" /> सिर्फ डेढ़ रुपए में करो कोरोना का कत्तल, वुहान व मिन्नेसोटा यूनिवर्सिटी ने की स्टडी , डायबिटीज की दवा को बताया उपयोगी

सिर्फ डेढ़ रुपए में करो कोरोना का कत्तल, वुहान व मिन्नेसोटा यूनिवर्सिटी ने की स्टडी , डायबिटीज की दवा को बताया उपयोगी

हाल ही में कई बड़ी दवा कंपनियों ने कोरोना वायरस की दवा बनाने का दावा किया है। लेकिन ये दवाएं काफी महंगी हैं। इनका इलाज कुछ हजार रुपयों से लेकर लाखों रुपए तक में है। अमेरिका में एक कंपनी ने दवा बनाई है वह ढाई लाख रुपए की है। इसी तरह भारत में एक कंपनी ने `३५०० की दवा बनाई है। लेकिन आपको यह जानकर आश्चर्य होगा की एक स्टडी में पाया गया है कि डेढ़ रुपए की गोली भी कोरोना में कारगर है।

एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार डायबिटीज के मरीजों के लिए इस्तेमाल होने वाली एक सस्ती दवा मेटफॉर्मिन से कोरोना मरीजों को भी लाभ मिल सकता है। चीन के वुहान के डॉक्टरों ने कुछ केस स्टडी के आधार पर ये बात कही है। वहीं, अमेरिका के मिन्नेसोटा यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स का भी कहना है कि मेटफॉरमिन दवा कोरोना मरीजों की मौत के खतरे को कम कर सकती है। मिन्नेसोटा यूनिवर्सिटी ने करीब ६ हजार मरीजों पर स्टडी की थी।

ब्रिटिश अखबार ‘द सन’ में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिटेन की प्रमुख स्वास्थ्य संस्था नेशनल हेल्थ सर्विस पहले से इस दवा का इस्तेमाल कर रही है। डायबीटिज के साथ-साथ ब्रेस्ट कैंसर और हार्ट की बीमारियों में भी इस दवा से लाभ होने की बात कही जा रही है।
यह दवा काफी सस्ती है और भारत में मेटफॉर्मिन ५०० एमजी के एक टैबलेट की कीमत १.५ रुपये है। टाइप २ डायबिटीज के इलाज के लिए १९५० के दशक से ही इस दवा का उपयोग किया जा रहा है।

वुहान के डॉक्टरों ने हाल ही में अपनी स्टडी प्रकाशित की जिसमें कहा गया है कि डायबिटीज से पीड़ित जो लोग कोरोना संक्रमित हुए और मेटफॉर्मिन दवा ले रहे थे उनमें मौत की दर, यह दवा नहीं लेनेवाले डायबिटीज के मरीजों की तुलना में कम थी। डॉक्टरों ने कोरोना से गंभीर रूप से बीमार पड़े १०४ मरीजों के डेटा की स्टडी की जिन्होंने मेटफॉर्मिन दवा ली थी। इन मरीजों के डेटा की तुलना कोरोना के १७९ अन्य गंभीर मरीजों से की गई। इस दौरान ध्यान रखा गया कि जिन मरीजों से तुलना की जा रही है, वे भी उसी उम्र और लिंग के हों। स्टडी के दौरान वुहान के डॉक्टरों को पता चला कि मेटफॉर्मिन लेनेवाले सिर्फ ३ मरीजों की मौत हुई थी, जबकि इतने ही गंभीर २२ कोरोना मरीजों की मौत हो गई जिन्होंने ये दवा नहीं ली थी। कुछ स्टडीज में ये भी बात सामने आई है कि मोटापे के शिकार जो लोग डायबिटीज से पीड़ित नहीं हैं, उन्हें भी वजन घटाने में ये दवा मदद करती है। वहीं, यह भी देखा गया है कि मोटापे के शिकार लोगों को कोरोना से अधिक दिक्कत होती है और उनकी मौत का खतरा भी अधिक रहता है।