" /> एमबीएमसी की ‘सायकल पंक्चर!’… सामने आया घोटाला

एमबीएमसी की ‘सायकल पंक्चर!’… सामने आया घोटाला

घोटाले और भ्रष्टाचार के मामले में मीरा-भायंदर मनपा का कोई जवाब नहीं है। अब यहां पानी विभाग द्वारा वितरित की गई ‘सायकल पंक्चर’ हो चुकी है। इस सायकल प्रकरण का घोटाला सामने आया है। इस मामले का खुलासा सूचना अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी से हुआ है। इसके साथ ही एमबीएमसी में सत्ताधारी भाजपा किस तरह आम नागरिकों के टैक्स के पैसों से फिजूल खर्ची करती है, यह भी उजागर हुआ है।
यह है पूरा मामला
एमबीएमसी के पानी आपूर्ति विभाग में कार्यरत वॉल्व मैन को शहर के विभिन्न हिस्सों में जलवाहिनियों के वॉल्व खोलने-बंद करने तथा फूटी जलवाहिनियों की मरम्मत के लिए पैदल जाना पड़ता था। इससे समय की बर्बादी होती थी। इससे मनपा ने उन्हें सायकल इस्तेमाल करने की सलाह दी। १० मार्च, २०१८ को एक कार्यक्रम में तत्कालीन महापौर डिंपल मेहता के हाथों ५० वॉल्व मैन तथा मजदूरों को नई सायकल दी गई। २५ लोगों के पास खुद का वाहन होने के कारण उनको भत्ता देने का निर्णय हुआ। इसके लिए पानी आपूर्ति विभाग ने ४,६०० रुपए की दर से १४१ नई सायकल खरीदीr थी।
फिर भी सूची में नाम
५० सायकल वितरण के बाद बची हुई सायकल जिन्होंने नहीं ली, उनके नाम भी लाभार्थी सूची में दर्ज किए जाने का मामला सूचना अधिकार के तहत सामने आया है। यह जानकारी कामगार सेना के एक पदाधिकारी वैâलाश शेवंते ने मांगी है। जिन्हें सायकल चलाने भी नहीं आता या जो विकलांग हैं, उनके नाम भी सायकल लेनेवाले लाभार्थियों की सूची में दर्ज बताया गया है। कई ऐसे भी कर्मचारी हैं, जिन्हें हस्ताक्षर करने आता है, उनके नाम के आगे अंगूठे के निशान व जिन्हें हस्ताक्षर करने नहीं आता, उनके नाम के आगे हस्ताक्षर किए जाने का खुलासा भी हुआ है।
भंगार हो गई सायकलें
जिन सायकलों का वितरण नहीं किया जा सका था, उसे भायंदर (पूर्व) के टैंकर पॉइंट पर रख दिया गया था। जहां वे पंक्चर होकर भंगार बन गर्इं। कामगार सेना के यूनिट अध्यक्ष गोविंद परब ने इस घोटाले की जांच की मांग अतिरिक्त आयुक्त दिलीप ढोले से की थी। लेकिन करीब तीन माह बीत जाने के बाद भी अभी तक इसकी जांच नहीं की गई है। अब एक बार पुन: यह मुद्दा प्रशासन के समक्ष रखने की बात परब ने कही है।