अब लेप्टो का लफड़ा : बारिश में भीगे हो तो ७२ घंटों में  करा लो जांच

मुंबई में जुलाई महीने के शुरुआती दो दिनों में झमाझम बारिश देखने को मिली। एक तरफ इस मूसलाधार बारिश ने शहर को पानी की समस्या से निपटने के शुभ संकेत दिए, वहीं दूसरी तरफ कई लोगों की जान लेकर मुंबई को गमगीन कर दिया। अब इस बारिश से एक और समस्या पैदा होने के संकेत मनपा ने मुंबईकरों को दिए हैं। भारी बारिश के रास्तों से गुजरने के कारण अब लोगों को लेप्टो का लफड़ा सता सकता है।
बता दें कि चूहे, कुत्ते, बिल्ली और भैंस जैसे अन्य चौपाए जानवरों के मल-मूत्र में पानी के माध्यम से संपर्क में आने के कारण लेप्टोस्पायरोसिस बीमारी का खतरा ब़ढ़ जाता है। इसलिए मनपा की कार्यकारी स्वास्थ्य अधिकारी डॉक्टर पद्मजा केसकर ने मुंबईकरों से अपील की है कि यदि वे बारिश के पानी से होकर गुजरे हैं तो उन्हें २४ से ७२ घंटों के अंदर मनपा के अस्पतालों में अपनी जांच करवा लेनी चाहिए। चौपाए जानवरों के मलमूत्र में ‘लेप्टोस्पायरा’ नामक सूक्ष्म जीव होता है, जो यह बीमारी पैâलाता है। यदि हमारे शरीर के किसी भी भाग में चोट लगी है या कोई छोटा खरोच है तो यह सूक्ष्म जीव उस भाग के माध्यम से हमारे शरीर में प्रवेश कर जाता है। ऐसे में यदि मुंबईकर बारिश के इलाकों से होकर गुजरे हैं तो घर आकर तुरंत अपने पैरों को स्वच्छ पानी से धोना चाहिए। बुखार होने पर खुद चिकित्सक न बनकर चिकित्सकों से परामर्श लेना चाहिए।
लक्षण
लेप्टो के मरीजों में कुछ सामान्य लक्षण जैसे बुखार आना, ठंड लगना, सिर दर्द, दस्त, पीलिया, पेट दर्द है। उक्त लक्षण आम बुखार जैसे ही हैं लेकिन लापरवाही न कर पीड़ित को तुरंत अस्पताल में जाकर डॉक्टर से परामर्श लेनी चाहिए। लेप्टो का इलाज संभव है, बशर्ते इसमें लापरवाही न की जाए वरना यह बीमारी घातक साबित हो सकती है।
रोकथाम व बचाव
-मुंबई में जिस प्रकार बारिश हो रही है ऐसे समय में अधिक पानीवाले क्षेत्रों में नहीं जाना चाहिए।
-शरीर पर चोट या खरोच हो तो तुरंत इलाज करवाएं।
-घर के आस-पास स्वच्छता रखें व जल-जमाव न होने दें।
-मॉनसून में ट्रेकिंग और एडवेंचर ट्रिप पर न जाएं।