। यदि आपने फिल्म ‘रॉ’ देखी होगी तो समझी होगी कि यह फिल्म ढर्रेबाज देशभक्ति पर नहीं है।
 फिल्म ‘रॉ’ में आपने ९ किरदार निभाए हैं जिसमें आपने निगेटिव किरदार भी निभाया? 
मैंने फिल्म में १५ किरदार निभाए हैं लेकिन उनमें ३ किरदार ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। अकबर मलिक, रहमत अली और वॉल्टर खान, जहां तक निगेटिव किरदार का प्रश्न है तो निर्देशक रॉबी ग्रेवाल के पिताजी इंटेलिजेंस में काम करते थे। उनके करियर में घटी सच्ची घटनाओं को हमने यहां कहानी में पिरोया है।
 आप अभिनय के साथ निर्माता भी बन गए हैं। क्या इससे आपके अभिनय में अंतर आया है?
आपको क्या लगता है? कितना फर्क आया मेरे अभिनय में? मैंने अपनी एमबीए की पढ़ाई मॉडलिंग करते हुए की है। एमबीए करने का यह फायदा हुआ कि क्या बेचा जा सकता है, यह समझने लगा। मैं प्रोडक्ट बन सकता हूं, इसका ज्ञान होने पर मैंने अपने फिजिक पर ध्यान दिया। अगले मोड़ पर मैंने जब ‘टैक्सी ९२११’ और ‘न्यूयॉर्क’ जैसी फिल्में कीं तो मुझे ध्यान आया कि अब एक्टिंग की परिभाषा बदल गई है। लाउड एक्टिंग को ज्यादा पसंद नहीं किया जा रहा है। अगले टर्न पर मैं खुद निर्माता बन गया और मेरी अभिनय की समझ, बारीकियां और साथ में परिपक्वता और बढ़ गई।