मुंबई अंडर बजट! परियोजनाओं को नहीं मिला पर्याप्त धन

नरेंद्र मोदी २.० सरकार का बजट वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पेश किया। आर्थिक मामलों के जानकार जहां इसे रॉबिन हुड का बजट बता रहे हैं, वहीं इस बजट में देश के मध्यम वर्ग के साथ-साथ मुंबईकरों को कुछ खास नहीं मिला है, जिससे लोगों में निराशा है। मुंबईकरों को लग रहा है कि बजट के बाद उनकी जेब से ज्यादा पैसे जाने लगे हैं। तेल पर सेस बढ़ने के कारण महंगाई बढ़ने की आशंका से मुंबईकर परेशान हैं। मुंबईकरों को इस बजट में सबसे ज्यादा उम्मीदें रेलवे, इंप्रâा और हेल्थ से जुड़ी योजनाओं के बजटीय प्रावधान में शामिल किये जाने की थी, लेकिन बजट में जो भी घोषणा हुई उसमें उसकी अपेक्षाएं धूमिल हुई हैं। मुंबई उपनगरीय रेलवे विकास को भी बजट में खास तरजीह नहीं मिली है।
बजट से मुंबईकरों को जो उम्मीदें थीं, वे धरी की धरी रह गर्इं। इंप्रâा व ट्रांसपोर्ट विशेषज्ञ जितेंद्र गुप्ता का कहना है कि जब तक मुंबई को स्पेशल स्टेटस नहीं मिलेगा, तब तक मुंबई की परेशानी नहीं खत्म होगी। मेट्रो परियोजना आ रही है इसके अलावा ‘बेस्ट’ को खड़ा करने की जरूरत है। अधर में लटकी सड़क परियोजनाओं पर जब तक युद्धस्तर पर काम नहीं होगा तब तक ट्रैफिक जाम की समस्या नहीं सुलझेगी। ये जरूरी इसलिए भी है कि पूरे देश से जनता यहीं आती है। ये एक नेशनल इश्यू है। ये समस्या स्टेट लेवल या म्यूनिसिपल स्तर पर नहीं हल होगी। सेंट्रल लेवल पर ही यह समस्या सुलझनी चाहिए। इसके लिए स्पेशल प्लानिंग, स्पेशल फंड की जरूरत है जो कि इस बजट में नहीं हुआ। मेट्रो परियोजना ही सबसे बड़ी उम्मीद है। ये परियोजनाएं फंड की कमी के चलते नहीं रुकनी चाहिए। वरिष्ठ नागरिक प्रेमलता शिंदे का कहना है कि समाज में एक ऐसा भी तबका है, जो असहाय है। ओल्ड एज होम के लिए कोई व्यवस्था करनी चाहिए थी। कुछ संस्थाएं हैं, जो इनके लिए काम करती हैं लेकिन इन्हें लॉन्ग टर्म खर्च मिलना चाहिए ताकि बुढ़ापे में उनके मेडिकल व खाने की व्यवस्था हो सके परंतु बजट में इनके संदर्भ में कुछ नहीं कहा गया।
ठाणे रेल प्रवासी संगठन के अध्यक्ष नंदकुमार देशमुख का कहना है कि रेलमंत्री पीयूष गोयल ने पिछले बजट में जो एमयूटीपी-३ और एमयूटीपी-३ए के लिए ५५,७७० करोड़ रुपए घोषित किया था, वह कब मिलेगा? इस बजट में मिलना चाहिए था। मुंबई में चल रही पांचवीं, छठीं लाइन, तीसरी चौथी रेल लाइन परियोजना, कल्याण-बदलापुर, कल्याण-आसनगांव, पनवेल-कर्जत दूसरी लाइन, पनवेल-विरार दूसरी लाइन, विरार से पनवेल तीसरी-चौथी लाइन, मुंबई से पनवेल ५५ किमी पनवेल परियोजना सहित १५ डिब्बा लोकल होना चाहिए लेकिन ऐसी कोई घोषणा बजट में नहीं हुई है। ये परियोजनाएं कब साकार होंगी? इसे लेकर मुंबईकर परेशान हैं। ऑटोरिक्शा चालक ब्रिजेश यादव का कहना है कि बजट में ऑटो पार्ट्स पर बेसिक कस्टम ड्यूटी बढ़ा दी गई है। ऑटो सेक्टर पहले से ही परेशानी में चल रहा है इससे इस सेक्टर को और चोट लगेगी। इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने की बात तो है लेकिन इसका फायदा इतनी जल्दी नहीं मिलेगा।
हेल्थ पर इस बार ज्यादा जोर दिया गया है। पिछली बार के बजट में जितनी निधि की घोषणा हुई थी, उसकी अपेक्षा इस बार ६२,६५९ करोड़ रुपए दिए गए हैं, जो कि १५ प्रतिशत ज्यादा है। जन आरोग्य अभियान के समन्वयक अभिजीत मोरे का कहना है कि बिहार के मुजफ्फरपुर में १५० से अधिक बच्चों की मौत, डॉक्टरों पर होनेवाले हमले, डॉक्टरों की हड़ताल, इन मुद्दों पर वित्त मंत्री से उम्मीद थी कि वे आरोग्य व्यवस्था में इस पर कुछ बोलेंगी, लेकिन इनका उल्लेख तक नहीं किया गया, जिससे हेल्थ सेक्टर में निराशा है।