मुंबई टू सिंगापुर सिर्फ ३० मिनट में!

हर किसी की तमन्ना होती है कि काश वह सिंगापुर की सैर कर पाता। पर जेब इसकी इजाजत नहीं देता। एक छोटे टूर का खर्च भी ५० हजार रुपए तक हो सकता है। फिर सिंगापुर का हवाई सफर भी ५ घंटे का है। पर आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है। अगले दशक तक मुंबई से सिंगापुर की दूरी घटकर महज ३० मिनट की रह जाएगी और विमान की बजाय आप कार से वहां जा सकते हैं। दरअसल, नई मुंबई में एक नया सिंगापुर बसाने की तैयारी चल रही है। इस नए शहर की डिजाइन वही शख्स करेगा जिसने सिंगापुर का डिजाइन बनाया था। नई मुंबई में इस नए सिंगापुर को बसाने की योजना रिलायंस समूह के अध्यक्ष मुकेश अंबानी ने बनाई है।

नई मुंबई में बनेगा न्यू सिंगापुर

मुंबई के करीब एक विश्वस्तरीय हाईटेक सिटी बनने जा रही है। सिंगापुर की तर्ज पर बननेवाले इस नए शहर का नाम फिलहाल न्यू सिंगापुर कहा जा रहा है। यह शहर बसाने जा रहे हैं रिलायंस समूह के मुखिया मुकेश अंबानी। इस शहर को बसने में एक दशक लग जाएंगे और इस शहर पर सवा ५ लाख करोड़ रुपए (७५ अरब डॉलर) का निवेश हो सकता है। इस परियोजना को एसपीए (विशेष योजना प्राधिकरण) से मंजूरी मिल चुकी है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार रिलायंस इंडस्ट्रीज न केवल इस मेगा सिटी का विकास करेगी बल्कि इस शहर का प्रशासन भी संभालेगी। इस परियोजना के लिए बनाई गई विशेष कंपनी नई मुंबई स्पेशल इकनॉमिक जोन (एनएमएसईजेड) ४,३०० एकड़ जमीन का अधिग्रहण कर चुकी है। यह जमीन जेएनपीटी और निर्माणाधीन हवाई अड्डे के करीब है। ७ मार्च को आरआईएल ने एक सहयोगी कंपनी के जरिए एनएमएसईजेड के साथ एक समझौता किया। इसके तहत २,१८० करोड़ रुपए के शुरुआती भुगतान से कंपनी को जमीन का पट्टा और इसे विकसित करने के अधिकार मिल गए। कंपनी ने ७ मार्च को एक बयान में बताया कि उसने एक वैश्विक आर्थिक केंद्र विकसित करने के लिए महाराष्ट्र सरकार के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इसमें अंतरराष्ट्रीय साझेदारी से एक विश्वस्तरीय एकीकृत डिजिटल एवं सेवा औद्योगिक क्षेत्र बनाया जाएगा। कंपनी के अनुसार, ‘यह परियोजना दिवंगत धीरूभाई अंबानी के सपने को पूरा करेगी जिन्होंने सबसे पहले १९८० के दशक में नई मुंबई में एक विश्वस्तरीय शहर बनाने की पेशकश की थी। उनकी योजना दक्षिण मुंबई को सड़क मार्ग के जरिए नई मुंबई से जोड़ने की थी। यह परियोजना दक्षिण मुंबई का बेहतर संस्करण होगी और इससे मुंबई में भीड़भाड़ कम होगी।’
२००५ में अंबानी ने स्किल इन्फ्रास्ट्रक्चर के संस्थापक निखिल गांधी के साथ हाथ मिलाया था। गांधी ने चीन के मेगा एसईजेड की तर्ज परा विशेष आर्थिक क्षेत्र विकसित करने की योजना बनाई थी और इसके लिए वह जमीन भी अधिग्रहीत कर चुके थे। सूत्रों का कहना है कि टाटा समूह भी एसईजेड परियोजना में शामिल होने का इच्छुक था लेकिन अंबानी ने इसमें बाजी मार ली। २०१८ की शुरुआत में महाराष्‍ट्र सरकार ने इस परियोजना को निर्यातोन्मुखी क्षेत्र से औद्योगिक क्षेत्र में बदलने की अनुमति दे दी थी। एक सूत्र ने कहा, ‘यह परियोजना भी ‘जियो’ की तरह खेल के नियमों को बदल देगी।’ २००५ में सिंगापुर सरकार की कंपनी जुरोंग टाउन कॉरपोरेशन को इसके डिजाइन की जिम्मेदारी दी गई थी। यह वही कंपनी है जिसने सिंगापुर का डिजाइन तैयार किया था। अंबानी की परियोजना के लिए इसी तरह के मॉडल को अपनाया जाएगा। शहर का काम पूरा होने के बाद इसमें १० लाख से अधिक लोग रह सकते हैं और हजारों कंपनियां काम कर सकती हैं।