कश्मीर के काले दिन पर हड़ताल, सुरक्षा हुई चौकस

कश्मीर में २१ मई को हड़ताल का आह्वान किया गया है। इस अवसर पर हुर्रियत कॉन्फ्रेंस राजधानी में कुछ कार्यक्रमों का आयोजन करने जा रही है। जिसके मद्देनजर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जा रहे हैं। वहीं कुछ इलाकों में बंद के हालात है, जिससे आम जन जीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। गौरतलब है कि हुर्रियत कॉन्फ्रेंस श्रीनगर में अपने पूर्व नेता अब्दुल गनी लोन और मीरवाइज मुहम्मद फारुख की पुण्य तिथि मना रही है। इसी के उपलक्ष्य में एक हफ्ते तक विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। जिसको देखते हुए पुलिस ने कई इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी है।

हुर्रियत के कार्यक्रम के चलते सुरक्षा के मद्देनजर श्रीनगर के तीन थाना क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित रहेंगे। यहां तक कि इन इलाकों में स्कूल, बैंक और सरकारी कार्यालय भी बंद के असर से जूझ रहे हैं।

यह सच है कि राज्य में २१ मई का एक खूनी इतिहास है। वर्ष २००६ में २१ मई को श्रीनगर में कांग्रेस की रैली पर होने वाला हमला कश्मीर के इतिहास में कोई पहला हमला नहीं था। किसी जनसभा पर आतंकी हमले का कश्मीर का अपना उसी प्रकार एक रिकार्ड है जिस प्रकार कश्मीर में २१ मई को होने वाली खूनी घटनाओं का इतिहास है। आम कश्मीरी तो २१ मई को सताने वाला दिन कहते हैं जब हर वर्ष आग बरसती आई है।

कश्मीर में रैलियों और जनसभाओं पर हमले करने की घटनाएं वैसे पुरानी भी नहीं हैं। इसकी शुरूआत वर्ष २००२ में ही हुई थी जब पहली बार आतंकियों ने २१ मई के ही दिन श्रीनगर के ईदगाह में मीरवायज मौलवी फारूक की बरसी पर आयोजित सभा पर अचानक हमला बोल कर पीपुल्स कांप्रâेंस के तत्कालीन चेयरमेन प्रो अब्दुल गनी लोन की हत्या कर दी थी।

वर्ष २००२ में ही उन्होंने करीब १४ रौलियों और जनसभाओं पर हमले बोले थे। इनमें ३७ से अधिक लोग मारे गए थे। सबसे अधिक हमले ११ सितम्बर को बोले गए थे जिसमें तत्कालीन कानून मंत्री मुश्ताक अहमद लोन भी मारे गए थे। हालांकि उसी दिन कुल ९ चुनावी रैलियों पर हमले बोले गए थे जिसमें कई मासूमों की जानें चली गई थीं।

इतना जरूर है कि वर्ष २००६ में २१ मई को हुआ हमला कश्मीरियों को फिर यह याद दिला गया था कि २१ मई के साथ कश्मीर का खूनी इतिहास जुड़ा हुआ है। आतंकवाद की शुरूआत के साथ ही २१ मई कश्मीरियों को कचोटती रही है। ऐसा इसलिए है क्योंकि अगर २३ साल पहले आतंकवादियों ने २१ मई के दिन हुर्रियत के अध्यक्ष मीरवायज उमर फारूक के अब्बाजान मीरवायज मौलवी फारूक की नगीन स्थित उनके निवास पर हत्या कर दी थी। इस हत्या के बाद ही कश्मीर में आतंकवाद ने नया मोड़ लिया था और आज यह इस दशा में पहुंचा है।