" /> मुंब्रा ने दिखाया दम कोरोना हुआ पानी कम

मुंब्रा ने दिखाया दम कोरोना हुआ पानी कम

कभी कोरोना संक्रमण के हॉट स्पॉट के रूप में कुख्यात हुए मुंब्रा ने अब अपना दम दिखाना शुरू कर दिया है। नतीजतन धारावी के बाद अब मुंब्रा में भी कोरोना पानी कम साबित होने लगा है। मुंबई के धरावी तथा ठाणे के मुंब्रा, इस समय कोरोना कंट्रोल को लेकर चर्चा में हैं। ये दो इलाके एक ऐसी नजर बन कर सामने आए हैं जो लोगों को बता रहे हैं कि कोरोना को मात दी जा सकती है। साढ़े सात लाख की बेहद घनी आबादी वाले क्षेत्र मुंब्रा के वासियों ने खुद को नियंत्रित रखकर कोरोना कंट्रोल के मामले में ये करके दिखा दिया है। उसके लिए मनपा, पुलिस, स्थानीय कार्यकर्ताओं से लेकर मुस्लिम धर्मगुरुओं का अथक परिश्रम और प्रयास शामिल है। लॉकडाउन का पालन करने के लिए जहां लोगों के बीच व्यापक अभियान चलाया गया, वहीं नियमों का उल्लंघन करने पर कड़ी कार्रवाई की गई, आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए गए तथा ट्रेसिंग और ट्रीटमेंट पर विशेष ध्यान दिया गया।
५ नोडल अधिकारियों की नियुक्ति
मुंब्रा प्रभाग समिति के अंतर्गत ४ अप्रैल को अमृत नगर में एक पहला कोरोना संक्रमित मरीज पाया गया था और उस परिसर को सील कर दिया गया था। स्थानीय लोगों ने इस महामारी को गंभीरता से नहीं लिया। इसका परिणाम ये हुआ कि मनपा की अन्य प्रभाग समितियों की अपेक्षा मुंब्रा में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ती चली गई। मुंब्रा-कौसा को रेड जोन घोषित कर दिया गया। इस दौरान कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए ५ नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की गई। इनमें से ४ अधिकारियों को अलग-अलग तरह के काम की जिम्मेदारी सौंपी गई, जिसमें ट्रेसिंग, टेस्टिंग, ट्रीटमेंट तथा स्थानीय डॉक्टरों और सामाजिक कार्यकर्ताओं से सहयोग लेना शामिल था। एक अधिकारी को सिर्फ चारों के बीच समन्वय स्थापित करने का काम दिया गया था। पांचों अधिकारियों के संयुक्त प्रयास से घर-घर में जोरदार अभियान चलाया गया।
नया क्वारंटाइन सेंटर बना वरदान
मुंब्रा से दूर घोड़बंदर रोड स्थित भाइंदर पाढ़ा में बने क्वारंटाइन सेंटर में जाने की बजाय मरीज घर में ही रहना पसंद करने लगे थे। लिहाजा, शिवसेना नेता एवं पालक मंत्री एकनाथ शिंदे तथा स्थानीय विधायक एवं गृह निर्माण मंत्री जितेंद्र आव्हाड के मार्गदर्शन में संक्रमित मरीजों के लिए कौसा स्थित स्टेडियम में ४०० बेड का कोविड केयर सेंटर तथा क्वारंटाइन सेंटर का निर्माण करवाया गया, जो दिवा, मुंब्रा तथा आसपास के मरीजों के लिए वरदान साबित हुआ।
नियमों के उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई
मुस्लिम बहुल मुंब्रा में रमजान महीने में पुलिस तथा मनपा अधिकारियों को कड़ी मशक्कत का सामना करना पड़ा था। मुस्लिम धर्मगुरुओं तथा मस्जिद के मौलानाओं की इसमें मदद ली गई। लोगों से नियमों का पालन करने का एलान कराया गया। इसका व्यापक असर हुआ। दूसरी तरफ भीड़ एकत्रित करने, मास्क न लगाने, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन न करने, पुलिस तथा मनपा अधिकारियों के साथ वाद-विवाद तथा मारामारी करने जैसे मामलों में कठोर करवाई की गई। इस तरह के मामलों पर अंकुश लगाने के लिए सबसे पहले मुंब्रा में एसआरपीएफ की तीन टुकड़ियों को तैनात किया गया। इस दौरान मुुंब्रा पुलिस थाने के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक सहित कई पुलिस कर्मचारी कोरोना पॉजिटिव हो गए।
सबका साथ, मिला उत्तम प्रतिसाद
विधायक जितेंद्र आव्हाड, स्थानीय नगरसेवकों, पुलिस तथा मनपा अधिकारियों एवं कर्मचारियों, स्वंयसेवी संगठनों आदि के संयुक्त प्रयास से मुंब्रा प्रभाग समिति के अंतर्गत कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या अन्य प्रभाग समितियों की अपेक्षा बेहद कम हुई है। प्रतिदिन १०० से ज्यादा लोगों के टेस्ट किए जा रहे हैं। पिछले महीने मृत्यु दर जहां ३.९ प्रतिशत थी, वहीं अब यह घटकर ३ प्रतिशत तक पहुंच गई है। १ जुलाई से १५ जुलाई के बीच मुंब्रा में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या जहां सबसे कम दो रही, वहीं सबसे ज्यादा २७ थी।