" /> श्रमिक ट्रेनें साबित हुई कमाऊ पूत, रेलवे ने कमाए ४२८ करोड़ रुपए

श्रमिक ट्रेनें साबित हुई कमाऊ पूत, रेलवे ने कमाए ४२८ करोड़ रुपए

लॉकडाउन में जब सभी उद्योग-धंधे बंद थे, लोग बेकारी का रोना रो रहे थे, उस दौरान बेकार प्रवासी मजदूरों को उनके गांव पहुंचा रही श्रमिक ट्रेने रेलवे की तिजोरी भर रही थीं। यानी
लॉकडाउन में श्रमिक ट्रेनें रेलवे के लिए कमाऊ पूत साबित हुईं। लॉकडाउन के दौरान प्रवासी मजदूरों को उनके गृह राज्य भेजने, राज्य और केंद्र के बीच समन्वय स्थापित कर रेलवे ने श्रमिक ट्रेनों से ४२८ करोड़ रुपए की कमाई की बात कबूली है। मुंबई के आरटीआई कार्यकर्ता अजय बोस से सवालों का जवाब देते हुए रेलवे बोर्ड ने बताया कि श्रमिक ट्रेनों से २९ जून तक कुल ६२,९१,१२६ यात्रियों को उनके गृह राज्य भेजा गया।

मई महीने में ६१९ ट्रेनें
मई महीने से ही श्रमिक विशेष ट्रेनों द्वारा प्रवासी मजदूरों को ले जाने का सिलसिला शुरू हुआ था। आरटीआई द्वारा जानकारी दी है कि १ मई से १ जून तक महाराष्ट्र से कुल ६१९ श्रमिक ट्रेनें विभिन्न राज्यों के लिए निकली हैं। राज्य सरकार द्वारा ७२५ ट्रेनों की मांग की थी जबकि रेलवे ने बताया कि यात्रियों के अभाव से १०६ ट्रेनें रद्द करनी पड़ीं। सबसे ज्यादा ३६४ ट्रेनें यूपी तो १६८ ट्रेनें बिहार के लिए रवाना की गर्इं। इस दौरान राजस्थान के लिए केवल १४ श्रमिक विशेष ट्रेनें छोड़ी गईं।
पटरी पर लौट रही हैं अन्य ट्रेनें
रेल मंत्रालय द्वारा १२ अगस्त तक अन्य ट्रेनों की बुकिंग पर रोक लगा दी गई है लेकिन मौजूदा चल रही ट्रेनों में स्थिति आशाजनक बनी हुई है। ट्रेनें चलने के बाद मुंबई में अब तक १०-१२ लाख लोग लौट चुके हैं। इनमें रिक्शा-टैक्सीवाले भी शामिल हैं। औद्योगिक कारखाने, विभिन्न मेट्रो परियोजनाओं का काम शुरू होने सहित रोजगार की तलाश में फिर प्रवासी मजदूर मुंबई लौटने लगे हैं।
१८ लाख श्रमिक चले गए थे
लॉकडाउन के कारण पूरे महाराष्ट्र से ७२५ ट्रेनों से जून के पहले सप्ताह तक कुल १८ लाख श्रमिकों ने पलायन किया था। लगभग १० लाख लोग मुंबई में बंद के दौरान अपने गांव लौट गए। इनमें से ७ लाख ने ट्रेन से और लगभग २ लाख ने परिवहन के अन्य तरीकों से यात्रा की। अब मुंबई आनेवाली ११ ट्रेनों के लिए उपलब्ध कराए गए आंकड़ों में से इस महीने अब तक यात्रियों की संख्या १०० प्रतिशत है। लोग वेटिंग टिकट खरीद रहे हैं।
जुलाई में पहुंच रहे हैं और लोग
मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शिवाजी सुतार ने बताया कि इन दिनों लगभग ८ लाख यात्री विभिन्न ट्रेनों से मुंबई पहुंचे हैं। इनमें से करीब ६-७ लाख यात्री यूपी, बिहार और पश्चिम बंगाल से आए हैं। जुलाई महीने में मुंबई आनेवाली ट्रेनों की फुल बुकिंग है। मुंबई में चाय की टपरी चलानेवाले कान्हाराम सिरोही ने बताया कि काम तो जब शुरू होगा, तब होगा लेकिन बच्चों के स्कूल भी यहीं हैं। अगर वो शुरू हो गए तो ट्रेनों में भीड़ बढ़ जाएगी इसलिए जल्द लौट आए।
ट्रेनों में लंबी वेटिंग लिस्ट
रेलवे से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार यू.पी. से मुंबई आनेवाली कामयनी और महानगरी एक्सप्रेस में औसतन १२०-१५० की वेटिंग लिस्ट चल रही है। हालांकि अभी वेटिंग लिस्ट के यात्रियों को यात्रा की मंजूरी नहीं है। एक अधिकारी ने बताया कि १२ अगस्त के बाद यदि बुकिंग शुरू हुई, तो यू.पी. से मुंबई आनेवाली ट्रेनों में पहले जैसी स्थिति होनेवाली है। सरकार को नियमित ट्रेनों के अलावा विशेष ट्रेनें चलानी पड़ेंगी।