" /> म्हाडा हुई मालामाल!, प्रीमियम के आए  रु. ३२४ करोड़

म्हाडा हुई मालामाल!, प्रीमियम के आए  रु. ३२४ करोड़

नई नियमावली के तहत म्हाडा मुंबई बोर्ड के पास पुरानी इमारतों के पुनर्विकास के १९१ प्रस्ताव आए, जिन्हें म्हाडा ने मंजूरी दी है। बदले में बिल्डरों ने हाउसिंग स्टॉक न देकर उसका प्रीमियम (पैसा) भरा है, जिसके चलते म्हाडा की तिजोरी में तीन वर्षों में ३२४ करोड़ रुपए जमा हो गए हैं। उम्मीद है जल्द ही म्हाडा की सैकड़ों इमारतों का पुनर्विकास पूर्ण होगा।
गौरतलब है कि म्हाडा २०१७ से पूर्व अपनी पुरानी इमारतों के पुनर्विकास के बदले बिल्डरों से प्रीमियम के बजाय हाउसिंग स्टॉक (घर) लेती थी। इन घरों को म्हाडा लॉटरी के जरिए बेचती थी। नतीजा, विकासकों का म्हाडा से मोहभंग हो गया और म्हाडा के पास पुनर्विकास का प्रस्ताव आना बंद हो गया। बिल्डरों ने हाउसिंग स्टॉक का पुरजोर विरोध किया। इसके साथ-साथ राहिवासियों ने भी बिल्डरों का साथ दिया, जिसके चलते पुरानी इमारतों का पुनर्विकास कार्य पूरी तरह ठप हो गया था। पुनर्विकास को गति देने के लिए गृह निर्माण मंत्रालय ने पुनर्विकास के नियमों में संसोधन कर हाउसिंग स्टॉक या प्रीमियम (पैसा) भरने का विकल्प लाया। इसके बाद २०१७ से अब तक म्हाडा के पास १९१ प्रस्ताव विकासकों का आया। साथ ही उनके प्रीमियम के करोड़ों रुपए भी म्हाडा की तिजोरी में आए। आज म्हाडा की तिजोरी में ३२४ करोड़ रुपए जमा हैं। अधिकतम जमा रकम पुनर्विकास प्रीमियम के तहत ही है। यह संपूर्ण जानकारी लेखपाल कार्यालय से प्राप्त हुई है। बता दें कि म्हाडा के पास ५६ कॉलोनियों में १०५ लेआउट हैं, जिसमें तकरीबन तीन हजार से अधिक घर शामिल हैं। इस अंदाज से तीन वर्षो में १९१ प्रस्ताव में से ११८ प्रस्ताव की मंजूरी बेहद कम है। म्हाडा के एक अधिकारी ने प्रस्ताव कम आने का कारण कोरोना काल में हुआ लॉकडाउन भी बताया है।