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मॉनसून में टूट सकता है मुसीबतों का पहाड़

◼️ कामवारी नदी में सफाई का अभाव, भिवंडी के डूबने का खतरा
◼️ शहर की मुसीबतों में फिलहाल घटोत्तरी के कोई आसार नहीं

कोरोना वायरस की मार से बेजार भिवंडी शहर पर मूसलाधार बारिश में मुसीबतों का पहाड़ टूट सकता है। बरसात शुरू होते ही हर साल की तरह इस साल भी शहर में जल-जमाव व बाढ़ जैसे हालात से लोगों को दो चार होना पड़ेगा क्योंकि इस साल भी बाहरी जल निकासी का एकमेव मुख्य स्रोत कामवारी नदी सहित अंदरूनी नालों और गटरों की समुचित साफ-सफाई नहीं की गई है, जिसे लेकर शहरियों को बाढ़ का भय अभी से सताने लगा है।
भिवंडी मनपा व ग्राम पंचायत की सीमा को अलग करनेवाली कामवारी नदी बरसाती पानी निकासी का माध्यम है, जो इन दिनों नाले में तब्दील हो चुुकी है। यह नदी कचरे से अटी पड़ी है, ऐसे में बरसात में यह नदी शहर के निचले क्षेत्र में जल-भराव का मुख्य कारण बननेवाली है लेकिन मनपा इसकी सफाई को लेकर उदासीन बनी हुई है। कामवारी नदी का कुछ भाग मनपा क्षेत्र में है। शेष भाग शेलार ग्राम पंचायत की सीमा में है, ऐसे में दो विभाग के बीच फंसी इस नदी की सुध लेनेवाला कोई नहीं है। भिवंडी मनपा समेत ग्रामीण इलाकों के नालों का पानी इसी कामवारी नदी में आता है। तेज बारिश के दौरान नाला बन चुकी कामवारी नदी शहर के नालों का पानी नहीं खींच पाती है, जिसके कारण ही शहर के कई निचले इलाके डूब जाते हैं और कुछ इलाकों में तो पांच से सात फुट तक पानी भर जाता है। शहर में गटर व नाला सफाई भी नाममात्र की हुई है।
बरसाती जल निकासी का एकमात्र स्रोत
यहां इस बात का उल्लेख आवश्यक है कि कामवारी नदी ही शहर की बरसाती जल निकासी का एकमात्र वह स्रोत है, जिससे शहर सहित ग्रामीण भाग के बरसात का पानी खाड़ी से होकर बाहर निकलता है। इसके बावजूद आज तक भिवंडी मनपा ने कभी भी इस नदी की साफ-सफाई पर कोइ ध्यान नहीं दिया, जिससे कारण नदी कचरों से एकदम अटी पड़ी है। कचरों से आच्छादित होने के कारण नदी की गहराई कम होने से बारिश के दौरान नदी से पानी का तेज प्रवाह निकलकर नदीनाका, म्हाडा कॉलोनी, भिवंडी-वाडा रोड सहित निचले इलाकों की अन्य झोपडपट्टी क्षेत्रों में पहुंचता है, जिससे लाखों गरीब परिवार प्रति वर्ष बेघर होकर अपना सामान लेकर इधर-उधर सहारा खोजने के लिए अभिशप्त हैं। मनपा प्रशासन सबकुछ जान-बूझकर भी इतने बड़े जनहित के गंभीर मुद्दे पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। मूसलाधार बारिश होने से नदी का पानी निकलकर सड़क पर भर जाता है, जिससे घंटों-घंटों तक भिवंडी–वाडा मार्ग बंद हो जाता है।
मनपा व ग्राम पंचायत के बीच अटका मामला
हर साल आनेवाली इस गंभीर समस्या के स्थाई निराकरण के लिए नदी की सफाई एवं गहरा करने का कोई प्रयास नहीं करता, जिसे लेकर शहर के लोगों में मनपा प्रशासन के प्रति भारी नाराजगी देखी जा सकती है। बताया जाता है कि कामवारी नदी का कुछ भाग मनपा क्षेत्र में है और शेष भाग शेलार ग्राम पंचायत की सीमा में है, जिसके कारण मनपा उक्त मुद्दे को लेकर लापरवाही बरत रही है और ग्राम पंचायत अधिकारी संसाधनों का अभाव बताते हुए अपना पल्ला झाड लेते हैं।
नदी के किनारे सीआरजेड के नियमों का उल्लंघन
भिवंडी शहर की सीमा से सटी कामवारी नदी के किनारे सीआरजेड के नियमों का उल्लंघन करके बड़े पैमाने पर हुए अवैध निर्माण के कारण इकलौती कामवारी नदी नाले के रूप में तब्दील हो गई है। मनपा अधिकारियों की मिलीभगत से बिल्डर तो मालामाल हो गए लेकिन इन अवैध निर्माणों के चलते नदी का अस्तित्व ही पूरी तरह समाप्त हो गया। बावजूद इसके कामवारी नदी के किनारे अवैध निर्माण करनेवालों का गोरखधंधा अभी भी निर्बाध गति से जारी है।