" /> यादों के झरोखों से : ‘यूं हमारी याद आएगी…’

यादों के झरोखों से : ‘यूं हमारी याद आएगी…’

१९४३ में जब लता मंगेशकर ने अपना करियर मराठी फिल्मों से आरंभ किया था तो वे मात्र १३ वर्ष की थीं। १९४५ से उन्होंने हिंदी फिल्मों में गाना आरंभ किया। संगीतकार गुलाम हैदर ने ‘महबूब प्रोडक्शंस’ की फिल्म ‘हुमायूं’ के लिए लताजी की आवाज में एक गाना रिकॉर्ड किया। गुलाम हैदर लताजी के उस गाने का रिकॉर्ड लेकर जोहराबाई अंबालेवाली के घर पहुंचे। उस जमाने में जोहराबाई का बड़ा नाम था। जोहराबाई ने लताजी का वो गीत ग्रामोफोन पर सुना और अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए बोलीं- ‘ये तो किसी बच्ची की आवाज लगती है। सुर में गा रही है बहुत नाम कमाएगी!’ इस घटना के कुछ ही वर्षों बाद ‘सुर साम्राज्ञी’ लता मंगेशकर फिल्माकाश में ऐसा चमकीं कि हिंदुस्थान ही नहीं, विश्वभर में लोकप्रिय हो गर्इं।
लताजी का जीवन एक निष्कलंक, सम्मानपूर्ण और गरिमामयी नारी का रहा है। ७० वर्षों से अधिक लंबी पारी खेलनेवाली लताजी से अनगिनत घटनाएं और यादें जुड़ी हुई हैं। एक ऐसी ही घटना फिल्म ‘हमारी याद आएगी’ को लेकर है, जब लताजी ने अपने ड्राइवर के सम्मान के लिए गीत नहीं गाया और रिकॉर्डिंग रूम छोड़कर घर चली गर्इं। १९६१ में प्रसिद्ध निर्माता-निर्देशक केदार शर्मा अपने बेटे अशोक शर्मा और तनूजा को लेकर फिल्म ‘हमारी याद आएगी’ का निर्माण कर रहे थे। फिल्म का शीर्षक गीत ‘कभी तनहाइयों में यूं हमारी याद आएगी…’ गीत लता मंगेशकर को गाना था। संगीतकार स्नेहल भाटकर गाने की रिहर्सल भी कर चुके थे और गाने का फाइनल टेक रिकॉर्ड शुरू होनेवाला था, तभी लताजी के ड्राइवर ने केदार शर्मा से पेट्रोल और लंच मनी के २४० रुपए मांगे। ये सुनते ही केदार शर्मा ने कहा कि उनकी कंपनी में इस तरह पेट्रोल और लंच मनी देने की कोई व्यवस्था नहीं है। लताजी को जब उनके ड्राइवर ने ये बात बताई तो उन्होंने संगीतकार भाटकर से कहा कि उनका गला आज ठीक नहीं है रिकॉर्डिंग दो दिन बाद रख लें। दो दिनों बाद रिकॉर्डंग रखी गई और दोबारा इस घटना की पुनरावृत्ति हुई। ड्राइवर ने केदार शर्मा से पेट्रोल और लंच मनी के २४० रुपए मांगे। ड्राइवर की बात सुन केदार शर्मा भड़क गए तब भाटकर ने केदार शर्मा से कहा कि उनकी पेमेंट से राशि काटकर ड्राइवर को दे दें और बात को समाप्त करें। लेकिन केदार शर्मा नहीं माने और सारी कहानी लताजी तक पहुंची। लता जी को लगा कि ये उनके ड्राइवर का ही नहीं उनका भी अपमान है। लताजी ने अपनी कार मंगवाई और गाना रिकॉर्ड किए बिना घर चली गर्इं। केदार शर्मा समझ गए थे कि अब लता मंगेशकर उनका गाना नहीं गाएंगी इसलिए दूसरी गायिका की खोज आरंभ हुई और मुबारक बेगम का नाम सामने आया। खैर, मुबारक बेगम की आवाज में फिल्म का शीर्षक गीत रिकॉर्ड किया गया। ‘हमारी याद आएगी’ भले ही असफल हो गई लेकिन फिल्म का गीत बेहद लोकप्रिय हुआ।
एक गायिका के रूप में लताजी ने अपनी गरिमा और स्तर को सदैव बनाए रखा। संगीत की दुनिया के लोग बताते हैं कि वे गीत के एक-एक शब्द और वाक्य को लेकर इतनी गंभीर रहती हैं कि कोई भी शब्द या वाक्य उन्हें स्तरहीन अथवा अश्लील लगता तो तुरंत गीत के लेखक से उसे कटवाकर बदलवा देतीं। कई बार ऐसा हुआ जब लताजी ने गीत को गाने से ही इंकार कर दिया क्योंकि उन्हें महसूस हुआ कि गीत उनके स्तर का नहीं है। नए गायकों और प्रतिभाशाली संगीतकारों के प्रति लताजी सदैव सहयोगी और उदार रही हैं। फिल्मी समारोहों और पार्टियों में जाने से लताजी को हमेशा आपत्ति रही है, जिसमें मदिरापान किया जा रहा हो। सुपर वैâसेट्स कंपनी के गुलशन कुमार लताजी को कंपनी की पहली वार्षिक पार्टी में मुश्किल से आने के लिए मनाया था। जब वे पार्टी में पहुंचीं और उन्होंने लोगों के हाथ में शराब का गिलास देखा तो वे प्रवेश द्वार से ही पलटीं और सीधे अपने घर वापस लौट गर्इं।