टीवीबाज मौलवियों का करो बायकॉट

टीवी पर प्रसारित होनेवाले न्यूज चैनलों के डिबेट में हिस्सा लेनेवाले मौलवियों की अब शामत आ गई है। इन टीवीबाज मौलवियों के खिलाफ स्वयं मुसलमानों ने ही सोशल मीडिया पर मुहिम चलाई है। इसके तहत मुसलमानों ने इन मौलवियों का बायकॉट करने की आवाज बुलंद की है। यह मुहिम इसलिए चलाई जा रही है क्योंकि इस्लाम से अनजान ये मौलवी डिबेट में कुछ ऐसा कर जाते हैं, जिससे पूरा मुस्लिम समाज बदनाम होता है।
बता दें कि विगत वर्ष ऑल इंडिया पर्सनल लॉ बोर्ड ने टीवी पर दिखनेवाले मौलवियों पर शिकंजा कसने का मन बनाया था लेकिन बाद में इस पर कोई कदम नहीं उठाया गया। ठंडे बस्ते में पड़े पर्सनल लॉ बोर्ड के इस कदम को अब सोशल मीडिया पर मुस्लिम बुद्धिजीवी वर्ग आगे बढ़ा रहे हैं। फेसबुक से लेकर सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर टीवीबाज मौलवियों का बायकॉट करने की मांग की जा रही है। इसका समर्थन मुस्लिम तंजीमें भी करती दिखाई दे रही हैं। प्रसिद्ध मुस्लिम तंजीम ‘रजा अकादमी’ ने इस मुहिम का समर्थन किया है। ‘रजा अकादमी’ के संस्थापक महासचिव सईद नूरी ने कहा कि आजकल टीवी पर बहुत सारे फर्जी मौलाना नजर आ रहे हैं। टीवी न्यूज चैनलवाले इन्हें मुफ्ती और मौलाना कहके पेश करते हैं जबकि असल में इन्हें इस्लाम और शरीयत कानून के बारे में कुछ भी पता नहीं है। ऊल-जुलूल बयानों से ये टीवीबाज मौलवी मुस्लिम समुदाय और इस्लाम को बदनाम कर रहे हैं। ‘गौसिया कमिटी’ के मोहम्मद हुसैन खान ने भी टीवीबाज मौलवियों के बायकॉट का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि टीवी पर दिखनेवाले मौलवियों की कोई विश्वसनीयता नहीं है। बस उनका काम ये है कि एक टोपी पहनकर टीवी परिचर्चा में शामिल हो जाते हैं। मौलाना एजाज कश्मीरी ने कहा कि पहले तो मौलानाओं को टीवी डिबेट में शामिल होने से परहेज रखना चाहिए क्योंकि डिबेट में मौलवियों द्वारा बातें न रख पाने के कारण मुस्लिम समाज की बदनामी हो रही है।