" /> कोरोना ने किया श्मशान भूमि ट्रस्ट व एम्बुलेंस चालकों को परेशान : शहर प्रमुख ने की डीजल, बिजली शवदाह गृह की मांग

कोरोना ने किया श्मशान भूमि ट्रस्ट व एम्बुलेंस चालकों को परेशान : शहर प्रमुख ने की डीजल, बिजली शवदाह गृह की मांग

उल्हासनगर शहर के 5 कैंपों में 4 श्मशान भूमि है। हर रोज औसतन हर शमशान भूमि में 3 से 4 शव दाह संस्कार के लिए लाए जाते हैं। परंतु शहर में बढ़ते कोरोना के प्रकोप को देखकर शमशान ट्रस्टी व एम्बुलेंस चालक क्या श्मशान भूमि व एम्बुलेंस को सैनिटाइज करते हैं? दोनों जगहों पर सैनिटाइजर की व्यवस्था के साथ-साथ कोरोना के समान ही अन्य एड्स, क्षयरोग, टीबी के मरीजों को जलाने के उपरांत रोग न फैले इसके लिए बिजली या फिर डीजल शवदाह गृह बनाने की मांग उमपा आयुक्त को पत्र देकर उल्हासनगर के शहर प्रमुख राजेंद्र चौधरी ने की है।
उल्हासनगर में इन दिनों कोरोना पॉजिटिव से 5 लोगों की मौत हो गई है। इन 5 शवों का उल्हासनगर के अलग-अलग शवदाह गृह में दहन किया गया। लॉकडाउन के कार्यकाल में साधन न होने के कारण शव के साथ दर्जनों लोग श्मशान तक एम्बुलेंस या शववाहिनी में बैठकर जाते है। यहां चाहकर भी सोशल डिस्टेंस मेंटेन नहीं किया जा सकता। कोरोना महामारी की बीमारी को देखते हुए शमशान भूमि ट्रस्ट और एम्बुलेंस, शव वाहिनी के संचालकों को इन्हें सेनिटाइज करवाना चाहिए। पर शायद ही वे इसे सेनिटाइज करते होगे? उल्हासनगर की चारों शमशान भूमि और उमपा का ‘स्वर्ग रथ’, ‘जनाजा’ जो शव को ले जाती है, उसे    प्रतिदिन नियम से सेनिटाइज करना चाहिए। इतना ही नहीं, शव यात्रा में आए लोगों के लिए भी सेनिटाइजर की व्यवस्था शमशान में ट्रस्ट करें। ऐसा न करने से सामान्य निरोगी लोग कोरोना का प्रसार कर सकते हैं। शहर में कोरोना के अलावा अन्य संक्रमण से फैलनेवाले रोगों के प्रसार पर लगाम लगाने के लिए उल्हासनगर के 4 शमशान भूमि में डीजल, बिजली के शवदाह गृह बनाने के लिए लिखित निवेदन उमपा के पूर्व आयुक्त सुधाकर देशमुख को तबादले के एक दिन पूर्व ही दी है। आयुक्त को दिए गए निवेदन के प्रति पालकमंत्री एकनाथ शिंदे व सांसद डॉक्टर श्रीकांत शिंदे को भी दी है।