" /> मेड इन इंडिया होगी मोनो डार्लिंग : तीन भारतीय कंपनियों ने दिखाई दिलचस्पी

मेड इन इंडिया होगी मोनो डार्लिंग : तीन भारतीय कंपनियों ने दिखाई दिलचस्पी

मोनो के 10 रेक खरीदने की प्रक्रिया को रद्द करने के बाद एमएमआरडीए ने मोनो को मेक इन इंडिया के तहत स्वदेशी मोनो रेल निर्माण की योजना बनाई थी।इस योजना के तहत एमएमआरडीए भारत हेवी इलेक्ट्रिक लिमिटेड (भेल), भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड सहित अन्य स्वदेशी कंपनियों से मोनो रेक के निर्माण के लिए बात कर रही थी, जिसका सकारात्मक परिणाम आया है। मोनो रेल निर्माण के लिए 3 स्वदेशी कंपनियों ने दिलचस्पी दिखाई है, जिससे आनेवाले समय मे मुंबई की मोनो डार्लिंग मेड इन इंडिया वाली होगी।
बता दें कि चीनी कंपनी को मोनो के टेंडर से बाहर रखने के लिए एमएमआरडीए ने टेंडर प्रक्रिया को रद्द कर दिया है। दोबारा नए सिरे से पूरी प्रक्रिया शुरू आरंभ करने का फैसला लिया है। एमएमआरडीए के इस निर्णय से चीनी कंपनियों को यह ठेका मिलने से पहले ही जोर का झटका दे दिया गया है। मोनो सेवा को बढाने के लिए प्राधिकरण ने 10 नए मोनो के रेक खरीदने के लिए ग्लोबल टेंडर जारी किया था। मोनो रेक की सप्लाई के लिए चीन की दो कंपनियों ने रुचि दिखाई थी। एमएमआरडीए के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, टेंडर की प्रक्रिया तय होने के बाद भी चीनी कंपनियां टेंडर के नियम, शर्तो और पात्रता मानदंडों में संशोधन के लिए लगातार दबाव बना रही हैं।
मेक इन इंडिया योजनाओं को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार द्वारा घोषित विभिन्न नीतियों के अनुरूप, विकास और दीर्घकालिक समर्थन के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी भागीदार की तलाश करने का निर्णय लिया है। इसे देखते हुए, वर्तमान निविदा को रद्द करने और तुरंत प्रक्रिया को फिर से शुरू करने का निर्णय लिया गया था। साथ ही भारतीय कंपनियों की भागीदारी को सक्षम बनाने के लिए पिछले 10 वर्षों से भारत में स्थापित कंपनियों को मौका देने का निर्णय लिया गया। इसके लिए भेल, बीईएमएल आदि के साथ बातचीत शुरू करने का निर्णय एमएमआरडीए ने लिया, जिसका अच्छा प्रतिसाद महज कुछ सप्ताह में ही एमएमआरडीए को मिल गया है।
चेंबूर से संत गाडगे महाराज चौक (सात रास्ता) के बीच मोनो रेल का संचालन होता है। लॉकडाउन के कारण अभी संचालन बंद है। करीब 20 किमी लंबे इस रूट पर 5 रेक में से चार रेक यात्री सेवा में शामिल हैं, जबकि एक रेक इमरजेंसी के लिए रखा गया है। जरूरत के अनुसार पर्याप्त रेक न होने के कारण आधे घंटे में मोनो रेल का परिचालन होता है। जिससे मोनो रेल को यात्रियों का अच्छा प्रतिसाद भी नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में एमएमआरडीए ने 10 अतिरिक्त मोनो रेक खरीदने के लिए टेंडर निकाला था। टेंडर की टेक्नीकल बिड खुल चुकी थी। इस टेक्निकल बिड में दो कंपनियां आई थीं और ये दोनों कंपनियां चीन की थीं। केवल दो आवेदन मिलने से किसी एक चीनी कंपनी को टेंडर मिलना तय था।