" /> लॉकडाउन में लाउडस्पीकर से पढ़ा रहे ‘स्पीकर गुरु!’,जव्हार-मोखाड़ा में आदिवासी बच्चों के लिए अनोखा अभियान

लॉकडाउन में लाउडस्पीकर से पढ़ा रहे ‘स्पीकर गुरु!’,जव्हार-मोखाड़ा में आदिवासी बच्चों के लिए अनोखा अभियान

शादियों में बजने वाला स्पींकर जो पिछ.ले छह महीनों से बंद पड़ा था अब वो गरीब बच्चों की पढ़ाई में काम आ रहा है। ऐसा ही एक नजारा जिले के मोखाड़ा-जव्हार के आदिवासी इलाके में देखने को मिला है। जहां गांव के बच्चों को स्मार्टफोन और इंटरनेट सुविधा के अभाव में लाउडस्पीकर के माध्यम से गांव में घुमाकर बेसिक शिक्षा का ज्ञान देने की मुहिम चलाई जा रही है।

कोरोना महामारी की वजह से अब जहां पढ़ाई ऑनलाइन की जा रही है तो वहीं ऐसे कई गरीब बच्चे हैं, जो स्मार्टफोन नहीं होने की वजह से पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं। इन बच्चों की पढ़ाई के लिए अब कुछ लोगों ने एक नया तरीका निकाला है। लाउडस्पीकर की मदद से इन बच्चों को पढ़ाया जा रहा है। पालघर के जव्हार, मोखाड़ा गांव में प्रतिदिन सैकड़ों बच्चों को कुछ इस तरह से बाइक पर लाउडस्पीकर लगाकर पढ़ाया जा रहा है। गांव वाले उन्हें ‘स्पीकर टीचर’ या ‘स्पीकर गुरु’ कह रहे हैं और इसकी वजह से उनकी पढ़ाई पूरी हो पा रही है।

८वीं कक्षा के छात्र ओंकार ने बताया कि लॉकडाउन की शुरुआत में हम ऐसे ही घर पर रहते थे। कोई पढ़ाई नहीं करते थे लेकिन एक दिन ‘स्पीकर गुरु’ गांव में आए, वो हमें कविताएं, अंग्रेजी, ग्रामर सब कुछ सिखाने लगे। ५वीं कक्षा में पढ़ने वाली ज्योति ने बताया कि कोरोना के बाद से स्कूल बंद है और अब एक नए तरीके से स्कूल की शुरुआत हुई है। हर रोज सुबह ८ बजे हम स्पीकर से पढ़ाई करते हैं।

दिगंता स्वराज फाउंडेशन के डायरेक्टर राहुल टिवरेकर ने बताया कि यहां सभी गरीब परिवार के लोग मौजूद हैं। कई लोगों की पहली पीढ़ी है, जो पढ़ाई कर रहे हैं और उन्हें इतनी मदद भी नहीं मिल पाती क्योंकि परिवार वाले खेती या मजदूरी में व्यस्त होते हैं। ऐसे में इन स्पीकर से बच्चों की मदद हो पा रही है। हर रोज बच्चों को जो पढ़ाया जाना है, उसे पहले इस स्पीकर पर रिकॉर्ड किया जाता है, उसके बाद इस स्पीकर को अलग-अलग गांवों में ले जाया जाता है और सैकड़ों बच्चों को इसका फायदा होता नजर आ रहा है।