मोबाइल चोरों की आएगी शामत!,  सिम-आईएमईआई बदलकर भी नहीं बचेंगे चोर

मोबाइल चोरी इन दिनों पुलिस के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बन गई है। सड़क पर तथा रेल परिसर में यात्रियों-राहगीरों का मोबाइल चोरी आज आम समस्या बन चुकी है। खासकर मुंबई की लोकल ट्रेनों में फटकामार कई बार यात्रियों की मौत का कारण भी बन जा रहे हैं लेकिन अब मोबाइल चोरों की शामत आनेवाली है। नए मोबाइल ट्रैकिंग सिस्टम से न सिर्फ खोया हुआ मोबाइल फोन ढूंढ़ना आसान हो जाएगा बल्कि मोबाइल चोरों के लिए चोरी का मोबाइल किसी और को बेचना भी मुश्किल हो जाएगा। सरकार ऐसी तकनीक लॉन्च करने जा रही है, जो देशभर में ऑपरेट हो रहे चोरी के फोन को ट्रैक कर सकेगी। इस ट्रैकिंग सिस्टम की खास बात यह होगी कि फोन से सिम कार्ड निकाल देने या आईएमईआई नंबर बदल देने के बाद भी फोन को ट्रैक किया जा सकेगा। इस तकनीक को सेंटर फॉर डेवलपमेंट्स ऑफ टेलीमैट्किस ने तैयार किया है और इसे अगस्त में लॉन्च किए जाने की उम्मीद है।
बता दें कि टेलीकॉम विभाग ने जुलाई, २०१७ में सी-डॉट को मोबाइल ट्रैकिंग प्रोजेक्ट ‘सेंट्रल इक्विपमेंट आइडेंटिटी रजिस्टर सौंपा था। इसका उद्देश्य था मोबाइल फोन की चोरी और नकली फोन के धंधे को रोकना। सरकार ने देश में सीईआईआर सेट-अप करने के लिए १५ करोड़ रुपए आवंटित करने का प्रस्ताव दिया था। सीईआईआर सिस्टम चोरी किए गए या गुम हुए फोन पर मौजूद सभी तरह की सेवाओं को ब्लॉक कर देगा। फिर चाहे सिम कार्ड हटा दिया जाए या फोन का आईएमईआई नंबर बदल दिया जाए। यह सभी मोबाइल ऑपरेटर्स के आईएमईआई डाटाबेस को कनेक्ट करेगा। यह सभी नेटवर्क ऑपरेटर्स के लिए सेंट्रल सिस्टम की तरह काम करेगा, जहां वे ब्लैक लिस्ट किए हुए मोबाइल टर्मिनल को शेयर कर सकेंगे ताकि किसी भी नेटवर्क में ब्लैकलिस्ट की गई डिवाइस दूसरे नेटवर्क में काम न करे, फिर चाहे सिम कार्ड क्यों न बदल दिया जाए। डीओटी ने सीईआईआर प्रोजेक्ट की शुरुआत २०१७ में की थी। महाराष्ट्र में इसका ट्रायल किया गया था। ट्रायल में यह प्रोजेक्ट सफल रहा, इसके बाद अब इसको राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने की तैयारी चल रही है। इस प्रोजेक्ट को शुरू करने का असली मकसद मोबाइल फोन की चोरी को रोकना है। आईएमईआई नंबर को ब्लैकलिस्ट करने के बाद मोबाइल काम करने लायक नहीं रहेगा। इस डाटाबेस की मदद से सुरक्षा एजेंसियां चोरी हुए मोबाइल को आसानी से ढूंढ़ सकेंगी। अधिकारी का कहना है कि हम यह भी सुनिश्चित करेंगे कि सरकार की ओर से इस डाटाबेस का गलत इस्तेमाल न किया जाए।