" /> भिवंडी में कैसे घुसा कोरोना?

भिवंडी में कैसे घुसा कोरोना?

◼️सुरक्षा व्यवस्था व नाकाबंदी पर जनता ने उठाया सवाल
◼️शहर में मिले सभी मरीजों का दूसरे शहरों से हुआ आवागमन
◼️सोशल डिस्टेंसिंग की शहर में उड़ रही धज्जियां, प्रशासन मूक
कोरोना को लेकर भिवंडी में किए गए सुरक्षा उपाय की पोल खुल गई है। शहर में फिलहाल दस कोरोना मरीज पाए गए हैं। सभी मरीज बाहर से आए हैं। मनपा की सीमा सील होने व कड़ा पहरा होने के बावजूद उक्त मरीज शहर में कैसे घुसे, इस पर सवालिया निशान लग गया है? बढ़ते कोरोना संक्रमण को लेकर जनता में भय बढ़ता जा रहा है।
सूत्रों की मानें तो भिवंडी मनपा ने अपनी चारों तरफ की सीमाएं सील कर दी हैं। बावजूद इसके शहर में कोविड-19 संक्रमित व्यक्ति मुंबई, मुंब्रा, दहिसर, सायन, मालेगांव आदि शहरों से आकर शहर को भी कोरोना संक्रमित कर दिया है। भिवंडी शहर में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या फिलहाल दस है, जिसमें बंगालपुरा, कणेरी, बेतालपाडा, अवचित पाडा, चव्हाण कालोनी, मानसरोवर, तांडेल मोहल्ला का समावेश है। इन क्षेत्रों में दो-चार बांस-बल्ली के सहारे गलियों को सील तो कर दिया गया है किंतु मनपा कर्मचारी सील किए गए मोहल्ले की रखवाली करने के लिए जहमत नहीं उठाते हैं। लावारिस बांस-बल्ली को तोड़कर स्थानीय निवासी अपनी मोटरसाइकिल दौड़ाते या फिर पैदल भ्रमण करते देखे जा सकते हैं।
पुलिस प्रशासन भी कम जिम्मेदार नहीं
भिवंडी पुलिस भी कोविड-19 मरीजों को रोकने में असमर्थ साबित हुई है। शहर के हर मुख्य रास्ते पर नाकाबंदी कर खुद का ढिंढोरा पिटवानेवाली पुलिस सुबह तो उठक-बैठक करवाती है किंतु नाकाबंदी पर तैनात कर्मचारी दोपहर 12 बजे के बाद शाम 5 तक फेसबुक, व्हॉट्सऐप, पबजी गेम जैसे सोशल मीडिया पर समय बिताते देखे जा सकते हैं, वहीं पर रात 9 बजे के बाद नाकाबंदी भी वीरान बन जाती है।
नाकाबंदी पर मनपा कर्मचारियों की उपस्थिति नहीं होने के कारण फैला कोरोना
भिवंडी पुलिस ने 16 मुख्य रास्तों पर 16 पुलिस अधिकारियों सहित भारी संख्या में पुलिस बल व एसआरपीएफ की टीम तैनात कर रखी है। इसके साथ ही वाहन चालकों पर यातायात अधिनियम के तहत कार्रवाई करने के लिए ट्रैफिक पुलिस कर्मचारियों को भी  तैनात किया गया है किंतु मनपा के स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी क्यों नहीं तैनात किए गए? इस प्रकार का सवाल स्थानीय समाजसेवी संस्थाओं द्वारा उठाया जा रहा है। हर नाकाबंदी में मनपा के स्वास्थ विभाग का कर्मचारी स्कीन जांच कर नागरिकों को शहर में प्रवेश करने की अनुमति देते तो आज शहर में कोविड-19 का एक भी संक्रमित मरीज नहीं पाया जाता। पालिका प्रशासन में लगभग 4 हजार कर्मचारी कार्यरत हैं, वहीं पर मनपा के स्वास्थ्य विभाग में सैकड़ों कर्मचारी प्राइवेट स्तर पर काम कर रहे हैं फिर भी स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों की नियुक्ति नाकाबंदी पर नहीं होने के कारण शहर में कोवि़ड-19 से संक्रमित मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है। मनपा प्रशासन संक्रमित क्षेत्रों में सैकड़ों कर्मचारी भेजकर नागरिकों की जांच करवा सकता है तो क्या नाकाबंदी पर चंद लोग जो बाहर से आते हैं, उनकी जांच क्यों नहीं करवा सकता। इस प्रकार का आरोप कई सामाजिक संस्थाओं ने पालिका प्रशासन पर लगाया है।