" /> मेडिकल की मगजमारी : सख्त जांच के बाद मिल रहा है गांव जाने का हेल्थ क्लीयरेंस

मेडिकल की मगजमारी : सख्त जांच के बाद मिल रहा है गांव जाने का हेल्थ क्लीयरेंस

लॉकडाउन के दौरान मुंबई में फंसे लोगों को उनके मुलुक भेजने के लिए मुंबई के विभिन्न पुलिस थानों में राज्य सरकार ने फॉर्म बांटने की व्यवस्था की है। फॉर्म लेने के लिए थानों के बाहर इन दिनों लंबी कतार भी लग रही है। परंतु लॉकडाउन के दौरान अपने मुलुक जाने का जो सपना मुंबई में फंसे उत्तर भारतीय देख रहे हैं, उनके मुलुक जाने की राह इतनी आसान नहीं है। उत्तर भारतीयों को पुलिस थाने से फॉर्म तो मिल गया लेकिन मेडिकल रिपोर्ट के लिए उन्हें काफी मगजमारी करनी पड़ रही है। काफी सख्त जांच के बाद तब जाकर गांव जाने का क्लीयरेंस मिल रहा है।

फॉर्म के लिए घंटों कतार में
बता दें कि इस संवाददाता ने कल मुलुक जाने के लिए मिल रहे फॉर्म और उसके बाद मेडिकल प्रक्रिया से गुजर रहे उत्तर भारतीय लोगों की जमीनी हकीकत जानने की कोशिश की। इनमें टैक्सी ड्राइवर व फुटपाथ पर खोमचा लगाने के साथ ही नौकरीपेशा लोग भी शामिल हैं। शुरुआत में उन्हें पुलिस थानों से एप्लीकेशन फॉर्म लेने के लिए लंबी कतारों में कई घंटों खड़ा रहना पड़ रहा है। घंटों कतार में लगने के बाद उन्हें मेडिकल रिपोर्ट लाने के लिए पुलिस थानों द्वारा कहा जा रहा है। जाहिर-सी बात है मेडिकल रिपोर्ट देनी है तो लोगों को अपनी मेडिकल जांच भी करवानी पड़ेगी, तब जाकर कहीं लोगों के हाथ मेडिकल रिपोर्ट लगेगी। मगर लॉकडाउन के कारण इस काम में काफी मुश्किल हो रही है। मेडिकल रिपोर्ट निकालने के लिए क्लीनिक के बाहर लोगों की लंबी कतारें लग रही हैं। जिस क्लिनिक के बाहर लैब में जांच की जा रही है, वहां लंबी कतार लगना लाजमी है। हालांकि बढ़ती भीड़ और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन न होने पर पुलिस सख्ती भी कर रही है। टैक्सी ड्राइवर संदीप मौर्य ने बताया कि पुलिस थाने से फॉर्म मिलने के बाद मेडिकल रिपोर्ट के साथ फॉर्म जमा करने के लिए कहा गया है। कल जब उन्होंने ताड़देव स्थित चिल्ले क्लिनिक एंड पैथोलॉजी लैब के बाहर मेडिकल जांच के लिए कतार लगाई तो कुछ समय बाद पुलिस ने आकर कतार में खड़े लोगों को वहां से हटने के लिए कहा और सख्ती भी की।
हालांकि कतार में खड़े एक अन्य टैक्सी ड्राइवर महेश पाल ने बताया कि क्लीनिक के बाहर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने पर भी पुलिस कड़क एक्शन ले रही है। पुलिस पैथोलॉजी क्लिनिक को भी बंद करवा दे रही है। मुंबई सेंट्रल रेलवे स्टेशन के वेंडर बृजेश कुमार पांडेय ने बताया कि वे पैथोलॉजी क्लिनिक के बाहर कतार में खड़े थे। इसी दौरान पुलिस आई और कतार में खड़े लोगों को हटा दिया। अब यदि ऐसा ही होता रहा तो जो लोग गांव जाना चाहते हैं उन्हें मेडिकल रिपोर्ट कैसे मिलेगी? उनका कहना है कि प्रशासन को पैथोलॉजी लैब के बाहर पुलिस तैनात करना चाहिए, ताकि सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए लोगों की मेडिकल जांच हो सके। ऐसी ही शिकायत फुटपाथ पर भेल का खोमचा लगानेवाले दिलीप गुप्ता की भी है।