" /> गुमशुदा!… बांद्रा से गुम हुई थी पालघर की महिला

गुमशुदा!… बांद्रा से गुम हुई थी पालघर की महिला

किसी अपने की मौत से ज्यादा किसी अपने की गुमशुदगी दुखदायी होती है। मौत के बाद कोई वापस नहीं लौटता इसलिए लोग मन को तसल्ली देकर जीना सीख लेते हैं लेकिन गुमशुदगी में लोग अपनों के वापस लौटने का इंतजार करते हैं। उस गुमशुदा अपने की चिंता और उससे बिछड़ने का गम ताउम्र कष्ट पहुंचाता। लेकिन कई बार गुमशुदगी के मामलों में बेहद चौंकानेवाली वजहें सामने आती हैं। हाल ही में इसका उदाहरण वर्ष २०१७ में शिर्डी से गुम हुई इंदौर की महिला के मामले में देखने को मिला था और अब कुछ ऐसा ही बांद्रा से वर्ष २०१८ में लापता हुई पालघर निवासी महिला के मामले में भी देखने को मिला है।

इंदौर की रहने वाली एक महिला प्रीति सोनी (बदला हुआ नाम) १० अगस्त, २०१७ को शिर्डी से रहस्यमय ढंग से लापता हो गई थी। वह, पति प्रकाश सोनार (बदला हुआ नाम) और बच्चों के साथ साई बाबा मंदिर में दर्शन करने शिर्डी गई थीं। दर्शन के बाद मेले में उनके बच्चे राइड एन्जॉय कर रहे थे और प्रीति घरेलू व शृंगार के सामान खरीद रही थी। प्रकाश ने प्रीति को बच्चों को ले जाने से मना किया था, क्योंकि वे व्यर्थ चीजों की डिमांड करने लगते।’ लेकिन प्रकाश ने कभी सोचा भी नहीं था कि पैसे बचाने के लिए प्रीति को मेले में अकेले भेजने की भूल उन्हें कितनी भारी पड़ेगी। प्रीति मेले से रहस्यमयी परिस्थितियों में लापता हो हो गई। प्रीति की गुमशुदगी से लोगों की आस्था से जुड़े पवित्र तीर्थ क्षेत्र शिर्डी एवं नासिक की भी काफी बदनामी हुई थी। उसके बाद प्रकाश लगभग साढ़े तीन साल तक प्रीति की तलाश कर रहे थे।
इंदौर में ही मिली प्रीति
प्रीति को ढूंढ़ने के लिए प्रकाश ने अदालत में भी गुहार लगाई। मामला मुंबई हाई कोर्ट की औरंगाबाद बेंच में पहुंचा तो कोर्ट ने महाराष्ट्र पुलिस की जमकर आलोचना भी की थी। कोर्ट के आदेश पर पुलिस प्रीति सहित शिर्डी क्षेत्र से लापता हुए ६७ अन्य लोगों की तलाश मानव तस्करी व मानव अंगों की तस्करी सहित कई अन्य एंगल से कर रही थी। लेकिन प्रीति का कहीं को सुराग नहीं मिल रहा था। बीते वर्ष दिसंबर महीने में प्रीति अचानक लौट आई। उसने बताया कि वह इंदौर में ही रह रही थी। उसकी दिमागी हालत ठीक नहीं थी। जब वह कुछ संयत हुई तो अपनी बहन के घर पहुंच गई। प्रीति ने अपने परिवार को बताया है कि वो ३ साल से इंदौर में ही एक बूढ़ी औरत के साथ रह रही थी।
भाई से मिलने गई थी प्यारी
हालांकि प्रीति के मामले में ये पता नहीं चल सका था कि वो शिर्डी से इंदौर वैâसे पहुंची थी? लेकिन इसी तरह तीन साल पहले बांद्रा में घटी ऐसी ही एक घटना में लापता महिला झारखंड में अपने नए पति के घर में रहती मिली थी। २३ वर्षीय प्यारी देवी पति चिराग सिंह (बदला हुआ नाम) के साथ नालासोपारा में रहती थी। २६ जनवरी, २०१८ को चिराग, प्यारी के साथ बांद्रा में रहनेवाले अपने भाई से मिलने आया था। वापस लौटते समय चिराग बांद्रा रेलवे स्टेशन पर टिकट निकाल रहा था, उसी दौरान प्यारी देवी वहां से रहस्यमयी परिस्थितियों में गुम हो गई।
प्रीति के कारण मिली प्यारी
शिर्डी से लापता हुई प्रीति के मामले में कोर्ट द्वारा पुलिस की खिंचाई करने के बाद बांद्रा रेलवे पुलिस ने वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक विलास चौगुले के मार्गदर्शन में प्यारी देवी के गुमशुदगी मामले की जांच और तेज कर दी। रेलवे पुलिस को यह शक था कि प्यारी देवी के बारे में चिराग कुछ छिपा रहा है। इसलिए पुलिस ने चिराग के भाई से दोबारा पूछताछ करने का निर्णय लिया। पुलिस का यह प्रयास सफल हुआ। एपीआई अरन्ये के नेतृत्व में पीएसआई झुरुंगे, सिपाही चव्हाण, कुंभार व महिला सिपाही नीता वरेकर ने चिराग के भाई से सख्ती से पूछताछ की तो पता चला कि प्यारी देवी का पहले से ही गांव के एक अन्य युवक के साथ प्रेम संबंध था। नतीजतन २६ जनवरी को वह योजनाबद्ध ढंग से अपने प्रेमी के साथ भाग गई थी। बांद्रा रेलवे पुलिस जब झारखंड के गड्डा जिला स्थित चरण पुलिस थाने में रहनेवाले प्यारी देवी के दूसरे पति के घर पहुंची तो पता चला कि चिराग मानसिक रूप से बीमार था इसलिए प्यारी उसके साथ रहना नहीं चाहती थी और वह अपने प्रेमी के साथ भाग गई। उसने चिराग से तलाक लिए बगैर प्रेमी से विवाह कर लिया है और उसके फिलहाल तथाकथित दूसरे पति (प्रेमी) के एक बच्चे की मां भी बन चुकी है।