" /> काली-पीली चली मुलुक! 500 टैक्सी ड्राइवरों ने की तैयारी : कुछ ने किया बिना परमिट के कूच

काली-पीली चली मुलुक! 500 टैक्सी ड्राइवरों ने की तैयारी : कुछ ने किया बिना परमिट के कूच

लॉक डाउन को करीब डेढ़ महीने बीत चुके हैं। इस दौरान टैक्सी सेवा ठप होने से काली-पीली टैक्सी चालकों के कमाई का जरिया भी बंद हो गया है। कमाई न होने से इनकी हालत भी दिन ब दिन पतली होती जा रही है और पैसे भी खर्च हो चुके हैं। गांव जाने के सारे हथकंडे अपना लेने के बाद अब कुछ काली-पीली ड्राईवर बिना परमिट और मेडिकल सर्टिफिकेट के ही अपनी टैक्सी से गांव की ओर कूच कर रहे हैं।

बता दें कि लॉकडाउन से परेशान टैक्सी चालक अब अपनी टैक्सी लेकर गांव जा रहे हैं। मुंबई टैक्सिमेन्स यूनियन की मानें तो लॉक डाउन से पहले ही लगभग दो हजार टैक्सी चालक जा चुके हैं। यूनियन की माने तो 500 टैक्सी ड्राइवरों ने मुंबई से अपने गांव जाने की योजना बनाई है। वे आरटीओ और जिला कलेक्टर से अनुमति मांग रहे हैं।

गौरतलब है कि मुंबई की पहचान मानी जानेवाली काली-पीली टैक्सी शहर के यातायात का प्रमुख अंग है। ये लोग रोज कमाकर खानेवाले लोग हैं। ऐसे में लॉक डाउन के 43 दिन बीत जाने पर उनकी आर्थिक और मानसिक दशा खराब हो गई है। छोटे-छोटे घरों में बंद उनके बच्चे परेशान हैं। कई लोगों के सामने तो खाने-पीने की समस्या आ गई है। वे किसी भी हाल में घर पहुंचना चाहते हैं।

परेशानी तो बहुत है, पर चारा भी तो नहीं
मुंबई कलेक्टर की अनुमति लेकर गांव को निकले शमसेर सिंह ने बताया कि मैं बुधवार, 6 मई शाम को पांच बजे मुंबई से गोरखपुर के लिए निकला हूं। मेरे साथ पूरा परिवार है। हम रुकते, रुकते चल रहे हैं। अभी तक हमने पांच हजार का पेट्रोल भराया है। अभी हम मध्य प्रदेश के शिवपुरी में पहुंचे हैं। हम परसों तक गांव पहुच जाएंगे। उन्होंने कहा कि दो छोटे बच्चों को लेकर इतना लंबा टैक्सी का सफर बहुत कठिन है, पर इसके अलावा चारा भी तो नहीं। हम गरीब हैं, पर खाने के लिए बिना महेनत किए हाथ फैलाना हमारे बस की बात नहीं है।

अनुमति मिलते ही निकल जाऊंगा
मुंबई से गांव जाने की तैयारी कर रहे संदीप मौर्य बताते हैं कि हमें नहीं लगता कि लॉक डाउन जल्द खुलनेवाला है। हमारे पास पैसे खत्म हो चुके हैं। सरकारी मदद के नाम पर कुछ खास हुआ नहीं है। दोस्तों का भी हमारे जैसा ही हाल है। यहां एक खोली (कमरे) में हम पांच लोग रहते हैं। गांव में परिवारवाले बहुत परेशान हो रहे हैं। एक दोस्त से उधार लेकर मैं गांव जा रहा हूं। सरकारी अनुमति मिलते ही निकल जाऊंगा।

पांच सौ लोग जाएंगे गांव
मुंबई टैक्सी यूनियन के अध्यक्ष एंटोनी लॉरेंस क्वाड्रोस ने बताया कि लॉक डउन में हमारी 45 हजार टैक्सियां पूरी तरह से ठप पड़ी हैं, जो दो शिफ्ट में चलतीं हैं। लगभग देढ़ लाख चालक टैक्सी चलाते हैं। हर टैक्सी चालक रोजाना टैक्सी चलकर 1000 से 1500 रुपए कमाते हैं। ये सभी रोज कमाकर खानेवाले लोग हैं। इनके सामने भोजन की समस्या है। इनमें से ज्यादातर लोगों के परिवार वाले गांव में रहते हैं। ऐसे में आनेवाले एक सप्ताह में 500 लोग अपनी टैक्सियों से गांव जाने की प्लानिंग में हैं। उन्होंने कहा कि अब तक लगभग दो हजार लोग टेक्सियों से अपने गांव जा चुकें हैं।

आरटीओ दे रही ऑनलाइन परमिट
इस बारे में ‘दोपहर का सामना’ संवाददाता ने अंधेरी आरटीओ अधिकारी तानाजी चव्हाण से बात की तो उन्होंने कहा कि हम किसी को रोक नहीं रहे हैं। नियमों के अनुसार जो लोग अनुमति मांगेंगे हम उन्हें अनुमति देंगे। अनुमति की प्रक्रिया एक दम सरल है। टैक्सी चालक maharashtra.org.in की साइट पर जाकर ऑनलाईन परमिट ले सकते हैं। परमिट की अनुमति ऑटो सिस्टम के तहत तुरंत मिल जाएगी। परंतु इस बार आरटीओ की अनुमति के साथ-साथ पुलिस की अनुमति भी लगेगी। इसके साथ ही दूसरे निमय भी लागू होंगे। अंधेरी वेस्ट के आरटीओ अभय देशपांडे ने कहा कि हर वर्ष टैक्सी चालक अपनी टैक्सी लेकर गांव जाते हैं। इस वर्ष अभी तक इनकी संख्या कम है। हमने किसी को रोका नहीं है, पर लोगों को कोरोना काल के हर नियम को मानने के बाद ही अनुमति दी जाएगी।