" /> प्रलय ला सकते हैं पहाड़, भिवंडीवासियों की उड़ी नींद

प्रलय ला सकते हैं पहाड़, भिवंडीवासियों की उड़ी नींद

कई दिनों से जारी मूसलाधार बारिश के कारण कांदिवली की तरह भिवंडी शहर में भी पहाड़ी खिसकने का खतरा बढ़ गया है। इस कारण पहाड़ियों के ऊपर आशियाना बनाकर वर्षों से रहनेवाले हजारों लोगों का जीवन इस कारण खतरे में है। हर वर्ष यहां बारिश में पहाड़ी खिसकने के कारण झोपड़ों के तबाह होने की घटना घटती है। बावजूद मनपा के पास इन पहाड़ियों पर रहनेवालों की सुरक्षा की कोई योजना न होने के कारण बरसात के दिनों में मौत के बादल मंडराने लगे हैं।
मालूम हो कि भिवंडी मनपा क्षेत्र में स्थित साठेनगर, अजमेर नगर, गदहा नगर, रामनगर, शांतिनगर, गायत्री नगर, नवी बस्ती और नेहरूनगर सहित आधा दर्जन से अधिक पहाड़ियां हैं, जहां पर हजारों लोग झोपड़पट्टी बनाकर रहते हैं। अपनी मेहनत की कमाई से एक-एक रुपया इकट्ठा कर अपना आशियाना बनाकर रहनेवाले इन झोपड़ों को मनपा ने पानी की लाइन देने के साथ सरकार ने इन्हें बिजली का कनेक्शन भी दिया है लेकिन इन पहाड़ियों के झोपड़पट्टी में रहनेवालों के साथ यदि कोई हादसा होता है तो उससे निपटने की मनपा के पास कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है। सूत्र बताते हैं कि इन झोपड़पट्टी में रास्ता न होने के कारण आग लगने अथवा अन्य घटना से निपटने के लिए इन झोपड़ों पर जाने के लिए एंबुलेंस, पानी का टैंकर अथवा फायर ब्रिगेड की गाडियों को जाने का कोई रास्ता नहीं है। इतना ही नहीं इन पहाड़ियों पर रहनेवालों का जीवन हमेशा खतरे में पड़ा रहता है। पहाड़ियों पर मनपा द्वारा सुरक्षा का कोई उपाय न होने के कारण मूसलाधार बारिश के कारण पहाड़ियों के खिसकने अथवा भूस्खलन का खतरा बना हुआ है।
गौरतलब हो कि पिछले वर्ष साठेनगर नगर इलाके में पहाड़ी पर रहनेवाले पद्माकर पवार के घर की दीवार मूसलाधार बारिश के कारण गिर गई थी, जिसके कारण पांच मकान क्षतिग्रस्त हो गए थे।इसके एक वर्ष पहले रामनगर पहाड़ी खिसकने से चार झोपड़े तबाह हो गए थे जबकि वर्ष २००६ में मुसलाधार बारिश के कारण गदहा नगर की पहाड़ी खिसक गई थी। जिसके कारण चार लोगों की मौत हो गई थी और छह लोग घायल हो गए थे। अब मूसलाधार बारिश के कारण पुनः पहाड़ी खिसकने का खतरा पैदा हो गया है, जो लोगों में भय का कारण बना हुआ है। हालांकि मनपा प्रशासन का कहना है कि इतनी बडी पहाड़ी के झोपड़पट्टी में रहनेवालों के सुरक्षा का इंतजाम करने के बारे में उचित उपाय किया जा रहा है जबकि बरसात के कारण कभी भी पहाड़ी खिसकने की घटना घट सकती है।