" /> ट्रेन चली तो स्टेशनों पर इकट्ठा हो सकती है 5 लाख से अधिक की भीड़ : पश्चिम रेलवे कर रही है सर्वे

ट्रेन चली तो स्टेशनों पर इकट्ठा हो सकती है 5 लाख से अधिक की भीड़ : पश्चिम रेलवे कर रही है सर्वे

मुंबई सेंट्रल टर्मिनस- 60 हजार यात्री
बांद्रा टर्मिनस – 2 लाख यात्री
बोरीवली- 2.5 लाख यात्री
वलसाड- 1 लाख यात्री
सूरत/उधना- 4 लाख यात्री
कोरोना संक्रमण के चलते पूरे देश में लॉक डाउन की अवधि 3 मई तक बढ़ा दी गई है। लॉक डाउन बढ़ने से मुंबई में रह रहे मजदूर वर्गों की लालसा दिन ब दिन अपने घर जाने के लिए बढ़ती जा रही है। इसका साफ उदाहरण कल बांद्रा स्टेशन के बाहर अचानक इकट्ठा हुई भीड़ के रूप में देखने को मिला। 3 मई के बाद ट्रेन शुरू होगी या नही इस पर अभी निर्णय रेल मंत्रालय की ओर से नही लिया गया है। ऐसे में पश्चिम रेलवे आरपीएफ एक सर्वे करने में लगी है। सर्वे ये की यदि ट्रेन चली तो रेलवे स्टेशनों पर कितना भीड़ इकट्ठा होगी। सर्वे के अनुसार ट्रेन चलने पर मुंबई सेंट्रल टर्मिनस, बोरिवली और बांद्रा टर्मिनस पर कुल मिलाकर 5 लाख से अधिक भीड़ इकट्ठा हो सकती है। माना जा रहा है कि बिना तैयारी के ट्रेनों का परिचालन शुरू करने पर रेलवे के लिए भीड़ नियंत्रित करना एक बड़ी चुनौती होगी।

बता दें कि पश्चिम रेलवे के मुंबई सेंट्रल टर्मिनस और बांद्रा टर्मिनस से ट्रेनों के परिचालन की शुरुआत होती है। सर्वे के मुताबिक यदि पश्चिम रेलवे के मुंबई सेंट्रल टर्मिनस से ट्रेन का परिचालन शुरू होता है तो यहां 60 से 70 हजार लोगों की भीड़ इकट्ठा हो सकती है।जबकि बांद्रा टर्मिनस पर 2 लाख लोग और बोरीवली स्टेशन पर ढाई लाख के करीब भीड़ इकट्ठा हो सकती हैं। इसी तरह वलसाड में एक लाख लोग और सूरत / उधना में करीब 4 लाख लोग इक्कठा हो सकते हैं। ट्रेन चलने से पहले भीड़ नियंत्रण को लेकर पश्चिम रेलवे आरपीएफ द्वारा स्टेशन पर माइग्रेट को लेकर जो सर्वे किया जा रहा है उसके मुताबिक यहाँ शहर में रह रहे उत्तर भारतीयों के अनुसार चार से पांच लाख लोगों के माइग्रेट होने की पूरी संभावना है। ये कम से कम यात्री होंगे, जो माइग्रेट होंगे जिससे स्टेशन पर भारी भीड़ उमड़ सकती है। यह सर्वे रिपोर्ट आरपीएफ उच्चा अधिकारीयों को दी जाएगी जिसके बाद इन्हे कंट्रोल करने को लेकर क्या उपाय और कितने अतिरिक्त बल लगेंगे इस पर विचार विमर्श कर सुरक्षा बल जुटाने की तैयारी की जाएगी। अभी रेलवे ने ट्रेनों के चलाने की फिलहाल कोई निंर्णय नहीं लिया है और न ही कोई तिथि जारी की है। लेकिन रेलवे तमाम पहलुओं पर लगातार विचार कर रही है कि सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कैसे की जाए और भीड़ पर कैसे नियंत्रण किया जाएगा। एक वरिष्ठ रेल अधिकारी ने बताया कि सोशल डिस्टेंस के लिए कई सुझाव है, जिसमे जनरल कोच ट्रेनों में नहीं होंगे। केवल रिजर्वेशन कोच ही ट्रेनों में होंगे। ट्रेन में जितने सीट होंगे उतने ही यात्री सफर कर पाएंगे। वेटिंग यात्री पर नियंत्रण रखा जाएगा। साथ ही यात्रियों की थर्मल स्क्रीनिंग होगी। अगर ट्रेनें चली तो इनका पालन अगले 30 जून तक इसी तरह से किया जाएगा।