" /> लॉक डाउन का पालन करें या भूखों मरें? सड़क पर उतरे सैकड़ों लोग

लॉक डाउन का पालन करें या भूखों मरें? सड़क पर उतरे सैकड़ों लोग

– खाना दो या गांव भेजो
– कोरोना के भय से भागे दानदाता
कोरोना महामारी को फैलने से रोकने के लिए 3 मई तक लॉक डाउन बढ़ा दिया गया है। मुंब्रा तथा दिवा में कोरोना पीड़ित मरीजों के पाए जाने के बाद गरीबों में खाद्यान्नों का विरतण करनेवाले ज्यादातर लोग घरों में बैठ गए हैं। लॉक डाउन के शुरुआती दिनों में खाद्यान्न वितरण का जो जज्बा और उत्साह दिख रहा था अब वो पिछले कुछ दिनों से पूरी तरह से गायब हो गया है। सैकड़ों परिवारों के सामने भुखमरी के हालात पैदा हो गए हैं। मुंब्रा के रशीद कंपाउंड स्थित श्रीलंका परिसर के लोगों को पिछले चार दिनों से खाना नहीं मिला है। उनके पास न तो पैसा है और न ही राशन। लिहाजा, मजबूर होकर सैकड़ों लोग लॉक डाउन का उल्लंघन कर सड़कों पर प्रदर्शन करने लगे हैं। सभी लोग खुद को गांव भेजने की मांग कर रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि मुंब्रा परिसर को रेड जोन घोषित किया गया है। यहां पर एक दर्जन के करीब कोरोना पॉजिटिव मरीज पाए गए हैं। स्थानीय विधायक एवं गृह निर्माण मंत्री जितेंद्र आव्हाड के कई सहायकों में कोरोना के लक्षण पाए गए। अतः उन्होंने खुद को क्वारंटाइन कर लिया है। मुंब्रा में बड़े पैमाने पर जो खाद्य सामग्री बांटी जा रही थी, वो अचानक बंद हो गई है। गरीबों के बीच खाद्यान्न सामग्री बांटनेवालों में कोरोना का भय व्याप्त हो गया है इसलिए उन्होंने अपने आपको क्वारंटाइन कर लिया है। ठीक इसी तरह की हालत दिवा के जीवदानी नगर सहित कई परिसरों की है, जहां सैकड़ों की संख्या में मजदूर वर्ग से जुड़े लोग रहते हैं। उन्हें भी अब तक स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा बना बनाया खाना मिल रहा था, पर पिछले दो दिनों से वो भी मिलना बंद हो गया है। इनके सामने भी भुखमरी के हालात पैदा हो गए हैं। लिहाजा, दिवा के लोग भी मुंब्रा की तरह कभी भी सड़कों पर उतर सकते हैं।