चुनावी आस के बाद बढ़ेगी प्यास! झीलों का जलस्तर चिंताजनक, मुंबई में होगी पानी की कटौती

देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में इन दिनों चुनावी फिजा छायी हुई है। हर मतदाता इस चुनाव में राजनीतिक पार्टियों और उम्मीदवारों से आस लगाए बैठा है। दूसरी ओर इन मतदाताओं को चुनाव के बाद प्यास का सामना करना पड़ सकता है। ऐसा इसलिए कि मनपा जलविभाग, चुनाव के बाद मुंबई में और पानी कटौती करने के लिए कदम उठा सकता है। वर्तमान में मुंबई में १० फीसदी पानी की कटौती लागू है, जो चुनाव के बाद और बढ़ सकती है। संभावना जताई जा रही है कि मुंबई में १५ से २० फीसदी पानी की कटौती चुनाव के बाद हो सकती है। मुंबई की प्यास बुझानेवाली झीलों का जलस्तर चिंताजनक बना हुआ है। इन झीलों में महज २५ फीसदी पानी बचा है। इसके चलते प्रशासन मुंबईकरों से अभी से ही पानी संभालकर इस्तेमाल करने की अपील कर रहा है।
बता दें कि मुंबई को मोडक सागर, तानसा, अपरवैतरणा, मध्य वैतरणा, तुलसी, भातसा और विहार झील से जल आपूर्ति की जाती है। पिछले वर्ष झील परिसर में कम बारिश होने से मनपा ने मुंबई में १० फीसदी पानी कटौती लागू की है। फिलहाल मुंबई में रोजाना ३,४२० मिलियन लीटर पानी की आपूर्ति की जा रही है। वर्तमान में झीलों में सिर्फ २५ प्रतिशत पानी बचा हुआ है। इन झीलों में ३,८४,४९५ मिलियन लीटर पानी ही उपलब्ध है। आंकड़ों का आकलन करें तो महज ११२ दिनों का पानी ही इन झीलों में बचा हुआ है। जल विभाग के वरिष्ठ अफसरों की मानें तो जून-जुलाई में कम बारिश होने की भविष्यवाणी मौसम विभाग के ‘स्कायमेट’ ने की है। इसको देखते हुए मुंबई में १५ फीसदी पानी की कटौती करने की तैयारी की जा रही है। फिलहाल पानी के संकट से निपटने के लिए मनपा प्रशासन ने राज्य सरकार से भी मदद मांगी। भातसा और अपर वैतरणा के रिजर्व कोटे का पानी इस्तेमाल करने के लिए राज्य सरकार को पत्र भी लिखा है। गौरतलब हो कि मुंबईकरों को सबसे बड़ी पानी कटौती की मार वर्ष १९९३ में झेलनी पड़ी थी। वर्ष १९९३ में ४० फीसदी पानी कटौती मुंबई में की गई थी। इसके बाद २००९ में ३० फीसदी, वर्ष २०१४ में २० फीसदी और वर्ष २०१५ में २० फीसदी पानी कटौती लागू की गई थी।