" /> मुख्तार अंसारी के गुर्गों पर कसा शिकंजा!, ४८ टीमों ने ४२ जगह छापे मारे, दो खास साथी सहित ११ गिरफ्तार

मुख्तार अंसारी के गुर्गों पर कसा शिकंजा!, ४८ टीमों ने ४२ जगह छापे मारे, दो खास साथी सहित ११ गिरफ्तार

सामना संवाददाता / लखनऊ
उत्तर प्रदेश सरकार और यूपी पुलिस का शिकंजा मुख्तार अंसारी और उसके गुर्गों पर कसता जा रहा है। मंगलवार को भी पुलिस ने गैंगस्टरों की तलाश में कई ठिकानों पर लखनऊ में छापेमारी की। एक दिन पहले ही हुसैनगंज पुलिस मुख्तार के गुर्गे अतीक अहमद को गिरफ्तार कर चुकी है। लखनऊ पुलिस मुख्तार के गुर्गों की तलाश में मंगलवार को वजीरगंज पहुंची। पुलिस की ४८ टीमों ने मुख्तार के कथित करीबियों के ४२ ठिकानों पर छापेमारी की। इस छापेमारी में पुलिस ने मुख्तार के दो खास साथी सहित ११ को गिरफ्तार किया।
वजीरगंज में मुख्तार अंसारी के करीबी शाहिद और कलीम के घर पर पुलिस ने छापा मारा। विभूतिखंड में छापेमारी के दौरान पुलिस को गाजीपुर का हिस्ट्रीशीटर बाबू सिंह हत्थे चढ़ा। पुलिस उसे हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। लखनऊ पुलिस के मुताबिक विभूति खंड से पकड़े गए बाबू सिंह के खिलाफ लखनऊ के कई थानों में दर्जनों मुकदमें दर्ज हैं। फिलहाल यूपी पुलिस का मुख्तार अंसारी और उसके गुर्गों पर शिकंजा जारी है। हुसैनगंज पुलिस ने एक दिन पहले ही लखनऊ से अतीक अहमद को गिरफ्तार किया था। अतीक मुख्तार अंसारी के गुर्गों में से एक है। सोमवार को हुसैनगंज पुलिस आलमबाग निवासी नरेंद्र से वसूली के मामले में अतीक अहमद को लखनऊ से गिरफ्तार किया गया था। गौरतलब है कि बीते शुक्रवार को गाजीपुर शहर कोतवाली ने मुख्तार की पत्नी आफ्सा अंसारी, साला सरजील रजा और अनवद शहजाद के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट में वारंट जारी किया गया था। कुछ दिन पहले ही करोड़ रुपए की अनधिकृत जमीन से कब्जा हटवाने के बाद प्रशासन ने पत्नी और साले पर गैंगस्टर की कार्रवाई की थी। कार्रवाई के बाद परिजनों में हड़कंप मच गया था। पुलिस ने मुख्तार अंसारी और उनके गिरोह के आर्थिक साम्राज्य पर गहरी चोट की है। अब तक की कार्रवाई में मुख्तार गिरोह की सालाना ४८ करोड़ रुपए की आय बंद की जा चुकी है। पुलिस ने वाराणसी जोन के अलग-अलग जिलों में प्रतिबंधित मछली कारोबार, स्टोरेज, गिरोह बनाकर वसूली, कोयला कारोबार, बूचड़खाना समेत अन्य अवैध धंधों पर अंकुश लगाकर तगड़ी चोट दी है। पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक मुख्तार गैंग को मछली कारोबार से ही करीब ३३ करोड़ रुपए की सालाना आय होती थी। बाकी आय दूसरे अवैध कार्यों से होती थी।