" /> महीनेभर से क्रुज पर अटके हुए भारतीय नाविक कर्मचारियों का मुंबई बंदरगाह पर उतरने का रास्ता खुला

महीनेभर से क्रुज पर अटके हुए भारतीय नाविक कर्मचारियों का मुंबई बंदरगाह पर उतरने का रास्ता खुला

मुख्यमंत्री के प्रयासों से मिली केंद्रीय जहाज मंत्रालय की अनुमति
मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के प्रयासों से आखिर मरिला डिस्कवरी क्रुज शिप पर पिछले महीनेभर से अटके हुए १४६ भारतीय नाविकों (खलासी) को मुंबई बंदरगाह पर उतरने की अनुमति मिल गई है। मुख्यमंत्री ने स्वयं जहाजरानी राज्यमंत्री मनसुख मांडविया के साथ बातचीत की, जिसके बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने गत मंगलवार को इस संदर्भ में एक आदेश जारी किया, जिसका लाभ समुद्र में जगहों-जगहों पर जहाज में अटके हुए तकरीबन  ४० हजार नाविक, जहाज के कर्मचारियों को भी होगा।
गत मंगलवार को सुबह से इस क्रुज के नाविकों एवं कर्मचारियों का मुंबई बंदरगाह पर उतरना शुरू हुआ। इन सभी की चिकित्सकीय जांच भी होगी। साथ ही उन्हें क्वारंटाइन करने के लिए एक इमारत भी उपलब्ध कराई गई है। यह मरिला डिस्कवरी क्रुज 2 से 6 अप्रैल के दरम्यान कोचीन, न्यू मंगलोर, गोवा और मुंबई पहुंचनेवाला था। इसी दौरान कोरोना का उद्रेक भी शुरू हुआ और इस क्रुज ने लाएम चाबंग थाईलैंड में १४ मार्च को सभी यात्रियों को छोड़ा, उसके बाद यह क्रुज १२ अप्रैल को कोचीन में पहुंचा लेकिन वहां इस क्रुज के कर्मचारियों को उतरने की अनुमति नहीं दी तथा उन्हें रोका गया, जिसके बाद यह क्रुज मुंबई के समीप के समंदर में १४ अप्रैल को पहुंचा और तभी से इस क्रुज के सभी कर्मचारी मुंबई में उतरने की राह देख रहे थे। जहाज में सवार किसी भी कर्मचारी को कोरोना की बाधा नहीं हुई, इस बात को भी स्पष्ट किया गया। थाईलैंड को छोड़कर ३७ दिन हो गए लेकिन इस जहाज पर किसी भी प्रकार का संक्रमण नहीं होने की बात कंपनी ने कही थी। बावजूद इसके अनुमति नहीं मिल रही थी।
मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे द्वारा इस विषय को जहाजरानी मंत्रालय के ध्यान में लाया गया। प्रधान सचिव विकास खारगे, आशीष कुमार सिंह और मुंबई पोर्ट ट्रस्ट के अध्यक्ष संजय भाटिया निरंतर प्रयास कर रहे थे, जिसके बाद गत मंगलवार को इस संदर्भ में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने  एक आदेश जारी किया। इसमें व्यापारी एवं व्यावसायिक जहाज पर सवार कर्मचारी, नाविकों को भारतीय बंदरगाह पर उतरना एवं बंदरगाह से जाना संभव हुआ। हालांकि इसके लिए निश्चित कार्यपद्धति दी गई है। उसके अनुसार ही इन कर्मचारियों ने उनके पिछले २८ दिनों की यात्रा संबंधित जानकारी बताने, बंदरगाह पर उतारने के बाद कोविड का परीक्षण करना, जरूरत पड़ने पर उनका क्वारंटाइन करना, इन नाविकों एवं कर्मचारियों ने सीधे उनके घर छोड़ने के लिए ट्रांजिट पास, वाहनों की व्यवस्था आदि बातें शामिल हैं। इसका लाभ समंदर में विविध जहाजों पर अटके हुए ३५ से ४० हजार भारतीय नाविकों को भी होगा। आगे यह क्रुज नॉर्वे के लिए रवाना होगा।