मीठी नदी बनेगी पर्यटन स्थल

मुंबई में आई २६ जुलाई की प्रलयंकारी बाढ़ को भला कौन मुंबईकर भूल सकता है! उस समय इस बाढ़ की वजह मीठी नदी को ठहराया गया था। अब यही मीठी नदी पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होने जा रही है। इसके लिए मनपा ने पहल शुरू कर दी है। मीठी नदी करीब १७.८४ किलोमीटर लंबी है, जिसमें से ११.८४ किलोमीटर मनपा और शेष एमएमआरडीए के अधीन आती है। मीठी नदी के विकास की दिशा में मनपा ने कदम बढ़ाया है। मीठी नदी के जिस क्षेत्र को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाना है, उस क्षेत्र की साफ-सफाई शुरू कर दी गई है।
चार चरणों में होगा विकास
मीठी नदी के विकास को चार चरणों में संचालित किया जाएगा। गोरेगांव में फिल्टरपाड़ा से पवई जल विभाग तक २ किमी की सर्विस रोड बनेगी। दूसरे चरण में पवई से सीएसटी पुल कुर्ला तक सीवरेज लाइन का मोड़ और सीवरेज उपचार केंद्र का निर्माण किया जाएगा।
यहां से गुजरती है मीठी नदी
मीठी नदी सीप्ज, मरोल, बैल बाजार, कुर्ला, बांद्रा-कुर्ला कांप्लेक्स से होकर बहती है और माहिम खाड़ी में मिलती है।
पर्यटन की योजना
मीठी नदी माहिम कॉजवे से होते हुए अरब सागर में जाकर मिलती है। मनपा आयुक्त प्रवीण परदेशी ने इन समुद्री तट के पास मैंग्रोव्ज लगाने का आदेश दिया है। इसके साथ ही यहां पादचारी सैरगाह बनाया जाएगा, जो सिद्धिविनायक मंदिर से बांद्रा रिक्लेमेशन को जोड़ेगा। इसके अलावा जॉगिंग ट्रैक तथा व्यूइंग गैलरी भी बनाई जाएगी। व्यूइंग गैलरी के जरिए पर्यटक आसपास परिसर की सुंदरता को निहार सकते हैं।
२१ करोड़ होंगे खर्च
मीठी नदी को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए मनपा ने आईवीएल स्वीडिश पर्यावरण अनुसंधान संस्थान को सलाहकार के रूप में नियुक्त किया है, जो पर्यटन स्थल के लिए डिजाइन तैयार करेगा। इस पर करीब २१ करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे।