" /> प्रधान मंत्री से मदत की गुहार : इंग्लैंड में फंसे छात्रों को नहीं मिल रही है दवाइयां एवं अन्य सुविधा

प्रधान मंत्री से मदत की गुहार : इंग्लैंड में फंसे छात्रों को नहीं मिल रही है दवाइयां एवं अन्य सुविधा

विश्व के अन्य देशों की भांति वैश्विक महामारी कोरोना से इंग्लैंड (यूके) भी परेशान है। इसका असर यह हुआ है कि शिक्षा ग्रहण करने के लिए हिंदुस्थान से ब्रिटेन गए सैकड़ो विद्यार्थी इन दिनों दवाइयों एवं अन्य सुविधाओं के लिए मोहताज हो रहे हैं। इस वजह से 425 छात्रों ने भारतीय दूतावास से संपर्क किया है और जल्द से जल्द स्वदेश भेजने की गुहार लगाई है। इसका खुलासा उस समय हुआ जब विशाल यादव नामक एक छात्र ने दवाइयां न मिल पाने की जानकारी अपने पिता शशि यादव को दी। शशि यादव ने देश के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी, विदेश मंत्री, राज्य के मुख्य मंत्री, ठाणे के पालक मंत्री ,स्थानीय सांसद तथा विधायको को पत्र भेजकर एक शिकायत दर्ज कराई है। पत्र के जरिए उन्होंने मांग की है कि उनके बीमार बेटे सहित अन्य छात्रों को सभी सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाय या फिर उन्हें एअर लिफ्ट कराके सुरक्षित देश लाया जाए।

घोडबंदर रोड स्थित विजय गार्डन निवासी एवं शिवसैनिक शशि यादव का बेटा विशाल यादव इंग्लैंड के 92 डीन रोड़ स्थित साउथ शील्ड में रहकर नॉटिकल साइंस की पढ़ाई कर रहा है। पिछले 10 से 15 दिनों से वह चर्म रोग से पीड़ित है। दवा लेने के लिए विशाल जब मेडिकल की दुकान पर गए तो बिना रजिस्ट्रेशन औऱ डॉक्टर की सलाह के उसे दवा देने से इंकार कर दिया। विशाल ने एक डॉक्टर से संपर्क कर अप्वाइंटमेंट लेने की कोशिश की लेकिन डॉक्टर ने लोकल बाड़ी में रजिस्ट्रेशन के बिना अप्वाइंटमेंट देने से मना कर दिया। यह जानकारी जब शशि यादव को मिली तो उन्होंने यहां से दवाएं भेजने का प्रयास किया पर लॉक डाउन में कूरियर सर्विस बंद होने की वजह से वे दवाएं नही भेज सके हैं। कोरोना की महामारी से जूझ रहे इंग्लैंड में शिक्षा ग्रहण कर रहे हिंदुस्थान के ऐसे 425 छात्रों ने भारतीय दूतावास में ऑन लाइन रजिस्ट्रेशन कराया है और विभिन्न तरह की मुसीबतों में फंसे होने की जानकारी देकर स्वदेश भेजने की गुहार लगाई है। शशि यादव ने प्रधान मंत्री से लेकर ठाणे जिला अधिकारियों तक और राज्य के मुख्य मंत्री से लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों तक को मेल के माध्यम से एक पत्र भेजा है, जिसमें सभी छात्रों को आवश्यक सुविधा उपलब्ध कराने या उन्हें एयर लिफ्ट कर स्वदेश लाने की मांग की है।