" /> मेक इन इंडिया के बढ़ावे में कोरोना बना मददगार : अध्ययन में हुआ खुलासा

मेक इन इंडिया के बढ़ावे में कोरोना बना मददगार : अध्ययन में हुआ खुलासा

कोरोना वायरस फैलाने के लिए हिंदुस्थान की आधी आबादी चीन को दोषी मानती है। लोगों का मानना है कि चीन ने आर्थिक फायदों के लिए सक्रिय रूप से और जानबूझकर दुनियाभर में कोविड फैलाने की कोशिश की है। इसके चलते लोगों में चीन विरोधी भावना प्रबल हुई है। आंकड़ों से पता चलता है कि 47% भारतीय, चीन निर्मित उत्पादों की जगह मेक इन इंडिया के  वस्तुओं के लिए 25% तक ज्यादा भुगतान करने के लिए तैयार हैं। इस बात का खुलासा निजी एजेंसी द्वारा किए गए अध्ययन में हुआ है।

बता दें कि इनॉर्मस ब्रांड्स ने कोविड-19 के बीच लॉकडाउन में कंज्‍यूमर को पहचानने के लिए एक अध्ययन किया। यह अध्ययन  6 शहरों में किया गया।अध्ययन में यह भी पाया गया कि बुजुर्गों के बीच ई-कॉमर्स को अपनाए जाने के मामले में 47% की तेज वृद्धि हुई है। वे दूध, किराना और घर के जरूरी सामान ऑर्डर कर रहे हैं और वॉलेट्स तथा यूपीआई के जरिए भुगतान कर रहे हैं। बैंक एक दशक से भी ज्यादा समय से इंटरनेट बैंकिंग को बढ़ावा दे रहे हैं लेकिन आंकड़े बताते हैं कि केवल पिछले महीने में ही पहली बार के उपयोगकर्ता 28% तक बढ़े हैं। इस मामले में 33% का सबसे ज्यादा बदलाव 35-50 वर्ष आयु वर्ग के लोगों के बीच आया है । दैनिक समाचार पत्रों के संदर्भ में अध्ययन में यह बात सामने आई है कि  74% लोगों को अपने दैनिक समाचार पत्र की कमी खल रही है और वे इस सेवा के फिर से शुरू होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। इस लॉकडाउन में टेलीविजन की ताकत बढ़ी है।अध्ययन से पता चलता है कि ओटीटी के मुकाबले टीवी अब भी काफी बेहतर स्थिति में है। उच्च आयवाले घरों में 43% केबल टीवी को बुनियादी मनोरंजन के रूप में देखते हैं। विभिन्न सैंपल साइजों में 13% ने अपनी डीटीएच/केबल सदस्यता फिर से चालू करा ली है। दिलचस्प बात यह है कि ‘न्यूज’ नए जीईसी (जनरल एंटरटेनमेंट चैनल) के रूप में उभरा है। टीवी दर्शकों के विभिन्न वर्गों के बीच टीवी देखने का 64% समय न्यूज चैनलों पर व्‍यतीत होता है, जो कि चौंका देनेवाला आंकड़ा है। 43% का मानना है कि खबरों की रिपोर्टिंग निष्पक्ष होती है और 27% के मुताबिक इस बात के स्पष्ट संकेत हैं कि कुछ खबरिया चैनल किसी विशेष राजनीतिक पार्टी के पक्ष में झुकाव रखते हैं। अध्ययन के परिणामों पर टिप्पणी करते हुए इनॉर्मस ब्रांड्स के मैनेजिंग पार्टनर अजय वर्मा ने कहा, ‘दुनिया के अन्य हिस्सों की तुलना में भारत की युवा आबादी बहुत अलग व्यवहार कर रही है। अध्ययन से पता चलता है कि पूरी दुनिया में तालाबंदी करवा देनेवाली स्थिति में भी उच्च स्तर का आशावाद बना हुआ है। स्टडी यह भी दर्शाती है कि परिवार भारतीय अर्थव्यवस्था के पुनरुत्थान को लेकर आश्वस्त हैं।’