" /> दहशत के साए में न्याय व्यवस्था!, ७५० वकीलों ने सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश बोबडे को पत्र लिखकर जताई चिंता

दहशत के साए में न्याय व्यवस्था!, ७५० वकीलों ने सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश बोबडे को पत्र लिखकर जताई चिंता

देश के मुख्य न्यायाधीश शरद अरविंद बोबडे को ७५० वकीलों ने कल पत्र लिखकर न्याय व्यवस्था की वर्तमान अवस्था पर अपनी चिंता जाहिर की है। इस पत्र के जरिए वकीलों ने न्याय व्यवस्था के दहशत में होने की बात कही है। पत्र के माध्यम से वकीलों ने न्यायपालिका को धमकाने और डराने की प्रवृत्ति पर रोशनी डालते हुए अपनी चिंता जताई है।

बता दें कि ७५० वकीलों के हस्ताक्षरवाले पत्र के संदर्भ की खबर एक अंग्रेजी दैनिक समाचार पत्र व एक वेबसाइट ने दी है। पत्र में लिखा गया है कि न्याय व्यवस्था लोकतंत्र की तीसरा महत्वपूर्ण स्तंभ है। इसलिए न्याय व्यवस्था के मूल्यों और प्रतिष्ठा की सुरक्षा करनी चाहिए, ऐसा वकीलों ने मुख्य न्यायाधीश को लिखे अपने पत्र में कहा है।

अपने पत्र में वकीलों ने कहा है कि न्याय व्यवस्था में रुकावट पैदा करनेवालों द्वारा न्यायमूर्ति पर अपमानजनक टिप्पणी की जाती हैं। जो न्यायाधीश उनका पक्ष नहीं मानते, उन पर ये हमले हो रहे हैं। राजनीतिक दृष्टिकोण से जैसा चाहिए जब वैसा पैâसला न्यायालय में नहीं मिलता, तब वकीलों की ओर से ही अपमानजनक टिप्पणी की जाती है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। सर्वोच्च न्यायालय और न्यायाधीशों को दोषी ठहराते हुए द्वेषपूर्ण भाषा में हमले किए जा रहे हैं। धमकानेवाले, दबाव डालनेवाले, दहशत निर्माण करनेवाली भाषा का उपयोग हो रहा है, जो चिंताजनक है। जनता का विश्वास ही इस न्याय व्यवस्था की बुनियाद है। लेकिन ‘सर्वोच्च न्यायालय ने लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ किया है’, ‘सर्वोच्च न्यायालय द्वारा संविधान की हत्या की जा रही है’, ऐसी भाषा का इस्तेमाल किया जाता है। जनता का न्याय व्यवस्था पर बसे विश्वास को धूमिल करने की यह प्रवृत्ति है, जिसे रोकना चाहिए। ऐसा इस पत्र में देश के वरिष्ठ वकीलों ने लिखा है।