" /> चुनावों की दस्तक… मोदी हुए नतमस्तक!…जब ७५० किसान हुए शहीद तब जाकर जागी केंद्र सरकार

चुनावों की दस्तक… मोदी हुए नतमस्तक!…जब ७५० किसान हुए शहीद तब जाकर जागी केंद्र सरकार

♦  लखीमपुर हिंसा बनी टर्निंग प्वॉइंट
♦  ५ राज्यों के चुनावों ने दिखाया असर

प्रधानमंत्री मोदी ने गुरु पर्व और कार्तिक पूर्णिमा के खास पर्व पर विवादित तीनों नए कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा कर दी है। लगभग दो सालों से कृषि कानून रद्द नहीं करने की जिद और सैकड़ों किसानों की बलि लेने के बाद अचानक बिल वापस लेने के पैâसले ने राजनैतिक विश्लेषकों को चौंका दिया, वहीं राजनैतिक गलियारों में चर्चा हो रही है कि ५ राज्यों में होनेवाले चुनावों की दस्तक ने मोदी को नतमस्तक होने पर मजबूर कर दिया है। हालांकि केंद्र सरकार द्वारा किया गया यह एलान किसानों के लिए बहुत बड़ी जीत है।
बता दें कि ५ राज्यों में चुनाव की तैयारी शुरू हो चुकी है। पश्चिम बंगाल में हार के बाद भाजपा को आनेवाले चुनावों में भी अपनी हार नजर आने लगी थी। यही कारण है कि केंद्र ने कानून वापस लेने का पैâसला लिया है। विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि कृषि कानून वापस लेने में लखीमपुर खीरी हिंसा ने बहुत बड़ी भूमिका निभाई। लखीमपुर खीरी हिंसा में किसानों को कार से कुचले जाने की घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था। सितंबर से शुरू हुए आंदोलन के दौरान कई तरह की अनगिनत घटनाएं हुर्इं। राकेश टिवैâत का दावा है कि दिल्ली कूच करने तक आंदोलन के दौरान करीब ७५० किसान शहीद हुए। कृषि कानून की वापसी पर देशभर के नेताओं ने अलग-अलग प्रतिक्रिया दी है। किसानों ने पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश में आंदोलन किया, जो कि २६ नवंबर, २०२० को दिल्ली की सीमाओं पर आकर रुका।
इसके बाद जनवरी २०२१ में सुप्रीम कोर्ट ने इन कृषि कानूनों पर रोक लगा दी। सरकार की तरफ से किसान आंदोलन को जाट बनाम गुर्जर करार दिया जाने लगा। इस आंदोलन के राजनीतिकरण की भी कोशिशें हुर्इं। किसान आंदोलनकारियों ने अपने क्षेत्रों में भाजपा नेताओं के प्रवेश पर बैन लगाया तो उसको लेकर भी टकराव हुआ।

‘चुनाव में कीमत चुकानी होगीयह ध्यान आने पर कानून वापस!- शरद पवार
एक बात अच्छी हुई है, इस संघर्ष में उत्तर प्रदेश के कुछ क्षेत्र के, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा इन भागों के किसान अधिक ताकत से आंदोलन में उतरे। अब पंजाब और उत्तर प्रदेश में चुनाव होनेवाले हैं। अभी से ही गांवों में भाजपा के कार्यकर्ताओं के आने पर जनता उनसे किसानों के आंदोलन पर सवाल पूछ रही है। चुनाव में इसकी कीमत चुकानी होगी, यह बात ध्यान में आने के बाद मोदी सरकार ने कृषि कानून को रद्द किया, ऐसी प्रतिक्रिया शरद पवार ने दी।

केंद्र सरकार ने घुटने टेके- नाना पटोले
उत्तर प्रदेश सहित पांच राज्यों में होनेवाले विधानसभा चुनावों में हार का डर और देश के किसानों के आंदोलन के सामने केंद्र की भाजपा सरकार को घुटने टेकने पड़े हैं। यही वजह है कि किसानों को गुलाम बनाने के लिए लाए गए तीन कृषि कानूनों को वापस लेना पड़ा है। यह बात कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले ने कही। मोदी सरकार की तानाशाही नीति के खिलाफ किसानों की ऐतिहासिक विजय है, ऐसा भी उन्होंने कहा। केंद्र की मोदी सरकार द्वारा तीन कृषि कानूनों को वापस लेने के बारे में प्रतिक्रिया देते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने उक्त बातें कहीं।

किसान एकता की विजय-अजीत पवार, उपमुख्यमंत्री
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा तीनों केंद्रीय कृषि कानूनों को निरस्त करने का निर्णय महात्मा गांधी जी द्वारा दिखाए गए अहिंसा, सत्याग्रह के मार्ग की जीत है। इस योग्य निर्णय के लिए प्रधानमंत्री का आभार मानता हूं और शांतिपूर्ण तरीके से लंबे संघर्ष के लिए किसानों बंधुओं का अभिनंदन करता हूं। यह किसान एकता की जीत है।

आंदोलन की सफलता है
केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ लगभग एक साल से किसान दिल्ली सीमा पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। अंत में, प्रधानमंत्री ने इन कानूनों को वापस लेने की घोषणा की। यह आजादी के बाद के सबसे लंबे समय तक चलनेवाले आंदोलन की सफलता है। इस आंदोलन में मरनेवाले सभी किसानों को आदरांजलि व्यक्त करता हूं।
-गृहमंत्री दिलीप वालसे पाटील

देर आए, दुरुस्त आए!
केंद्र सरकार ने तीन कृषि कानूनों को रद्द किया, यह स्वागत योग्य है लेकिन यह निर्णय केंद्र सरकार ने देश में कई जगहों पर हुए उपचुनाव में हार और उत्तर प्रदेश में आगामी चुनाव को ध्यान में रखकर लिया है। केंद्र सरकार को निर्णय लेने में इतनी देर नहीं करनी चाहिए थी। यदि यह निर्णय पहले लिया गया होता तो हजारों किसानों की जान बच जाती। निर्णय जल्दी लेना अपेक्षित था लेकिन ‘देर आए दुरुस्त आए’।
-छगन भुजबल, खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री 

जारी रहेगा किसानों का संघर्ष! -राकेश टिकैत
कृषि कानूनों को लेकर मुखर रहे भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत, भूमि सेना और आदिवासी एकता परिषद की ओर से आयोजित पालघर में एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंचे और तीनों कृषि कानूनों के वापस होने के बाद भी केंद्र सरकार पर हमलावर रहे। पीएम नरेंद्र मोदी के एलान पर किसान नेता राकेश टिवैâत ने कहा कि किसानों का आंदोलन तत्काल वापस नहीं होगा, हम उस दिन का इंतजार करेंगे जब कृषि कानूनों को संसद में रद्द किया जाएगा। आगे की रणनीति पर चर्चा के लिए किसान संगठनों की महाबैठक शनिवार को बुलाई गई है। इस दौरान टिकैत ने केंद्र सरकर पर कार्पोरेट घराने की दलाली करने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि भाजपा की देश भर में खराब होती छवि, किसानों के बढ़ते विरोध और यूपी चुनाव को देखते हुए सरकार ने तीनों काले कानून वापस लेने का पैâसला लिया है। लेकिन जब तक संसद से कानून वापस नहीं लिए जाते और सरकार द्वारा एमएसपी की गारंटी नहीं दी जाती तब तक हम वापस नहीं जाएंगे और केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में हमारा संघर्ष जारी रखेंगे। राकेश टिकैत ने कहा एमएसपी में पूरी तरह से गड़बड़झाला हुआ है। एमएसपी रेट के नाम पर बड़ा भ्रष्टाचार हो रहा है।

मोदी के अहंकार पर किसानों की विजय!
यह मोदी सरकार के अत्याचार, अधर्म और विशाल अहंकार पर किसानों की लड़ाकू भावना, साहस और एकता की जीत है। इस न्याय की लड़ाई में कांग्रेस पार्टी सोनिया गांधी और राहुल गांधी के नेतृत्व में शुरुआत से ही किसानों के साथ खड़े थी, इस बात का आनंद है।
-सचिन सावंत, प्रवक्ता

कोर्ट भी तत्काल दे निर्णय!
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन कृषि कानूनों को रद्द करने की घोषणा की है लेकिन इसका तभी सही अर्थ समझ में आएगा जब संसद में इन कानूनों को वापस ले लिया जाएगा। वहीं इस मुद्दे पर किसानों की सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका भी दायर है। हम सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध करते हैं कि ‘कृषि’ का मुद्दा केंद्र का है या राज्य का, इस पर तत्काल पैâसला दिया जाए।
-प्रकाश आंबेडकर