" /> लॉक डाउन से मुंबई रेल को 1000 करोड़ से अधिक का नुकसान

लॉक डाउन से मुंबई रेल को 1000 करोड़ से अधिक का नुकसान

घाटे में चल रही भारतीय रेल पहले से ही आर्थिक तंगी से गुजर रही थी। इस तंगी से उबरने के लिए रेलवे ने कई तरकीबों को अमल में लाया ताकि कुछ हद तक रेलवे को इस तंगी से बाहर निकाला जा सके परंतु कोरोना वायरस के कारण लॉक डाउन लागू होने के बाद रेल सेवाएं रद्द होने से रेलवे की हालत और भी पतली होती हुई दिखाई दे रही है। रेलवे से प्राप्त आंकड़ो को देखें तो लॉक डाउन के कारण रेल सेवाएं ठप होने से मुंबई रेलवे को अब तक 1 हजार करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ है। जबकि भारतीय रेलवे को लॉक डाउन अवधि के दौरान 15 से 20 हजार करोड़ का नुकसान सिर्फ पैसेंजर ट्रेनों का परिचालन न होने से हुआ है।
रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार लॉक डाउन के कारण लोकल और मेल एक्सप्रेस ट्रेनों का परिचालन ठप होने से रेलवे को आर्थिक रूप से लंबी चपत लगी हैं। पश्चिम रेलवे को इस लॉक डाउन अवधि में उपनगरीय और गैर उपनगरीय ट्रेनों का परिचालन ठप होने से 530.95 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है।इस नुकसान के आंकड़ों में पश्चिम रेलवे को मार्च महीने में 207.11 करोड़ की कमाई कम हुई है जबकि 1 अप्रैल से 22 अप्रैल तक 323.84 करोड़ रुपए का आर्थिक नुकसान हुआ है। इसी तरह मध्य रेलवे को मार्च महीने में 198.09 करोड़ रुपए की कमाई हुई है जबकि साल 2019 मार्च महीने में यह कमाई 482.01 करोड़ की हुई थी। यदि पिछले साल के मुकाबले मार्च 2020 में मध्य रेलवे की यात्री कमाई में 58.09 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है।
मध्य रेलवे में रोजाना 1774 लोकल ट्रेनें, 80 मेल एक्सप्रेस ट्रेन और 20 मालगाड़ी का परिचालन होता हैं। ऐसे में मध्य रेलवे मुंबई डिवीजन को रोजाना 14 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है। इनमें से दो करोड़ 46 लाख रुपए लोकल ट्रेन, 6 करोड़ 44 लाख रुपए मेल एक्सप्रेस ट्रेन और 5 करोड़ 11 लाख रुपए की आमदनी मालगाड़ी के परिचालन से होती है लेकिन अब लॉक डाउन के चलते 20 के बजाए रोजाना 4 से 5 मालगाड़ी का परिचालन हो रहा है।
इसी तरह पश्चिम रेलवे में रोजाना 1367 लोकल ट्रेन, 38 मेल एक्सप्रेस ट्रेन और 29 मालगाड़ी का परिचालन होता है। पश्चिम रेलवे मुंबई डिवीजन को रोजाना 8 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है, जिसमे लोकल परिचालन न होने से रोजाना 2.5 करोड़, मेल एक्सप्रेस से 5.5 करोड़ रुपए का नुकसान का समावेश है।