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लॉकडाउन में टनाटन हो रही लाइफलाइन

लोकल ट्रेन मुंबई की लाइफलाइन मानी जाती है। मुंबई में रेलवे प्रत्येक संडे ‘मेगा  ब्लॉक’ लेकर मुंबई के रेल इंप्रâास्ट्रक्चर के बुनियादी ढांचों को मजबूत करती है परंतु मुंबई की रेल लाइन भारतीय रेल में सबसे व्यस्त रेल लाइन होने के कारण मुंबई के रेल इंप्रâा को ठीक तरह से दुरुस्त करने में पर्याप्त समय नहीं मिल पाता, जिससे ब्लॉक लेने के बाद भी अगले सप्ताह में कहीं न कहीं लोकल सेवाएं सिग्नल खराब होने, ओवरहेड वायर टूटने या फिर पटरी में दरार पड़ने के कारण चरमरा जाती हैं। ऐसे में ब्लॉक में हुए सारे काम फेल हो जाने पर रेलवे के सारे किए कराए पर पानी फिर जाता है परंतु अब कोरोना वायरस महामारी के दौरान जारी लॉकडाउन का रेलवे जमकर फायदा उठा रही है। लोकल सेवाएं आम लोगों के लिए बंद है और चुनिंदा स्पेशल ट्रेनें चलाई जा रही हैं, जिससे मुंबई के रेल इंप्रâा को दुरुस्त करने का रेलवे को अधिक समय मिल रहा है और लॉकडाउन पीरियड में मुंबई रेलवे का इंप्रâास्ट्रक्चर टनाटन होता हुआ दिखाई दे रहा है।
बिछ रही नई ‘रेल’
मुंबई के उपनगरीय रेल मार्ग पर रोजाना ३,००० से अधिक लोकल सेवाओं का परिचालन होता है। ऐसे में सबसे अधिक लोकल ट्रेनों का भार पटरियों पर आता है। कई मार्गों पर पटरियां अधिक पुरानी हो जाने के बाद जवाब देने लगती हैं और दरार पड़ने के कारण इसका असर लोकल सेवाओं के परिचालन पर पड़ता है। ऐसे में मध्य रेलवे इन दिनों पटरियों को दुरुस्त करने के साथ ही कई मार्गों पर नई रेल पटरियां बिछा रही है।
फास्ट लाइन होगी फास्ट
पारसिक टनल के पास फास्ट लाइन पर पुरानी रेल पटरी बदलकर उसकी जगह पर मध्य रेलवे ने २.६ किमी की नई रेल बिछाई है। ये रेल पटरियां फास्ट लाइन पर बिछाई गई हैं। इसी तरह भांडुप और मुलुंड के बीच १.५४ किमी नई रेल पटरी भी बिछाई गई है। नई रेल पटरियां बिछने से आनेवाले दिनों में लोकल फास्ट लाइन पर और भी फास्ट दौड़ती हुई दिखाई देंगी।
१२८ स्लीपर चेंज
रेल की पटरियां सीमेंट के जिस पिलर पर बिछाई जाती हैं, उसे स्लीपर कहते हैं। लोकल ट्रेन और रेल पटरियों के भार को ये स्लीपर ही संभालता है। यदि ट्रेन परिचालन के दौरान स्लीपर टूट जाता है तो बड़ा रेल हादसे हो सकता है। ऐसे में रेलवे रेल पटरियों को बदलने के अलावा स्पीपर को भी बदल रही है।अब तक मध्य रेलवे ने पारसिक टनल के पास २८ और भांडुप और मुलुंड के बीच १०० स्लीपर ऐसे कुल मिलकर १२८ स्लीपर बदले हैं।
ओएचई की ओवरहोलिंग
मध्य रेलवे मेन लाइन के कुछ सेक्शन में २५० मीटर तक कि लंबाई के कॉन्टैक्ट वायर हटाया गया है। इसके अलावा १ अवशेष और ४ कमजोर पॉइंट हटाये गए। लगभग एक किमी के ओएचई का सालभर का ओवरहोलिंग किया गया है। इसी तरह वैगनों की मदद से ओएचई की १.३ किमी लंबाई और ३ ओवर लैपिंग की सालाना वार्षिक ओवरहोलिंग की है। इसके अलावा ओएचई को भी दुरुस्त किया गया है।
इंजीनियरिंग वर्कस
पारसिक टनल के पास १.४ किमी सादे ट्रैक की गिट्टी की टैंपिंग भी की गई। रेलों को जोड़ने के लिए १६ स्थानों पर एल्युमिनो-थर्मिक वेल्डिंग भी किया गया था। जेसीबी मशीन और २,००० मक बैगों को हार्बर लाइन पर मैन्युअल रूप से इंजीनियरिंग योद्धाओं द्वारा लोड किए मक के ६ वैगनों को हटा दिया गया।
एस एंड टी वर्क्स
दूरसंचार योद्धाओं द्वारा दिवा और दतिवली कॉर्ड लाइन में इंजीनियरिंग कार्यों के साथ २.६ किलोमीटर ट्रैक की लंबाई पर डूमेटिक मशीन पैकिंग, ट्रैक लीड तारों को बदलने और २ सेट पॉइंट और और एक्सल काउंटरों का पुन: संयोजन सिग्बल का काम किया गया।