पानी की तलाश तेंदुए उतरे बस्तियों में

मुंबई-अमदाबाद राष्ट्रीय महामार्ग से पूर्व संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान की तलहटी में डाचकुल पाड़ा, माशाचा पाड़ा, मस्कर पाड़ा, मांडवी पाड़ा, बाभलीचा भाट आदि आदिवासी गांव सदियों से बसे हुए हैं। वर्तमान में इस परिसर में भूमाफिया तेजी से सक्रिय हैं। वन विभाग की जमीनों पर अतिक्रमण, आदिवासियों की जमीनों पर तेजी से लोक बस्ती बसाई जा रही है। इस परिसर में अक्सर रात के समय तेंदुओं को विचरण करते देखा जाता है। पूर्व में कई हिंसक झड़प भी इन तेंदुओं से स्थानीय निवासियों की हो चुकी है। ये तेंदुए खाने व पानी की तलाश में बस्तियों में घुसते हैं।
हाल ही में पुन: इन परिसरों में रात को तेंदुओं को विचरण करते देखा गया। स्थानीय निवासी सचिन जांभले ने संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान वन विभाग के अधिकारी राजेंद्र पवार को इसकी जानकारी दी। पवार ने शीघ्र इस पर संज्ञान लेते हुए रविवार को इन आदिवासी पाड़ों में वन विभाग के कर्मचारियों को भेजा। जिन्होंने तेंदुओं से किस प्रकार बचाव करें, तेंदुए मानव बस्ती में क्यों आते हैं, तेंदुओं और मनुष्य के बीच संघर्ष कैसे टाला जा सकता है, स्वच्छता का महत्व, तेंदुए दिखाई देने पर क्या करें, उनसे बचाव के उपाय आदि विषयों पर अपना मार्गदर्शन देकर जनजागृति अभियान चलाया।
इस अवसर पर वन विभाग के चव्हाण, सोनवणे, रेस्क्यू टीम के राजेंद्र भोईर, वैभव पाटील, दिनेश गुप्ता के अलावा संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान संगठन के पदाधिकारी और आदिवासी पाड़ों के स्थानीय निवासी बड़ी संख्या में उपस्थित थे।