" /> नए ग्रह पर जीवन संभव!…ब्रह्मांड में हो सकते हैं धरती जैसे अनेकों ग्रह

नए ग्रह पर जीवन संभव!…ब्रह्मांड में हो सकते हैं धरती जैसे अनेकों ग्रह

हाल में वैज्ञानिकों को प्रॉक्सिमा सेंटॉरी नामक तारे पर एक तेज रोशनी दिखाई दी है और इस घटना के बाद से खगोलवेत्ताओं की दिलचस्पी इसमें फिर से बढ़ गई है। इस रहस्यमई रोशनी के सिग्नल की प्रâीक्वेंसी ९८२ मेगाहर्ट्ज है, जिसे ब्रेकथ्रू लिसेन कैंडीडेट-१ (बीएलसी-१) नाम दिया गया है। वैज्ञानिकों का मानना है कि ऐसे सिग्नल न तो किसी मानव निर्मित अंतरिक्ष यान और न ही किसी उपग्रह से भेजे जा सकते हैं। इसके अतिरिक्त किसी प्राकृतिक खगोलीय घटना से भी ऐसे सिग्नल पैदा नहीं हो सकते। वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया है कि इस तरह के रेडियो सिग्नल के पैदा होने की वजह किसी एलियन तकनीक का होना है, जो काफी विकसित है और अंतरिक्ष में कहीं मौजूद है। कयास लगाए जा रहे हैं कि इस तारे के ग्रह में जीवन के संकेत मिल सकते हैं। महान भौतिक शास्त्री स्टीफन हॉकिंग ने अपने अध्ययन और शोध के जरिये यह संभावना जताई थी कि कई प्रकाश वर्ष दूर हमारे इस विशाल ब्रह्मांड में धरती जैसे अनेकों ग्रह हो सकते हैं, जिन पर जीवन की संभावना की उम्मीद की जा सकती है। अब अनुसंधानकर्ताओं ने प्रॉक्सिमा बी नामक पृथ्वी जैसे एक नए ग्रह के अस्तित्व की पुष्टि की है। अत्याधुनिक खगोलीय उपकरणों के माध्यम से पता चला है कि पृथ्वी जैसा यह ग्रह हमारे सौरमंडल के सबसे निकट के तारे प्रॉक्सिमा सेंटॉरी की परिक्रमा कर रहा है। प्रॉक्सिमा सेंटॉरी सूर्य से ४.२ प्रकाश वर्ष की दूरी पर मौजूद है। प्रॉक्सिमा बी उन दो ग्रहों में से एक है जो इस तारे के चारों ओर परिक्रमा करते हैं। इसका आकार धरती के मुकाबले १.२ गुना है और यह तारे की परिक्रमा केवल ११ दिनों में कर लेता है। प्रॉक्सिमा बी प्रॉक्सिमा सेंटॉरी के गोल्डीलॉक क्षेत्र में पड़ता है। जैसे पृथ्वी सूर्य के गोल्डीलॉक क्षेत्र में आती है। गोल्डीलॉक क्षेत्र किसी तारे के चारों ओर का वह क्षेत्र होता है जो न तो ज्यादा ठंडा होता है और न ही ज्यादा गर्म। इसमें पड़ने वाले ग्रहों में पानी आसानी से रह सकता है।