" /> करोड़ों खर्च फिर भी बदहाल लखनऊ!…17 वर्षों में 2,100 करोड़ रुपए खर्च

करोड़ों खर्च फिर भी बदहाल लखनऊ!…17 वर्षों में 2,100 करोड़ रुपए खर्च

राज्य सरकार ने जलजमाव से होने वाली परेशानियों और नालियों की समस्या से मुक्ति के लिए सीवरेज ड्रेनेज योजना पर करोड़ों रुपए फूंक दिए गए, लेकिन राजधानी  लखनऊ की जनता आज भी सड़कों पर फैलते पानी पर चलने के लिए मजबूर है। राजधानी में चल रहा सीवरेज ड्रेनेज कार्य कब पूरा होगा इसकी जवाबदेही से नगर निगम से लेकर जिला प्रशासन तक पल्ले झाड़ चुका है।

17 साल में शहर के सीवरेज और ड्रेनेज सिस्टम पर करीब 2,100 करोड़ रुपए खर्च हुए। जेएनएनयूआरएम योजना से शहर में जहां नाले दुरुस्त कराए गए, वहीं सीवरेज सिस्टम पर भी करीब 500 करोड खर्च किए गए। एलडीए नगर निगम अब तक विभिन्न योजनाओं से 2,100 करोड़ रुपए खर्च कर चुका है। लेकिन इसका शहर को कोई फायदा नहीं मिला है। गुरुवार को हुई बारिश ने सवाल खड़ा किए कि आखिर पैसा कहां गया?

राजधानी में सीवरेज और ड्रेनेज सिस्टम को दुरुस्त कराने के लिए कई योजनाएं शुरू हुईं। नगर निगम, एलडीए, जल संस्थान, जल निगम सभी ने अपने स्तर से इस पर काम किया। केंद्र सरकार की कई योजनाओं से भी पिछले कुछ वर्षों में सीवरेज और ड्रेनेज सिस्टम पर करोड़ों हुए। हिंदुस्थान की पड़ताल में पता चला कि पिछले 17 वर्षों में सीवरेज सिस्टम पर 1,300 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं जबकि ड्रेनेज सिस्टम पर नगर निगम, जल निगम व एलडीए ने करीब 800 करोड़ खर्च किए हैं। ड्रेनेज पर अकेले नगर निगम ने केवल जेएनएनयूआरएम योजना से 425 करोड़ खर्च किए हैं। स्मार्ट सिटी योजना के तहत भी सीवर व ड्रेनेज पर पैसा खर्च किया जा रहा है।

ये किया गया

352 किलोमीटर नाली जेएनएनयूआरएम योजना से बनायी गई थी। 410 किलोमीटर सीवर लाइन भी डाली गई थी। 164 करोड़ स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत सीवर व ड्रेनेज पर खर्च हुए। 105.20 करोड़ सीवरेज और कुछ नालों पर 58.72 करोड़ खर्च किए गए।

सबसे ज्यादा खर्च के बावजूद धोखा दे गए ये पांच नाले

हैदर कैनाल नाला
हैदर कैनाल नाला भले ही अभी कच्चा है लेकिन इसकी साफ-सफाई और दोनों किनारों को दुरुस्त कराने पर काफी बजट खर्च हुआ है। गोमती नदी में जहां यह नाला मिलता है, वहां इसे पक्का किया गया है। इसके बावजूद यह नाला उफना गया, जिससे हजारों घरों में पानी भर गया।
किला मोहम्मदी ड्रेन
50 करोड़ रुपए अलग-अलग साल में एलडीए ने इस नाले पर खर्च किए। कानपुर रोड, आशियाना, आलमबाग क्षेत्र का यह सबसे बड़ा नाला है। गुरुवार को भी बारिश के बाद इस नाले का कोई पता नहीं था। सड़कों पर नदी बह रही थी।
कुकरैल नाला
कुकरेल नाले पर ही काफी पैसा खर्च किया गया है। साफ-सफाई से लेकर इसे दुरुस्त रखने तथा अवैध कब्जों को तोड़ने पर बड़ी रकम खर्च हुई। कल इस नाले ने भी धोखा दे दिया।
वजीरगंज नाला
वजीरगंज से निकलनेवाले नाले को जेएनएनयूआरएम योजना से दुरुस्त कराया गया था। दावा किया गया था कि भविष्य में यह नाला उफनाएगा नहीं। गुरुवार की बारिश के बाद यह नाला भी बैठ गया।
जानकीपुरम नाला
जानकीपुरम नाले का निर्माण भी जेएनएनयूआरएम योजना से कराया गया था। यहां के सबसे बड़े नाले ने भी जवाब दे दिया। इस नाले को बनाने पर भी करोड़ों रुपए खर्च हुए थे।