ड्राइवरों को भाई स्मार्ट कमाई! काली-पीली छोड़ ऐप कैब में मस्त

एक समय मुंबई की जान और पहचान रही काली-पीली टैक्सी का ग्राफ अब गिरता जा रहा है। मुंबई में काली-पीली टैक्सी की संख्या विगत दो वर्षों में २३ प्रतिशत कम हुई है। इसका सबसे बड़ा कारण टैक्सी ड्राइवर को अब १२ से १३ घंटे की कड़ी मेहनत की बजाय ऐप आधारित (ओला, उबेर आदि) कैब की ८ घंटे की ड्यूटी भा रही है। कम समय में अच्छी कमाई का यह स्मार्ट फॉर्मूला ड्राइवरों को भा रहा है।
बता दें कि एक दशक पहले मुंबई की सड़कों पर ६३ हजार काली-पीली टैक्सियां दौड़ती थीं लेकिन अब सड़कों पर मात्र ४४,५६६ टैक्सियां दौड़ रही हैं। जितनी तेजी से टैक्सियों की संख्या कम हो रही है, उतनी ही तेजी से ऐप आधारित वैâब टैक्सियों की संख्या बढ़ रही है। विगत दो साल में ऐप कैब की संख्या में २३ फीसदी का इजाफा हुआ है। सड़कों से कम होती काली-पीली टैक्सी के बारे में `टैक्सी मेंस यूनियन’ के अध्यक्ष ए एल क्वाड्रोस ने कहा कि आजकल ड्राइवर १२-१३ घंटे मेहनत नहीं करना चाहते। उन्हें ऐप कैब की ड्राइविंग कर कम समय में अच्छी तनख्वाह मिल जाती है। अब लोगों को स्मार्ट कमाई करनी है। तय समय में काम कर पगार उठाना ड्राइवरों को भा रहा है। अब जब काली-पीली को ड्राइवर ही नहीं मिलेंगे तो जाहिर सी बात है कौन टैक्सी निकालेगा? एक समय टैक्सी चालक रहे लालू यादव आज ऐप आधारित टैक्सी चला रहें हैं। उनका कहना है कि टैक्सी चलाने के लिए बैच की जरूरत होती है जिसके लिए बड़ी भागदौड़ करनी पड़ती है। खुद की टैक्सी लेना अब सपना-सा हो गया है क्योंकि गाड़ियां भी महंगी हो गई हैं। ऐप कैब चालक आनंद पुजारी ने कहा कि आज-कल लोगों को एसी और आरामदायक सफर चाहिए, ऐसे में टैक्सी लोगों को कम भा रही है। जाहिर-सी बात है जहां यात्रियों का ज्यादा रुझान रहेगा उसी क्षेत्र में गाड़ी भी बढ़ेंगी। नए ड्राइवरों के लिए कम समय में अच्छी कमाई की दरकार होती है इसलिए सब यही पूछते हैं कि किसी को ऐप कैब के लिए ड्राइवर चाहिए क्या?
ऑटो अप
मुंबई में भले ही टैक्सी की संख्या कम हो रही हो लेकिन ऑटोरिक्शा की संख्या अप (इजाफा) जा रही है। ऑटोरिक्शा की संख्या २०१७ में १,३७,६५० से बढ़कर २०१९ में २,१२,६९१ तक पहुंच गई है यानी की लगभग ५५ फीसदी का उछाल। जानकारों की मानें तो ऑटोरिक्शा के परमिट फिर से शुरू हो जाने के चलते ऑटोरिक्शा की संख्या में इजाफा हुआ है।