" /> मुलुक एक्सप्रेस! 8000 मजदूर पहुंचे अपने गांव : अब तक चली 7 श्रमिक एक्सप्रेस ट्रेन

मुलुक एक्सप्रेस! 8000 मजदूर पहुंचे अपने गांव : अब तक चली 7 श्रमिक एक्सप्रेस ट्रेन

*वसई रोड से गोरखपुर
*नासिक से लखनऊ
*भिवंडी से गोरखपुर
*सूरत से उड़ीसा (4)
राज्य सरकार की पहल पर राज्य में फंसे मजदूरों को चरणबद्ध तरीके से उनके गृह राज्यों में रेलवे विशेष श्रमिक एक्सप्रेस ट्रेन चलाकर भेज रही है। अब तक मुंबई के वसई रोड, भिवंडी, डहाणू, नासिक और सूरत से विभिन्न राज्यों के लिए विशेष श्रमिक एक्सप्रेस ट्रेन चल चुकी है। मुलुक एक्सप्रेस बनी इन श्रमिक एक्सप्रेस ट्रेन में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए लोगों को भेजा जा रहा है। अब तक 8000 से अधिक मजदूरों को भेजा जा चुका है। इन मजदूरों ने जब ट्रेन में सीट पाई तब जाकर उनकी जान में जान आई और उन्होंने राहत की सांस लेते हुए अपने राज्यों की ओर प्रस्थान किया।
बता दें कि अब तक सूरत से पुरी के लिए 3 श्रमिक एक्सप्रेस, ब्रह्मपुर के लिए एक श्रमिक एक्सप्रेस के अलावा नासिक से लखनऊ के लिए एक ट्रेन और भिवंडी और वसई रोड से गोरखपुर के लिए एक-एक ट्रेन चलाई जा चुकी है। इसके अलावा कल एक ट्रेन डहाणू रोड से चलाने की तैयारी रेलवे कर रही है। प्रत्येक ट्रेन में 1,200 यात्रियों को भेजा जा रहा है। अब तक कुल 7 श्रमिक एक्सप्रेस ट्रेनें चल चुकी हैं, जिनमें 8 हजार से अधिक मजदूर अपने राज्य के लिए प्रस्थान कर चुके हैं। श्रमिक विशेष ट्रेन चलाने के लिए आरपीएफ और राज्य सरकार एक रणनीति के तहत काम कर रही है। ट्रेन चलने से महज 3 से 4 घंटे पहले रेलवे के कंट्रोल से रेक की मांग की जा रही है। ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि रेलवे स्टेशन पर लोगों की अतिरिक्त भीड़ इकट्ठा न होने पाए।
*8 सीट पर 6 यात्री
710 रुपए किराया*
ट्रेन के एक स्लीपर कोच में 72 सीटें होती हैं, जबकि प्रत्येक कंपार्टमेंट में 6 सीटें बीच में और 2 सीटें खिड़की की तरफ बगल में होती हैं। ऐसे में एक कंपार्टमेंट की 8 सीटों में से केवल 6 सीटों पर लोगों को सफर करने के लिए बर्थ अलॉट किया जा रहा है। ताकि सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए श्रमिकों को भेजा जा सके। सूरत से उड़ीसा जानेवाली ट्रेन के प्रत्येक यात्री से 710 रुपए बतौर किराया लिया जा रहा है, जबकि मुंबई से गोरखपुर के लिए चलाई गई दो ट्रेनों के प्रत्येक यात्रियों से 740 रुपए किराया लिया जा रहा है।
जिन्हें छत नहीं उन्हें प्राथमिकता
जिन मजदूरों को पहले भेजा जा रहा है उनमें अधिकतर वे लोग हैं जो शहर के विभिन्न इलाकों में दिहाड़ी मजदूरी करने के साथ सड़क पर रहते थे। इन मजदूरों के अलावा वे मजदूर भी इसमें शामिल हैं जो लॉकडाउन के दौरान पटरी के सहारे, सड़क मार्ग के रास्ते अपने राज्यों की ओर पैदल अथवा वाहनों में चोरी-छिपे यात्रा कर रहे थे।