" /> ट्रेन नहीं तो साइकिल ही सही : निकल पड़े लोग इलाहाबाद के लिए

ट्रेन नहीं तो साइकिल ही सही : निकल पड़े लोग इलाहाबाद के लिए

लॉक डाउन के दौरान बहुत से लोगों का काम-धंधा पूरी तरह से ठप पड़ा हुआ है। लोगों को दो वक्त का खाना जुटा पाना मुश्किल हो गया है। मजबूर लोगों की बस यही इच्छा है कि वह अपने राज्य, गांव किसी तरह पहुंच जाएं। राज्य सरकार के प्रयासों से केंद्र सरकार व रेलवे प्रशासन ने गांव जाने के लिए श्रमिक विशेष ट्रेनें भी शुरू कर दी हैं लेकिन लोग बेसब्र हो रहे हैं। बीमारी और बेरोजगारी का डर और नाउम्मीदी में कुछ लोग पैदल तो कुछ लोग साइकिल से अपने गांव के लिए निकल रहे हैं। गुरुवार रात आठ लोग साइकिल से मुरबाड़ से इलाहाबाद के लिए निकल गए हैं।
बता दें कि अलग-अलग राज्यों से मुंबई में फंसे लोगों की हालत दिन-ब-दिन खराब होती जा रही है। लॉकडाउन के बाद से ही अधिकतर लोग मुंबई में बेरोजगार हो गए हैं। लॉकडाउन खुल जाएगा इस इंतजार में लोग अब तक किसी तरह अपने दिन काट रहे थे। अंततः निराश हुए लोग थक-हारकर अपने गांव जाने का फैसला लिए, मुंबई के विभिन्न इलाकों में फंसे लोग यही चाहते हैं कि राज्य सरकार उन्हें ट्रेन से भेजे ताकि वे सही-सलामत अपने गांव पहुंच सकें लेकिन उनका यह भी सोचना गलत साबित हो रहा है। आखिरकार मुरबाड़ की निजी कंपनी में काम करनेवाले शैलेश कुमार यादव, मोहन यादव, राकेश, मनजीत, लाला, प्रमोद यादव, जयबहादुर यादव और लक्ष्मीकांत यादव इस तरह कुल आठ लोग गुरुवार की देर रात साइकिल से इलाहाबाद के कुराव के लिए पलायन कर गए। पलायन करनेवालों में से जयबहादुर यादव ने बताया कि हम लोगों के पास खाने तक के लिए पैसे नहीं बचे और कंपनी के चालू होने के कोई आसार नहीं दिख रहे हैं। हमने हरसंभव कोशिश की कि कहीं से मदद मिल सके लेकिन हम लोगों को कहीं से मदद नहीं मिली। आखिरकार हमने अपने गांव से पैसे मंगवाए और साइकिल खरीदकर अपने गांव के लिए निकल पड़े। जयबहादुर यादव ने सुबह संवाददाता को बताया कि वे लोग नासिक तक सही-सलामत पहुंच चुके हैं।